Ashwini Vaishnaw IMF Davos Statement: स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक बहस हो रही थी, तभी भारत को लेकर की गई एक टिप्पणी ने सुर्खियां बटोर लीं. चर्चा के दौरान भारत को ‘दूसरे टीयर’ की AI पावर बताए जाने पर केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुलकर असहमति जताई. उन्होंने न सिर्फ इस वर्गीकरण को गलत बताया, बल्कि पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि भारत आज पहले स्तर की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शक्ति है.
अश्विनी वैष्णव ने मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि IMF ने AI पावर को मापने के लिए कौन-सा पैमाना अपनाया है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से जारी ग्लोबल AI रेडीनेस लिस्ट में भारत को दुनिया के शीर्ष देशों में तीसरा स्थान दिया गया है. उनके मुताबिक, जब प्रतिष्ठित संस्थान भारत की तैयारी और क्षमता को इतना ऊंचा आंक रहे हैं, तो ‘सेकेंड टियर’ जैसा टैग बिल्कुल भी सही नहीं ठहराया जा सकता.
Ashwini Vaishnaw pushes back after IMF chief calls India a second-tier AI power
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) January 21, 2026
"I don't know what the IMF criteria is but Stanford places India at 3rd in the world for AI preparedness. I don't think your classification is correct" pic.twitter.com/fEBWL4Ekms
सिर्फ बड़े मॉडल ही नहीं, पूरा इकोसिस्टम मायने रखता है
आईटी मंत्री ने AI लीडरशिप की परिभाषा पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि किसी देश की AI ताकत को सिर्फ इस आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए कि वह कितने बड़े लैंग्वेज मॉडल बना रहा है. असली ताकत उस टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में होती है, जो लचीला हो, इनोवेशन को बढ़ावा देता हो और बड़े पैमाने पर समाधान देने में सक्षम हो. उनके शब्दों में, “केवल एक बड़ा AI मॉडल बना लेने से कोई देश तकनीकी रूप से शक्तिशाली नहीं बन जाता.”
सेमीकंडक्टर से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक भारत की तैयारी
चर्चा के दौरान अश्विनी वैष्णव ने भारत की दीर्घकालिक रणनीति पर भी रोशनी डाली. उन्होंने बताया कि भारत एक व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित कर रहा है, जिसमें डिजाइनिंग, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, मैटेरियल और इक्विपमेंट सभी शामिल हैं. उनका कहना था कि भारत खुद को सिर्फ AI यूजर के तौर पर नहीं, बल्कि ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन के एक बड़े हब के रूप में स्थापित करना चाहता है.
वैश्विक कंपनियों का भारत पर बढ़ता भरोसा
आईटी मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि आज दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रही हैं. उन्होंने गूगल का उदाहरण देते हुए बताया कि कंपनी भारत में अपने AI डेटा सेंटर्स का विस्तार करने की योजना बना रही है. इसके साथ ही भारतीय स्टार्टअप्स के साथ गहरी और दीर्घकालिक साझेदारियों पर भी काम हो रहा है. यह सब इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के AI इकोसिस्टम पर भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है.
पांचवीं औद्योगिक क्रांति और भारत की सोच
अश्विनी वैष्णव ने AI को भविष्य की “पांचवीं औद्योगिक क्रांति” से जोड़ते हुए एक अहम बात कही. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अर्थव्यवस्था का आधार सिर्फ हाई-एंड और महंगे सॉल्यूशंस नहीं होंगे, बल्कि ऐसे छोटे, किफायती और स्केलेबल समाधान होंगे जो बेहतर रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट दे सकें. भारत इसी दिशा में काम कर रहा है, जहां टेक्नोलॉजी का मकसद अधिकतम लोगों तक असरदार और सुलभ समाधान पहुंचाना है.
दावोस में भारत का स्पष्ट संदेश
पूरी चर्चा के दौरान अश्विनी वैष्णव ने यह साफ कर दिया कि भारत खुद को किसी भी तरह से ‘दूसरे दर्जे’ की AI शक्ति मानने को तैयार नहीं है. उनके बयान ने यह संकेत दिया कि भारत न सिर्फ अपनी उपलब्धियों को लेकर आश्वस्त है, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी तकनीकी क्षमता और भविष्य की योजनाओं को पूरे आत्मविश्वास के साथ रखने के लिए भी तैयार है. दावोस से निकला यह संदेश साफ है, AI की दौड़ में भारत पीछे नहीं, बल्कि अग्रणी पंक्ति में खड़ा है.
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