नई दिल्ली: दिल्ली में वायु गुणवत्ता ने इस साल पहली बार गंभीर स्थिति को छुआ है, जिससे राजधानी के निवासियों के लिए चिंता बढ़ गई है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 428 दर्ज किया गया, जो कि स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माना जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रदूषण का मुख्य कारण ठंडी हवाओं की कमी और पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि है.
ग्रेप-3 लागू, दिल्ली में सख्त प्रतिबंध
दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण को लागू कर दिया गया है. इसके तहत निर्माण और विध्वंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है. साथ ही, बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों का प्रवेश दिल्ली में प्रतिबंधित कर दिया गया है, केवल आवश्यक वस्तुएं लाने वाले वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति होगी. ग्रेप-3 के तहत निर्माण कार्यों पर पाबंदी लगाई गई है और खनन गतिविधियां भी पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं. इसके अलावा, एनसीआर से आने वाली अंतरराज्यीय बसों को भी दिल्ली में प्रवेश नहीं मिलेगा, हालांकि इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों को छूट दी गई है.
दिल्ली में स्कूलों को लेकर नई सिफारिश
दिल्ली में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, वायु गुणवत्ता के गंभीर स्तर पर कक्षा पांचवीं तक के स्कूलों को हाइब्रिड मोड में संचालित करने की सिफारिश की गई है. इससे बच्चों को कम से कम बाहर निकलने की जरूरत पड़ेगी और उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा. इसके अलावा, सिविक एजेंसियों को भी सरकारी विभागों के कार्य समय में बदलाव पर विचार करने को कहा गया है.
प्रदूषण के खिलाफ सख्त कदम
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक मिशन मोड में काम करने का निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें उन्होंने संबंधित विभागों को ठोस और समयबद्ध कदम उठाने के निर्देश दिए. बैठक में यह तय किया गया कि सभी निर्माण स्थल और प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर तुरंत सीलिंग और जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस वर्ष एनफोर्समेंट टीमों की संख्या बढ़ाकर 2,088 कर दी गई है, जो प्रदूषण हॉटस्पॉट्स पर तैनात रहेंगी. साथ ही, दिल्ली की सड़कों पर धूल के जमा होने की समस्या को हल करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे.
सड़क धूल को नियंत्रित करने के उपाय
मुख्यमंत्री ने एमसीडी और अन्य एजेंसियों को निर्देश दिया कि दिल्ली की सड़कों को ‘वॉल-टू-वॉल’ बनाया जाए ताकि सड़क किनारे धूल का जमाव पूरी तरह से खत्म किया जा सके. इसके अलावा, सड़क की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी और 30 नवंबर तक 300 से अधिक मिस्ट स्प्रे सिस्टम लगाए जाएंगे, ताकि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके.
सीएक्यूएम की सलाह: प्रदूषण से बचाव के लिए अपनाएं ये कदम
दिल्ली वासियों को प्रदूषण से बचने के लिए सीएक्यूएम (सीएनसी) ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. इनमें शामिल हैं - कम दूरी के लिए साइकिल का उपयोग करें, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें, कार पूलिंग को बढ़ावा दें, और घर से बाहर जाने से पहले कार्यस्थल से वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था पर विचार करें. साथ ही, हीटिंग के लिए कोयला और लकड़ी का उपयोग करने से बचने की सलाह दी गई है.
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रशासन की सख्ती
दिल्ली सरकार और सीपीसीबी प्रदूषण नियंत्रण के लिए पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में प्रशासन प्रदूषण के प्रमुख कारणों वाहन उत्सर्जन, पराली जलाने और धूल प्रदूषण पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर रहा है. इन समस्याओं का समाधान जल्द ही निकाला जाएगा, ताकि दिल्लीवासियों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिल सके.
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