विशाखापट्टनम: भारतीय नौसेना ने सोमवार को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की जब अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) शैलो वाटर क्राफ्ट 'आईएनएस आंद्रोत' को औपचारिक रूप से अपनी नौसैनिक शक्ति में शामिल किया गया. यह समारोह आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित नौसेना डॉकयार्ड में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता ईस्टर्न नेवल कमांड के प्रमुख वाइस एडमिरल राजेश पेंढरकर ने की.
आईएनएस आंद्रोत को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा विकसित किया गया है. यह युद्धपोत ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, क्योंकि इसके निर्माण में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसमें रॉकेट लॉन्चर, आधुनिक नेवल सर्फेस गन और एंटी-सबमरीन डिटेक्शन सिस्टम जैसी आधुनिक सैन्य तकनीकों को शामिल किया गया है.
पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को मिलेगा बढ़ावा
आईएनएस आंद्रोत खासतौर पर तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी से उत्पन्न खतरों का मुकाबला करने के लिए तैयार किया गया है. इसकी संरचना और तकनीक ऐसे इलाकों में ऑपरेशन को आसान बनाती है जहां पारंपरिक बड़े युद्धपोत प्रभावी नहीं हो पाते. इसके संचालन से नौसेना की निगरानी, सुरक्षा और युद्ध क्षमता में महत्वपूर्ण इजाफा होगा.
The #IndianNavy is set to commission #Androth, the second Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft (ASW-SWC), at a ceremonial event scheduled to be held on #06Oct 2025 at the Naval Dockyard, Visakhapatnam.
— SpokespersonNavy (@indiannavy) October 5, 2025
The ceremony will be presided over by VAdm Rajesh Pendharkar, #FoCinC,… pic.twitter.com/iAjFL74VAi
इस युद्धपोत का नाम 'आंद्रोत' भारत के केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप के एक प्रमुख द्वीप से लिया गया है. आंद्रोत द्वीप न केवल लक्षद्वीप का सबसे बड़ा द्वीप है, बल्कि यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और सामरिक महत्त्व के लिए भी प्रसिद्ध है. इस नाम के चयन से भारत की समुद्री विरासत और तटीय समुदायों के महत्व को भी रेखांकित किया गया है.
नौसेना की आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम
आईएनएस आंद्रोत हाल ही में नौसेना में शामिल किए गए उन आधुनिक पोतों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिनमें आईएनएस अर्नाला, निस्तार, उदयगिरि और नीलगिरि जैसे युद्धपोत शामिल हैं. ये सभी पोत पूरी तरह से भारत में डिजाइन किए गए हैं और इनका निर्माण भारतीय शिपयार्डों में हुआ है. ये युद्धपोत भारत के समुद्री सुरक्षा तंत्र को न केवल तकनीकी रूप से सशक्त बनाते हैं, बल्कि देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम हैं.
INS आंद्रोत की तकनीकी विशेषताएं
आईएनएस आंद्रोत को अत्याधुनिक सेंसर, हथियार प्रणालियों और युद्ध प्रबंधन प्रणाली से सुसज्जित किया गया है. इसमें निम्नलिखित प्रमुख तकनीकी विशेषताएं हैं:
भारत की समुद्री ताकत का विस्तार
आईएनएस आंद्रोत की तैनाती इस बात का संकेत है कि भारत तेजी से एक आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त समुद्री शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है. यह युद्धपोत घरेलू रक्षा उद्योग की क्षमताओं को दर्शाता है और यह दिखाता है कि भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता राष्ट्र की भूमिका में आ चुका है.
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