टैरिफ के बावजूद अमेरिका के आगे नहीं झुका भारत, रूस से जहाज भर-भरकर खरीद रहा तेल, क्या करेंगे ट्रंप?

अमेरिका के बार-बार चेतावनी देने और भारी भरकम टैरिफ लगाने के बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने के बजाय बढ़ा दी है.

Despite American tariffs India is buying oil from Russia
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

India Russia Oil Trade: दुनिया की राजनीति इस समय कई मोर्चों पर खिंची हुई है. यूक्रेन युद्ध के चलते रूस को अंतरराष्ट्रीय मंच पर घेरने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन भारत ने साफ संकेत दे दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आगे किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं है.

अमेरिका के बार-बार चेतावनी देने और भारी भरकम टैरिफ लगाने के बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने के बजाय बढ़ा दी है. यही नहीं, भारत अब चीन के बाद रूस से सबसे अधिक जीवाश्म ईंधन आयात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है.

अगस्त में रूस से 3.4 अरब डॉलर का तेल खरीदा

ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत ने अगस्त 2025 में रूस से करीब 2.9 बिलियन यूरो यानी लगभग 3.4 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया. यह मात्रा जुलाई के मुकाबले काफी ज्यादा है, जब भारत ने 2.7 बिलियन यूरो का तेल खरीदा था.

यानी भारत ने अमेरिकी दबाव के बावजूद तेल की खरीद बढ़ाई, जो यह दर्शाता है कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के प्रति किसी भी राजनीतिक दबाव से समझौता करने को तैयार नहीं है.

दूसरी ओर, चीन ने अगस्त में 3.1 बिलियन यूरो का तेल रूस से मंगवाया, जबकि जुलाई में उसने 4.1 बिलियन यूरो का आयात किया था. यानी चीन में रूस से तेल खरीद में कमी आई है, लेकिन भारत की खरीदारी लगातार बढ़ रही है.

अमेरिका की नाराज़गी, लेकिन भारत अडिग

यूक्रेन संकट के चलते अमेरिका और पश्चिमी देश लगातार चाहते हैं कि भारत रूस से दूरी बनाए, खासकर तेल और गैस जैसे उत्पादों को लेकर. अमेरिका ने भारत पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए 25% अतिरिक्त टैक्स लगाने का फैसला किया, जिससे भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों पर कुल 50% तक का टैरिफ लग चुका है.

लेकिन भारत सरकार ने इस दबाव को झेलते हुए भी अपनी ऊर्जा नीति में कोई बदलाव नहीं किया है. भारत का मानना है कि राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा किसी भी प्रकार की वैश्विक राजनीति से ऊपर है.

विशेष बात यह है कि अमेरिका ने केवल भारत पर यह अतिरिक्त टैक्स लगाया है, जबकि रूस से तेल खरीदने वाले अन्य देशों पर कोई ऐसा टैरिफ नहीं लगाया गया है. यही कारण है कि यह फैसला भारत के लिए असमान और पक्षपातपूर्ण व्यवहार जैसा देखा जा रहा है.

यूरोपीय देशों पर भी ट्रंप का दबाव

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद जियो-पॉलिटिक्स में फिर से बदलाव देखा जा रहा है. खबरों के मुताबिक, ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन से भी अपील की है कि वे भारत और चीन के सामान पर 100% टैक्स लगाएं.

उनका तर्क है कि इससे इन देशों पर रूस से तेल खरीदने को लेकर दबाव बनेगा और यूक्रेन संकट के समाधान की दिशा में कदम बढ़ेगा.

हालांकि यूरोपीय यूनियन ने इस मांग पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन इतना तय है कि यदि यूरोप इस दिशा में कदम उठाता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सहयोग पर गंभीर हो सकता है.

तुर्किये और चीन भी रूस से खरीदारी में पीछे नहीं

भारत भले ही अमेरिका की नाराजगी के बावजूद रूस से खरीदारी कर रहा हो, लेकिन तुर्किये और चीन भी इसी राह पर हैं.

तुर्किये इस समय रूस से तेल उत्पादों और गैस का सबसे बड़ा आयातक बन गया है.

चीन अब भी कच्चे तेल और कोयले का सबसे बड़ा ग्राहक बना हुआ है, हालांकि उसकी खरीद में हल्की गिरावट देखी गई है.

इन आंकड़ों से साफ है कि रूस के खिलाफ वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद, कई देश अब भी अपने ऊर्जा हितों की प्राथमिकता बनाए हुए हैं.

रूस से दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन आयातक

ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत अब रूस से जीवाश्म ईंधनों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन चुका है.

भारत ने अगस्त में 3.6 बिलियन यूरो के जीवाश्म ईंधन का आयात किया.

इनमें शामिल हैं:

  • 510 मिलियन यूरो का कोयला
  • 282 मिलियन यूरो के परिष्कृत (refined) उत्पाद
  • इसके मुकाबले, चीन का कुल आयात 5.6 बिलियन यूरो का रहा.

चीन ने:

  • 553 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद
  • 676 मिलियन यूरो की पाइपलाइन गैस
  • 55 मिलियन यूरो का कोयला मंगवाया

इन आँकड़ों से पता चलता है कि भारत, चीन की तुलना में भले कुछ पीछे हो, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा और लागत में संतुलन बनाए रखने के लिए रूस के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्ते बनाए रख रहा है.

ये भी पढ़ें- F-35 vs J-20 vs Su-57... रूसी स्टील्थ फाइटर जेट ने अमेरिका और चीन को पछाड़ा, ड्रोन युद्ध की रेस तेज