सीएम मोहन यादव के छोटे बेटे की शादी... सामूहिक विवाह सम्मेलन में लिए सात फेरे; देखें VIDEO

मध्य प्रदेश के उज्जैन में आज का दिन बेहद खास बन गया है. जहां शाही आयोजनों और भव्य समारोहों के इस दौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने बेटे की शादी के जरिए एक ऐसा संदेश दिया है, जिसने पूरे समाज का ध्यान खींच लिया है. 

CM Mohan Yadav Son Abhimanyu weding at samuhik vivah
Image Source: Bharat 24 (Screen Grab)

मध्य प्रदेश के उज्जैन में आज का दिन बेहद खास बन गया है. जहां शाही आयोजनों और भव्य समारोहों के इस दौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने बेटे की शादी के जरिए एक ऐसा संदेश दिया है, जिसने पूरे समाज का ध्यान खींच लिया है. 

आमतौर पर वीवीआईपी परिवारों की शादी जहां भव्य होटलों, रिसॉर्ट्स या विदेशों में होती है, वहीं सीएम ने अपने छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव और डॉ. इशिता यादव का विवाह एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में कराकर मिसाल पेश कर दी है. उनके इस निर्णय ने सादगी, समानता और संस्कारों की नई परिभाषा गढ़ दी है.

सामूहिक विवाह का भव्य लेकिन सरल आयोजन

उज्जैन के सांवरा खेड़ी में सजे फूलों के मंच पर दूल्हा-दुल्हन पारंपरिक रस्मों के साथ विवाह बंधन में बंध रहे हैं. मंच का माहौल गर्मजोशी, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों से भरा हुआ है. दूल्हा शेरवानी और साफे में तो दुल्हन लाल कढ़ाईदार लहंगे में बेहद खूबसूरत दिख रही हैं. जैसे-जैसे वरमाला और फेरे जैसी रस्में आगे बढ़ रही हैं, दोनों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है.इसी मंच पर अन्य 21 जोड़े भी अपनी-अपनी रस्में निभा रहे हैं. सामूहिक विवाह का यह आयोजन सिर्फ शादी नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का उत्सव बन गया है.

सीएम का निर्णय बना प्रेरणा

मोहन यादव ने अपने बेटे की शादी को सामान्य परिवारों के बीच, समान मंच पर और पूरी सादगी के साथ आयोजित करने का जो निर्णय लिया है, वह पूरे राज्य के लिए प्रेरणा बन गया है. उन्होंने यह संदेश दिया कि अनावश्यक खर्च, दिखावा और विलासिता से अधिक मूल्यवान परिवार, संस्कार और सामाजिक एकजुटता होती है.निमंत्रण कार्ड से लेकर कार्यक्रम की पूरी व्यवस्था तक—हर चीज में सादगी को प्राथमिकता दी गई. यही वजह है कि यह शादी सोशल मीडिया और स्थानीय समुदाय में चर्चा का मुख्य विषय बन गई है.

बैलगाड़ी से लेकर साधारण कार्ड तक—सबने खींचा ध्यान

शादी से एक दिन पहले अभिमन्यु और इशिता बैलगाड़ी में बैठकर आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे. साधारण पोशाक, चेहरे पर मुस्कान और बिना किसी शो-ऑफ के यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.इसी तरह, साधारण कागज पर छपा हुआ निमंत्रण कार्ड, जिसमें बिना किसी शाही डिजाइन के सिर्फ आवश्यक जानकारी लिखी गई थी, सादगी की मिसाल बन गया.इन दोनों चीज़ों ने यह संदेश और मजबूत कर दिया कि परंपरा और भावनाओं का मूल्य किसी दिखावे से बड़ा होता है.

सुरक्षा और व्यवस्थाओं में नहीं की गई कोई कमी

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं. भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं. आयोजन समितियों की टीमें लगातार व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं ताकि सभी रस्में सुचारू रूप से पूरी हो सकें.

समाज को नई दिशा देती यह मिसाल

यह विवाह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि एक ऐसी सोच का विस्तार है जो बताती है कि सादगी में भी भव्यता होती है. मुख्यमंत्री के इस कदम ने समाज को यह सीख दी है कि शादी का असली अर्थ भावनाओं का मिलन है, न कि खर्चों का प्रदर्शन.

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