बांग्लादेश में फिर तख्तापलट? मोहम्मद यूनुस के खिलाफ सड़कों पर उतरी भीड़, ढाका में हजारों लोगों ने रैली कर जताया विरोध

Yunus Government Protest: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल शुरू हो गई है. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और अंतरिम प्रधानमंत्री डॉ. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के खिलाफ सोमवार को देश की आठ प्रमुख इस्लामी पार्टियां एकजुट होकर सड़कों पर उतर आईं.

Coup again in Bangladesh Crowd took to the streets against Mohammad Yunus protested by rallying in Dhaka
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Yunus Government Protest: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल शुरू हो गई है. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और अंतरिम प्रधानमंत्री डॉ. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के खिलाफ सोमवार को देश की आठ प्रमुख इस्लामी पार्टियां एकजुट होकर सड़कों पर उतर आईं. इन दलों ने राजधानी ढाका के पुराना पलटन चौराहे पर एक विशाल जनसभा आयोजित की, जिसमें हजारों समर्थकों ने भाग लिया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की.

रैली में शामिल पार्टियों ने आरोप लगाया कि डॉ. यूनुस की सरकार जनता की राय की अनदेखी कर रही है और जुलाई नेशनल चार्टर को कानूनी मान्यता देने से बच रही है. उनका कहना है कि यह चार्टर राजनीतिक स्थिरता का आधार बन सकता है, लेकिन सरकार जानबूझकर इससे दूरी बना रही है.

प्रदर्शनकारियों की पांच सूत्री मांग

प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने पांच सूत्री मांगें रखी हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है: 

  • आगामी आम चुनाव को अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation System) के तहत कराना.
  • इस्लामी मूल्यों पर आधारित संविधानिक संशोधन.
  • राजनीतिक दलों को समान अवसर और स्वतंत्र प्रचार की गारंटी.
  • धार्मिक संगठनों पर लगाई गई पाबंदियों की समीक्षा.
  • और नेशनल चार्टर को संवैधानिक दर्जा देना.

कौन-कौन से दल हुए एकजुट?

इस प्रदर्शन में बांग्लादेश के कई कट्टर इस्लामी समूह एक मंच पर आए. रैली में शामिल दलों में जमाते-ए-इस्लामी, इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश, खेलेफत मजलिश, बांग्लादेश खेलेफत मजलिश, खेलेफत आंदोलन, निजामे इस्लाम पार्टी, जातीय लोकतांत्रिक पार्टी (जगपा), और बांग्लादेश डेवलपमेंट पार्टी शामिल हैं.

रैली से पहले इन सभी दलों के शीर्ष नेता इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के मुख्यालय में एकत्र हुए और आंदोलन की अगली रणनीति पर चर्चा की. नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि “इस्लामी पहचान और जनता के अधिकारों की लड़ाई” बन चुकी है.

कुरान की तिलावत से शुरू हुआ प्रदर्शन, मंच से तीखे हमले

रैली की शुरुआत कुरान की तिलावत के साथ हुई. इसके बाद जमात-ए-इस्लामी के सहायक महासचिव हामिदुर रहमान आजाद ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और सरकार को चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो “आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा.”

सभा की अध्यक्षता इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के प्रमुख और चर्मोनाई पीर मुफ़्ती सैयद मोहम्मद रेजाउल करीम ने की. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान अंतरिम सरकार जनता से कट चुकी है और “विदेशी दबावों के तहत” निर्णय ले रही है.

ढाका की सड़कों पर समर्थकों का सैलाब

दोपहर तक पुराना पलटन क्षेत्र और उसके आस-पास की सड़कों पर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा. हरे और सफेद झंडों से सजे जुलूसों में शामिल लोग “इस्लामी शासन लागू करो”, “जनता की आवाज़ को सुनो” जैसे नारे लगा रहे थे.

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस और पार्टी वॉलंटियर्स लगातार सक्रिय रहे. अस्थायी मंच दो ट्रकों को जोड़कर बनाया गया था, जहां से वक्ताओं ने सरकार पर भ्रष्टाचार और निष्क्रियता के गंभीर आरोप लगाए.

बीएनपी के साथ बातचीत विफल, यूनुस सरकार पर दबाव

जमात नेताओं ने बताया कि उन्होंने मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी (Bangladesh Nationalist Party) से संवाद की कोशिश की थी, ताकि विपक्ष एक साझा रणनीति बना सके. हालांकि, बीएनपी की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई.

दूसरी ओर, यूनुस सरकार ने अब तक इस रैली या मांगों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन सरकार पर जनमत संग्रह और चुनावी सुधारों को लेकर दबाव बढ़ा सकता है.

जनमत संग्रह की समयसीमा खत्म, बढ़ी राजनीतिक अनिश्चितता

अंतरिम सरकार ने हाल ही में सभी राजनीतिक दलों को जनमत संग्रह की तारीख पर सहमति बनाने के लिए सात दिन का समय दिया था, जो अब समाप्त हो चुका है. इस बीच किसी सर्वसम्मति की घोषणा नहीं हुई है, जिससे बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और गहराने की आशंका जताई जा रही है.

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