IND vs WI 1st Test: विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ध्रुव जुरेल ने शुक्रवार को क्रिकेट के मैदान पर वो जज़्बा दिखाया, जो सिर्फ बल्ले से नहीं, दिल से खेला जाता है. वेस्टइंडीज़ के खिलाफ अपने करियर का पहला टेस्ट शतक जड़ते ही जुरेल ने जो किया, उसने करोड़ों भारतीयों का दिल छू लिया.
24 वर्षीय जुरेल ने जैसे ही अपने 100 रन पूरे किए, उन्होंने सीधा स्टैंड्स की ओर देखकर सेना को सलामी दी. ये जश्न किसी ट्रेंड या स्टाइल का हिस्सा नहीं था, बल्कि ये था एक सच्चे फौजी बेटे का सम्मान और गर्व से भरा संदेश.
A moment to cherish forever! 🥳
— BCCI (@BCCI) October 3, 2025
Special scenes 📹 in Ahmedabad as Dhruv Jurel notches up a maiden Test 💯
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"पचासा पापा के लिए, शतक सेना के लिए"
ध्रुव जुरेल के पिता भारतीय सेना में रह चुके हैं और कारगिल युद्ध के योद्धा रहे हैं. जुरेल ने बताया, “अर्धशतक मेरे पिता के लिए था और शतक भारतीय सेना के लिए. रणभूमि में जो योगदान वो देते हैं, उसके लिए मेरा सिर हमेशा उनके सामने झुकता है.” उनकी यह पारी सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक भावनात्मक श्रद्धांजलि बन गई उन सभी जवानों के लिए, जो देश की रक्षा के लिए हर दिन मोर्चे पर खड़े हैं.
टीम के लिए भी मिसाल बने जुरेल
ध्रुव ने न सिर्फ खुद के लिए बल्कि टीम इंडिया के लिए भी यह दिन यादगार बना दिया. केएल राहुल (100) और रवींद्र जडेजा (104 नाबाद) के साथ मिलकर भारत को 5 विकेट पर 448 रन के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया. जुरेल की 125 रनों की पारी में धैर्य, तकनीक और जज्बे का अद्भुत मेल देखने को मिला.
"अगर खेल नहीं रहा होता, तब भी मेहनत करता हूं"
मैच के बाद जुरेल ने कहा, "टीम के साथ बने रहना भी एक जिम्मेदारी है. अगर मैं नहीं भी खेल रहा होता, तब भी मेहनत करता. ये अनुशासन से आता है. खुद को प्रेरित रखना ज़रूरी है."
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