दिल्ली में पियक्कड़ों की होने वाली है मौज, सरकार घटा सकती है बियर पीने की उम्र, क्या बदलेगी शराब नीति?

दिल्ली में शराब नीति को लेकर फिर से बदलाव की संभावनाएं सामने आई हैं. पिछले दस सालों में आम आदमी पार्टी की सरकार शराब पीने की कानूनी उम्र 25 वर्ष से कम कर 21 करने में सफल नहीं हो सकी, लेकिन अब सत्ताधारी भाजपा सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है.

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नई दिल्ली: दिल्ली में शराब नीति को लेकर फिर से बदलाव की संभावनाएं सामने आई हैं. पिछले दस सालों में आम आदमी पार्टी की सरकार शराब पीने की कानूनी उम्र 25 वर्ष से कम कर 21 करने में सफल नहीं हो सकी, लेकिन अब सत्ताधारी भाजपा सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है. नई आबकारी नीति के तहत सिर्फ बीयर के लिए उम्र घटाने का प्रस्ताव है, जिससे शराब के काले बाजार और राजस्व नुकसान पर अंकुश लगाया जा सके. आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं.

दस सालों का संघर्ष और अब नई पहल

आम आदमी पार्टी के दस साल के कार्यकाल में शराब की कानूनी उम्र 25 से 21 वर्ष करने का प्रयास तो हुआ, लेकिन वह विवादों में फंस गया. उस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जेल भी जाना पड़ा. अब दिल्ली में भाजपा की सरकार बीयर पीने वालों के लिए उम्र घटाने पर विचार कर रही है.

नई आबकारी नीति और समिति की सिफारिशें

दिल्ली सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है, जो नई आबकारी नीति तैयार कर रही है. इस समिति ने बीयर की कानूनी उम्र 25 से घटाकर 21 करने का सुझाव दिया है. हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. समिति के अध्यक्ष, लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा, अन्य हितधारकों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं.

लक्ष्य: राजस्व बढ़ाना और नागरिकों की सुविधा

सरकार का मुख्य उद्देश्य आबकारी से होने वाले राजस्व में वृद्धि करना और साथ ही आम जनता को असुविधा से बचाना है. इस नीति के तहत शराब की दुकानें आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों और धार्मिक स्थलों से दूर रखी जाएंगी ताकि समाज में इसके नकारात्मक प्रभाव कम हों.

पड़ोसी शहरों से तुलना और असमानता का असर

दिल्ली में अभी तक शराब पीने की उम्र 25 वर्ष है, जबकि एनसीआर के गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे पड़ोसी शहरों में यह उम्र 21 वर्ष है. इस असमानता के कारण दिल्ली को राजस्व का नुकसान होता है क्योंकि युवा आसपास के शहरों में जाकर शराब खरीदते हैं. इस वजह से सरकार अब इस अंतर को खत्म करने का प्रयास कर रही है.

शराब की दुकानों का स्थान और सुविधा में सुधार

नई नीति में यह भी विचार किया जा रहा है कि शराब की दुकानों को मॉल और सुपरमार्केट जैसे सार्वजनिक स्थानों में खोलने की अनुमति दी जाए. फिलहाल शहर में शॉपिंग मॉल में सिर्फ 14 शराब की दुकानें हैं जबकि मॉल की संख्या सौ से अधिक है. किराए की अधिकता के कारण अधिक दुकानें खोलना संभव नहीं हो पाया है. नई नीति इस दिशा में बदलाव ला सकती है.

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