Weather Update: उत्तर भारत में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है. जहां एक ओर पहाड़ी राज्यों में लंबे इंतजार के बाद बर्फबारी की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में जहरीली हवा और घने कोहरे ने हालात बिगाड़ दिए हैं. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आज से हिमालयी क्षेत्रों में एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसका असर पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक साफ तौर पर देखने को मिलेगा.
मौसम विभाग के मुताबिक, इस सर्दी के सीजन में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बर्फबारी हुई है. पिछले कुछ महीनों में आए पश्चिमी विक्षोभ कमजोर साबित हुए और अधिकांश सिस्टम उत्तर की ओर मुड़ गए, जिससे पहाड़ सूखे ही रहे. लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं. 19 जनवरी 2026 से एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसके बाद लगातार दो और सिस्टम आने की संभावना है. इसका असर 20 जनवरी को हिमालयी इलाकों में भारी बर्फबारी के रूप में दिख सकता है. बर्फ गिरने से न सिर्फ तापमान में तेज गिरावट आएगी, बल्कि पहाड़ों की सूखी सर्दी भी खत्म होगी.
मैदानी इलाकों में बारिश के आसार
पश्चिमी विक्षोभ का असर सिर्फ पहाड़ों तक सीमित नहीं रहेगा. मौसम विभाग का अनुमान है कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कई हिस्सों में 23 से 25 जनवरी के बीच अच्छी बारिश हो सकती है. इससे जहां ठंड और बढ़ेगी, वहीं प्रदूषण से कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद भी की जा रही है.
दिल्ली-NCR में जहरीली हवा ने बढ़ाई मुश्किल
उधर, दिल्ली-NCR में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं. राजधानी में सोमवार सुबह भी घना कोहरा और स्मॉग छाया रहा, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई. सड़कों पर वाहन धीमी रफ्तार से चलते नजर आए. ठंडी हवा की कमी और स्थिर वातावरण के चलते प्रदूषक कण जमीन के पास ही फंसे हुए हैं, जिससे हवा और ज्यादा जहरीली हो गई है.
गंभीर स्तर पर पहुंचा AQI
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 444 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है. आईटीओ क्षेत्र में AQI 434 और रफी मार्ग के पास 417 रिकॉर्ड किया गया. हालात सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं हैं, नोएडा में AQI 430 और गुरुग्राम में 378 तक पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है.
GRAP-4 के तहत सख्त पाबंदियां
वायु गुणवत्ता में तेज गिरावट को देखते हुए प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण-4 को लागू कर दिया है. इसके तहत दिल्ली में सभी तरह के निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. स्कूलों और दफ्तरों को हाइब्रिड मोड में चलाने की सलाह दी गई है, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो सके. साथ ही, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के प्रवेश पर भी सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं. आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान परिवहन से हो रहा है, जिसकी हिस्सेदारी 10.6% है, जबकि उद्योगों का योगदान 7.7% दर्ज किया गया है.
कोहरे को लेकर येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने दिल्ली के कई इलाकों में घने कोहरे को देखते हुए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है. रविवार को राजधानी का न्यूनतम तापमान सामान्य से करीब 2.3 डिग्री कम होकर 5.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम तापमान 22.7 डिग्री रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक हवा की रफ्तार नहीं बढ़ती या बारिश नहीं होती, तब तक स्मॉग से राहत मिलना मुश्किल है. ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम और प्रदूषण दोनों ही उत्तर भारत के लिए बड़ी चुनौती बने रहेंगे.
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