चीन का 'कयामत' वाला हथियार, अमेरिका के कई शहरों में मचा सकता है तबाही; दुनिया में मची खलबली, जानें ताकत

चीन ने एक अत्याधुनिक हथियार विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है, जिसका नाम परमाणु टॉरपीडो है. यह हथियार न केवल चीन की सैन्य ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा खतरा बन सकता है.

China new nuclear torpedo could trigger radioactive tsunamis posing a major threat to US coastal cities
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China Doomsday: चीन ने एक अत्याधुनिक हथियार विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है, जिसका नाम परमाणु टॉरपीडो है. यह हथियार न केवल चीन की सैन्य ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा खतरा बन सकता है. रूस के पोसाइडन टॉरपीडो से प्रेरित यह प्रोजेक्ट खासतौर पर समुद्री युद्धक्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.

परमाणु टॉरपीडो क्या है?

परमाणु टॉरपीडो एक पानी के अंदर चलने वाला मानवरहित ड्रोन है, जिसे परमाणु वॉरहेड से लैस किया जा सकता है. इसकी खासियत यह है कि यह समुद्र तटों के पास विस्फोट कर रेडियोएक्टिव सुनामी पैदा कर सकता है, जिससे व्यापक तबाही मचाई जा सकती है. यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें छोटा परमाणु रिएक्टर लगा होगा जो इसे लंबी दूरी तक तेज़ी से चलाने में सक्षम बनाएगा.

रूस का पोसाइडन टॉरपीडो

रूस पहले ही पोसाइडन नाम का परमाणु टॉरपीडो बना चुका है, जिसे दुनिया का पहला परमाणु-संचालित टॉरपीडो कहा जाता है. यह 100 मेगाटन तक के परमाणु वॉरहेड ले जा सकता है और गहरे समुद्र में भी तेज़ी से चल सकता है. 2023 में इसे रूस की पनडुब्बी बेलगोरोड में तैनात किया गया था. चीन इसी मॉडल को आधार बनाकर अपनी तकनीक विकसित कर रहा है.

चीन का नया टॉरपीडो

चीन का टॉरपीडो रूस के पोसाइडन से छोटा होगा, जिसे सामान्य टॉरपीडो ट्यूब से लॉन्च किया जा सकता है. इसमें छोटा परमाणु रिएक्टर लगेगा, जो इसे 56 किमी/घंटा की रफ्तार से सैकड़ों घंटे तक चलने देगा. चीन इसे बड़े पैमाने पर विकसित कर अपने सैन्य arsenals में शामिल करने की योजना बना रहा है.

सुनामी और पर्यावरणीय खतरे

परमाणु टॉरपीडो से हमला होने पर तटीय इलाकों में विशाल सुनामी आ सकती है, जो लाखों लोगों को प्रभावित कर सकती है. इसके साथ ही समुद्री जीवन और पर्यावरण को भी गहरा नुकसान होगा. समुद्री जल रेडियोएक्टिव हो सकता है, जिससे स्वास्थ्य और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ेगा. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी सुनामी उत्पन्न करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है, इसलिए यह हथियार मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है.

चीन की रणनीति और वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य

चीन इस हथियार के जरिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसी ताकतों पर दबाव बनाना चाहता है. खासकर AUKUS समझौते के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी परमाणु पनडुब्बियों के विकास में लगे हैं, जिससे चीन की चिंताएं बढ़ गई हैं. यह नया हथियार ताइवान और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में चीन की पकड़ मजबूत करने का भी जरिया बन सकता है.

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