XI JINPING Meeting: बीजिंग में इन दिनों चीन की राजनीति में हलचल है. वजह है, कम्युनिस्ट पार्टी की बहुप्रतीक्षित तीन दिवसीय सालाना पूर्ण बैठक, जो 20 से 23 अक्टूबर तक बंद कमरे में आयोजित हो रही है. इस अहम बैठक में जहां देश की अगली पंचवर्षीय योजना पर मंथन हो रहा है, वहीं दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले कई बाहरी और आंतरिक मसलों पर भी चर्चा का दौर तेज़ है.
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु है 2026-2030 के लिए 15वीं पंचवर्षीय योजना. मौजूदा आर्थिक चुनौतियों के बीच चीन नेतृत्व इस योजना को देश की दिशा तय करने वाले एक रोडमैप के रूप में देख रहा है. दरअसल, बीते कुछ वर्षों में चीन की अर्थव्यवस्था में वह रफ्तार नहीं दिखी, जो कभी उसकी पहचान हुआ करती थी. घरेलू खपत ठप है, रियल एस्टेट सेक्टर बुरे दौर से गुजर रहा है और अमेरिका के साथ शुल्क युद्ध की मार निर्यात सेक्टर झेल रहा है. विशेष रूप से ई-वाहनों की ओवरप्रोडक्शन, तकनीकी क्षेत्र पर अमेरिकी पाबंदियों और युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी, इन सब पर नई योजना के तहत समाधान ढूंढने की कोशिश हो रही है.
ट्रंप का असर: शुल्क युद्ध और भू-राजनीतिक दबाव
बैठक में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का प्रभाव भी चर्चा में है. उनके लगाए गए शुल्क और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर रोक ने चीन की व्यापार नीति को बड़ा झटका दिया है. इसके साथ ही गाजा संकट में अमेरिका की भूमिका और यूक्रेन में युद्ध को लेकर रूस पर अमेरिकी दबाव को भी चर्चा के केंद्र में माना जा रहा है.
सेना में शुद्धिकरण अभियान तेज, भ्रष्ट जनरल बाहर
शी जिनपिंग की अगुआई वाली सरकार ने इस बैठक से ठीक पहले सेना में बड़ी कार्रवाई की है. दो टॉप जनरलों और सात वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में निष्कासित कर दिया गया है. इसे पार्टी के अंदर "शुद्धिकरण अभियान" के रूप में देखा जा रहा है, जो पार्टी को भीतर से मजबूत करने की कोशिश है. यह कदम यह भी दिखाता है कि शी प्रशासन अब न केवल बाहर से चुनौतियों से निपटना चाहता है, बल्कि भीतर के सिस्टम को भी दुरुस्त करने के मूड में है.
SCO सम्मेलन से लेकर मोदी-शी मुलाकात तक
हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी चीन ने अहम भूमिका निभाई थी. पीएम नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी ने इस मंच को और अहम बना दिया.
बैठक में भारत-चीन संबंधों पर भी चर्चा की संभावना है, खासकर लद्दाख में जारी तनाव और बढ़ते भू-राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए. प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की SCO के इतर बातचीत को एक ‘बर्फ पिघलाने’ वाली मुलाकात माना जा रहा है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि चीन इस संबंध को किस दिशा में ले जाता है.
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