Petrol-Diesel Crisis: दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई पर मंडराते संकट के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कमी हो सकती है? इसी चिंता के बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की नई रिपोर्ट ने वैश्विक तेल बाजार को लेकर गंभीर संकेत दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में कॉमर्शियल तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं और कई देशों के सामने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है.
आईईए के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, समुद्री व्यापार मार्गों पर खतरे और खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है. एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा कि मौजूदा हालात में कई देशों को अपने इमरजेंसी तेल भंडार का इस्तेमाल करना पड़ रहा है.
जानकारी के मुताबिक संकट से निपटने के लिए रोजाना करीब 25 लाख बैरल तेल बाजार में छोड़ा जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती क्योंकि आपातकालीन भंडार भी सीमित हैं.
भारत के पास कितना तेल स्टॉक मौजूद?
भारत में तेल भंडार को लेकर स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत के रणनीतिक तेल भंडार देश की लगभग 9.5 दिनों की जरूरत पूरी कर सकते हैं. हालांकि यह सिर्फ इमरजेंसी रिजर्व का हिस्सा है.
इसके अलावा देश की सरकारी और निजी तेल कंपनियों के पास अलग से पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जो करीब 64.5 दिनों की मांग को पूरा कर सकता है. यानी कुल मिलाकर भारत के पास लगभग 74 दिनों का तेल भंडार उपलब्ध माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह रिजर्व किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट या सप्लाई बाधा की स्थिति में देश के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है.
लगातार घट रहे हैं वैश्विक तेल भंडार
रिपोर्ट के अनुसार मार्च और अप्रैल के दौरान दुनिया भर के तेल भंडार में रिकॉर्ड स्तर पर गिरावट दर्ज की गई. केवल दो महीनों में करीब 24.6 करोड़ बैरल तेल रिजर्व कम हो गया.
आईईए ने यह भी संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस साल वैश्विक तेल सप्लाई मांग के मुकाबले कमजोर रह सकती है. अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं.
भारत सरकार ने क्या कहा?
हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा था कि भारत फिलहाल ईंधन आपूर्ति को लेकर किसी बड़े संकट का सामना नहीं कर रहा है. उनके मुताबिक देश के पास लगभग दो महीने का पर्याप्त फ्यूल रिजर्व उपलब्ध है.
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता रहा और घरेलू स्तर पर कीमतों में बदलाव नहीं किया गया, तो सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ सकता है.
एलपीजी और गैस स्टॉक को लेकर भी राहत
सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं, बल्कि एलपीजी और प्राकृतिक गैस को लेकर भी सरकार ने स्थिति को स्थिर बताया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के पास:
उपलब्ध है. ऐसे में फिलहाल घरेलू गैस सिलेंडर या औद्योगिक गैस सप्लाई को लेकर तत्काल किसी बड़े संकट की संभावना नहीं जताई जा रही.
पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे
इस बीच आम लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है. पिछले पांच दिनों के भीतर दूसरी बार तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं.
ताजा बढ़ोतरी में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक इजाफा किया गया. इससे पहले भी कुछ दिन पहले लगभग 3 रुपये प्रति लीटर तक कीमतें बढ़ाई गई थीं.
नई दरों के बाद कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के करीब या उससे ऊपर पहुंच चुका है.
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों के बजट पर पड़ रहा है. पेट्रोल-डीजल महंगा होने से:
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो महंगाई पर दबाव और बढ़ सकता है.
फिलहाल भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक और व्यावसायिक भंडार मौजूद है, इसलिए तुरंत किसी बड़े ईंधन संकट की संभावना नहीं है. लेकिन अगर वैश्विक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो आने वाले महीनों में कीमतों पर असर और तेज हो सकता है.
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