राजस्थान की राजधानी जयपुर के सवाई मान सिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में रविवार देर रात एक भयानक हादसा हुआ. ट्रॉमा ICU में लगी आग ने पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मचा दिया. आग ने जब दूसरी मंजिल के आईसीयू को चपेट में लिया, तो वहां मौजूद मरीजों और उनके परिजनों की जान पर बन आई. चारों तरफ अफरा-तफरी, चीखें और घुटन के बीच लोग मदद के लिए पुकार रहे थे.
इसी भयावह माहौल में चार पुलिसकर्मी ऐसे भी थे जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना सीधे आग और धुएं के बीच छलांग लगा दी और ICU में फंसे 10 से अधिक लोगों की जान बचा ली. उनकी इस वीरता को अब आम जनता ही नहीं, पुलिस विभाग और सरकार भी सलाम कर रही है.
शॉर्ट सर्किट से फैली आग, ICU में मौतें
जानकारी के अनुसार, देर रात करीब 11 बजे अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर स्थित ICU यूनिट में अचानक शॉर्ट सर्किट से आग लग गई. ICU में गंभीर हालत में भर्ती 11 मरीज थे, जिनमें से अधिकतर वेंटिलेटर पर थे. आग लगते ही ICU में जहरीला धुआं और चिंगारियां फैल गईं. मरीज पहले से ही अचेत थे, और परिजन स्तब्ध थे कि क्या करें.
वेंटिलेटर से उठती चिंगारियां और केमिकल्स से बने उपकरणों की वजह से आग तेजी से फैलने लगी. धुएं की परत इतनी घनी हो गई कि कुछ मिनटों में ICU पूरी तरह धुंधला हो गया. दम घुटने लगा, और बाहर चीख-पुकार मच गई.
कांस्टेबल हरिओम ने दिखाई पहली हिम्मत
इस आपात स्थिति में सबसे पहले SMS थाना में तैनात कांस्टेबल हरिओम ने वीरता का परिचय दिया. वह उस समय ICU के पास गश्त कर रहे थे. जैसे ही उन्हें ICU में धुआं उठता दिखा और शोर सुनाई दिया, उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के मौके पर दौड़ लगा दी.
हरिओम ने तुरंत ICU में घुसकर अपने हाथों से कांच तोड़ा, मरीजों के बेड खींचे और जो भी मिला, उसे कंधे या पीठ पर लादकर बाहर लाने लगे. उन्होंने अकेले ही 5-6 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिनमें कुछ कोमा में थे. धुएं की वजह से उनकी आंखें जलने लगीं, सांस रुकने लगी, लेकिन वे तब तक नहीं रुके जब तक हर मुमकिन जान को बाहर नहीं निकाल लिया.
तीन और पुलिसकर्मी भी आग में कूदे
हरिओम की इस बहादुरी को देखकर उनके साथी कांस्टेबल वेदवीर सिंह, हरि मोहन और ललित भी पीछे नहीं हटे. इन सभी ने जान की परवाह किए बिना ICU के अंदर प्रवेश किया. धुएं और आग के बीच से उन्होंने न केवल मरीजों को निकाला, बल्कि उनके साथ आए परिजनों को भी सुरक्षित बाहर पहुंचाया.
वेदवीर सिंह ने बताया, "हमें लगा कि मरीजों के साथ उनके अपने लोग भी फंसे हैं. हमने यह नहीं सोचा कि हमें क्या हो सकता है, हमने सिर्फ इतना सोचा कि अगर हमने देर की तो बहुत कुछ खत्म हो जाएगा."
इन चारों पुलिसकर्मियों ने मिलकर कम से कम 10 लोगों को ICU से सुरक्षित बाहर निकाला. हालांकि, इस दौरान वे भी धुएं की वजह से बेहोश हो गए और उन्हें तुरंत अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में भर्ती कराना पड़ा.
जान पर खेलकर बचाई जिंदगियां, खुद ICU में भर्ती
इन जांबाज पुलिसकर्मियों को गंभीर धुएं की चपेट में आने के कारण सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और चक्कर आने जैसी दिक्कतें हुईं. सभी चारों को SMS अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में भर्ती किया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है.
डॉक्टरों के अनुसार, अगर कुछ देर और ये धुएं के संपर्क में रहते, तो इनकी जान भी जा सकती थी. लेकिन ये बिना किसी डर के अंत तक डटे रहे.
भगवान बनकर आए पुलिसकर्मी- मरीजों के परिजन
जो लोग इन पुलिसकर्मियों द्वारा बचाए गए, उनके परिजन अब इन्हें “फरिश्ता” और “भगवान” कहकर पुकार रहे हैं.
एक महिला जिनका पति आग में नहीं बच सका, ने कहा, “मेरे पति को नहीं बचा सके, लेकिन मेरी बहन को इन पुलिस वालों ने जिंदा बाहर निकाला. ये हमारे लिए भगवान जैसे हैं.”
एक अन्य परिजन ने बताया, “जब आग लगी, हर कोई बाहर भाग रहा था, लेकिन ये चारों अंदर घुसते चले गए. उनके बिना हम सब मर जाते.”
7 मरीजों की जान नहीं बच सकी
हालांकि, इतनी कोशिशों के बावजूद 7 गंभीर रूप से बीमार मरीजों को बचाया नहीं जा सका. ICU में वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों की हालत पहले से नाजुक थी. जहरीले धुएं ने उनकी सांसों को रोक दिया.
यह एक दुखद क्षति है, लेकिन जिन जिंदगियों को बचाया गया, वो इन चार पुलिसकर्मियों की बहादुरी की वजह से ही संभव हो सका.
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