'किसानों को बिजली उपलब्ध कराने में देश का अग्रणी राज्य यूपी...'; विधानसभा में बोले CM योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (14 अगस्त) को विधानसभा के मानसून सत्र में अपने साढ़े आठ साल के कार्यकाल में ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलावों का पूरा ब्योरा सदन के सामने रखा.

CM Yogi says UP leads the country in providing electricity to farmers
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लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (14 अगस्त) को विधानसभा के मानसून सत्र में अपने साढ़े आठ साल के कार्यकाल में ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलावों का पूरा ब्योरा सदन के सामने रखा. उन्होंने 1947 से 2017 तक के दौर की तुलना 2017 से 2025 के बीच हुए कार्यों से करते हुए दावा किया कि यह समय प्रदेश में बिजली के लिए स्वर्णिम युग साबित हो रहा है.

1947 से 2017: सीमित क्षमता, अधूरी जरूरतें

सीएम योगी ने बताया कि आज़ादी से लेकर 2017 तक ऊर्जा क्षेत्र लगातार चुनौतियों से जूझता रहा. उत्पादन क्षमता महज़ 12,000 मेगावॉट के आसपास थी, जो उद्योग, खेती और घरेलू उपभोग की जरूरतें पूरी करने के लिए अपर्याप्त थी. खासकर ग्रामीण इलाकों में बिजली की कमी ने सिंचाई, शिक्षा और छोटे उद्योगों की प्रगति को रोके रखा.

2017 के बाद: रिकॉर्ड तोड़ प्रगति

योगी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की विद्युत उत्पादन क्षमता में 8,000 मेगावॉट की बढ़ोतरी हुई और कुल क्षमता 20,000 मेगावॉट से ऊपर पहुंच गई. 2016-17 में जहां बिजली की पीक डिमांड 16,000 मेगावॉट थी, वहीं अब यह 33,000 मेगावॉट हो चुकी है. मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सरकार इस दोगुनी हुई मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर रही है.

ग्रामीण विद्युतीकरण में ऐतिहासिक उपलब्धि

सीएम योगी के अनुसार 2017 में 1.28 लाख मजरों में बिजली थी, लेकिन जून 2025 तक यह संख्या 2.50 लाख तक पहुंच गई. बिजली आपूर्ति के समय में भी सुधार हुआ है—जिला मुख्यालयों में 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों में 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली दी जा रही है.

बुनियादी ढांचे में मजबूती

पिछले आठ वर्षों में 3 नए 765 केवी पारेषण उपकेंद्र, 21 नए 400 केवी सब स्टेशन, 72 नए 220 केवी स्टेशन और 99 नए 132 केवी सब स्टेशन बनाए गए. इनसे बिजली वितरण नेटवर्क पहले से अधिक विश्वसनीय और सुगम हुआ है.

किसानों और कारोबारियों के लिए राहत

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब देश के उन अग्रणी राज्यों में है, जो किसानों को सबसे ज्यादा बिजली देते हैं. इससे खेती की लागत घटी और उत्पादकता में इजाफा हुआ. साथ ही, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के कारोबारियों के जीवन स्तर में भी सुधार आया.

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