Crude Oil: अमेरिका-ईरान में फिर भड़की जंग, एक हफ्ते में 11% उछला कच्चा तेल, महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखने लगा है. दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई होने से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.

Crude Oil US-Iran tensions crude oil surges 11% in a week will petrol and diesel prices rise
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Crude Oil: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखने लगा है. दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई होने से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसी वजह से इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला. हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत में 19 जुलाई को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

क्यों बढ़ रही हैं कच्चे तेल की कीमतें?

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ बंदरगाह, बिजली व्यवस्था और अन्य अहम ढांचों को निशाना बना रहे हैं. इससे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.

सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है. दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. अगर यहां सप्लाई में रुकावट आती है, तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं.

ब्रेंट क्रूड में आया बड़ा उछाल

पूरे सप्ताह बढ़े तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखा. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 4.6 फीसदी चढ़कर 88 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. वहीं, पूरे सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला, तो तेल की सप्लाई पर और दबाव बढ़ सकता है.

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है. सरकारी तेल कंपनियों ने 19 जुलाई के लिए भी पुराने दाम ही जारी रखे हैं.

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आखिरी बदलाव 25 मई 2026 को किया गया था. उसके बाद से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिल रही है.

आगे बढ़ सकते हैं दाम?

भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंबे समय तक तेल महंगा बना रहता है, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है. फिलहाल लोगों को पुराने दाम पर ही ईंधन मिल रहा है.

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