डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट... अवैध घुसपैठियों के खिलाफ शुभेंदु सरकार का एक्शन, 4,800 बांग्लादेशी डिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा को लेकर अभियान तेज कर दिया गया है.

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा को लेकर अभियान तेज कर दिया गया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है. राज्य सरकार के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान लगभग 4,800 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सहयोग से बांग्लादेश भेजा गया है.

इस कार्रवाई के बीच भारत-बांग्लादेश सीमा पर कुछ स्थानों पर तनाव की स्थिति भी देखने को मिली, जहां सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दे सामने आए. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि अवैध घुसपैठियों की पहचान और वापसी की प्रक्रिया जारी है.

‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति पर जोर

नई सरकार ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ (3D) नीति अपनाने की घोषणा की है. इसके तहत सीमावर्ती जिलों में पहचान अभियान चलाया जा रहा है और संदिग्ध मामलों की जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान समय में 836 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक विभिन्न होल्डिंग सेंटरों में मौजूद हैं और उनकी पहचान एवं प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया जारी है.

कार्रवाई और टाइमलाइन

19 मई 2026

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आधिकारिक रूप से ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति लागू करने की घोषणा की. इसके बाद सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान शुरू किया गया.

25 मई 2026

सरकार ने अवैध प्रवासियों को राज्य छोड़ने की चेतावनी दी. इसी दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई और होल्डिंग सेंटरों को सक्रिय किया गया.

27 मई 2026

पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए गए कि पकड़े गए अवैध प्रवासियों को कानूनी प्रक्रिया के बाद BSF को सौंपा जाए ताकि निर्धारित नियमों के तहत उन्हें वापस भेजा जा सके.

30 मई 2026

राज्य सरकार ने 2,680 से अधिक संदिग्ध घुसपैठियों की सूची सत्यापन के लिए संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराई.

7 जून 2026

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि एक महीने के भीतर 4,800 लोगों को वापस भेजा जा चुका है, जो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे में नहीं आते थे.

8 जून 2026

सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगभग 100 किलोमीटर क्षेत्र में फेंसिंग परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई. इसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों को प्राथमिकता दी गई.

10 जून 2026

राज्य सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा और घुसपैठ रोकने के लिए राज्य प्रशासन तथा BSF के बीच सीधा समन्वय स्थापित किया गया है.

11 जून 2026

BSF अधिकारियों के हवाले से जानकारी सामने आई कि 19 मई से 10 जून के बीच लगभग 1,930 लोगों को सीमा चौकियों के माध्यम से वापस भेजा गया.

सीमा सुरक्षा पर विशेष फोकस

पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लगभग 2,217 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जो देश के किसी भी राज्य की सबसे लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा मानी जाती है. सीमा के कई हिस्से नदी क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों से होकर गुजरते हैं, जिससे निगरानी चुनौतीपूर्ण हो जाती है.

राज्य सरकार और BSF ने मिलकर पहले उन क्षेत्रों में सुरक्षा ढांचा मजबूत करने की रणनीति बनाई है जिन्हें घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. फेंसिंग और निगरानी प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जा रहा है.

ग्रामीण इलाकों में भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत

सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ गांवों में लंबे समय से सुरक्षा और अवैध गतिविधियों को लेकर चिंता जताई जाती रही है. फेंसिंग और सुरक्षा उपायों के विस्तार के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की उम्मीद जताई है. अधिकारियों का मानना है कि सीमा प्रबंधन को मजबूत करने से घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा.

राज्य सरकार का कहना है कि सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय जारी रहेगा तथा आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

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