अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक चौंकाने वाला दावा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें दिए गए आश्वासन के बाद लिया गया है. इस बयान के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल मच गई. लेकिन भारत सरकार ने ट्रंप के इस दावे पर स्पष्ट रूप से प्रतिक्रिया दी है.
विदेश मंत्रालय ने न केवल ट्रंप के साथ किसी तरह की हालिया बातचीत से इनकार किया है, बल्कि भारत की ऊर्जा नीति को लेकर भी अपनी स्थिति साफ कर दी है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत की तेल खरीद नीति देश के हितों और वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप बनाई जाती है, और यह किसी बाहरी दबाव के अधीन नहीं होती.
क्या हुई थी पीएम मोदी और ट्रंप के बीच बात?
ट्रंप के बयान में कहा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें फोन पर भरोसा दिलाया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी फोन कॉल की उन्हें जानकारी नहीं है.
उन्होंने कहा, “मेरे पास इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल में कोई फोन वार्ता हुई है. मेरी जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच आखिरी बातचीत 9 अक्टूबर को हुई थी.”
इस प्रकार, ट्रंप द्वारा दावा की गई किसी नई बातचीत की पुष्टि भारत की ओर से नहीं की गई है, जिससे उनके दावे की सच्चाई पर सवाल खड़े हो गए हैं.
भारत की ऊर्जा नीति क्या कहती है?
रूस से तेल खरीद को लेकर ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने भारत की ऊर्जा नीति पर भी अपनी बात स्पष्ट की. रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति का प्राथमिक उद्देश्य स्थिर ऊर्जा कीमतों और सुरक्षित आपूर्ति को सुनिश्चित करना है.
उन्होंने कहा, “हमारी नीति बाजार की स्थितियों और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाती है. भारत ऊर्जा आपूर्ति के अपने स्रोतों को विविध बनाने की दिशा में काम कर रहा है. वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में ऊर्जा सुरक्षा हमारी प्राथमिकताओं में से एक है.”
इसका सीधा मतलब यह है कि भारत किसी एक देश या नेता के कहने पर अपनी ऊर्जा रणनीति में बदलाव नहीं करता, बल्कि यह निर्णय घरेलू जरूरतों और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के आधार पर लिए जाते हैं.
ट्रंप के भारत विरोधी बयानों का सिलसिला
यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर विवादास्पद बयान दिया हो. अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने कई बार भारत-पाकिस्तान के संबंधों में मध्यस्थता करने की बात कही थी. उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को भी अपनी पहल बताया था, जबकि भारत ने उस दावे को पूरी तरह खारिज किया था.
अब रूसी तेल को लेकर उनके ताजा बयान को भी उसी कड़ी में देखा जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस समय अमेरिका में चुनावी गतिविधियों में सक्रिय हैं और दक्षिण एशिया को लेकर ऐसे बयान देकर वे अपनी छवि मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.
भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग
भारत और रूस के बीच ऊर्जा के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग रहा है. विशेषकर यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीद को बढ़ावा दिया, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कीमतों से कम पर पेट्रोल-डीजल उपलब्ध कराया जा सका.
हालांकि पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका, ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को प्राथमिकता देते हुए रूस से व्यापार जारी रखा है. भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वह एक संप्रभु राष्ट्र है और उसकी नीतियां राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं, न कि किसी वैश्विक दबाव पर.
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