राजधानी दिल्ली में सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बड़ा फैसला लिया है. प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण, अवैध निर्माण या अनधिकृत पार्किंग मिलने पर पहले की तरह नोटिस देने की प्रक्रिया का इंतजार नहीं किया जाएगा. नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सीधे कार्रवाई होगी. इतना ही नहीं, अवैध कब्जा हटाने का पूरा खर्च भी संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा और कानून के तहत उसके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है.
डीडीए के भूमि प्रबंधन आयुक्त डॉ. मन्नान अख्तर ने कहा कि सरकारी जमीनों पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जहां भी अतिक्रमण या अवैध निर्माण मिलेगा, वहां बिना पूर्व सूचना के बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी. इसका उद्देश्य सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराना और भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगाना है.
बिना पूर्व सूचना के होगी कार्रवाई
DDA ने अपनी नई नीति के तहत साफ संदेश दिया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यदि किसी स्थान पर अतिक्रमण या अनधिकृत निर्माण पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति को पहले से नोटिस देने की अनिवार्यता नहीं होगी. प्राधिकरण के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और राजधानी में बढ़ते अवैध कब्जों पर प्रभावी रोक लगाना है.
ध्वस्तीकरण का खर्च भी देना होगा
इस बार DDA की कार्रवाई केवल अवैध निर्माण हटाने तक सीमित नहीं रहेगी. अधिकारियों के मुताबिक, अतिक्रमण हटाने में आने वाला पूरा खर्च कब्जाधारी से भू-राजस्व बकाया की तरह वसूला जाएगा. इसके साथ ही सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाएगी. यानी अब अतिक्रमण करने वालों को आर्थिक और कानूनी दोनों तरह की सख्ती का सामना करना पड़ सकता है.
पांच वर्षों में सैकड़ों अभियान
दिल्ली विकास प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान राजधानी में कुल 316 ध्वस्तीकरण अभियान चलाए गए, जिनके जरिए लगभग 198 एकड़ सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया. वर्ष 2024-25 में 122 अभियानों के माध्यम से 24.3 एकड़, 2023-24 में 113 अभियानों से 66 एकड़, 2022-23 में 35 अभियानों के जरिए 44.91 एकड़, 2021-22 में 20.29 एकड़ और 2020-21 में करीब 43 एकड़ सरकारी भूमि को खाली कराया गया. यह आंकड़े बताते हैं कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं.
संपत्ति खरीदने से पहले बरतें सावधानी
DDA ने नागरिकों से भी सतर्क रहने की अपील की है. प्राधिकरण का कहना है कि किसी भी संपत्ति को खरीदने से पहले उसके स्वामित्व और कानूनी स्थिति की पूरी तरह जांच कर लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी विवाद का सामना न करना पड़े. यदि किसी क्षेत्र में अवैध निर्माण या सरकारी जमीन पर अतिक्रमण दिखाई देता है तो उसकी शिकायत DDA-311 मोबाइल ऐप या टोल-फ्री नंबर 1800-110-332 के माध्यम से दर्ज की जा सकती है. प्राधिकरण ने भरोसा दिलाया है कि प्राप्त शिकायतों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.
ये भी पढ़ें: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन दोषी करार, कड़कड़डूमा कोर्ट का बड़ा फैसला