चीन की मिसाइल निर्माण गतिविधियों को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरों ने दिखाया है कि बीजिंग ने 2020 से अब तक अपने मिसाइल उत्पादन और परीक्षण केंद्रों में जबरदस्त विस्तार किया है. यह विस्तार सीधे तौर पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) से जुड़ा है, जो देश की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता की रीढ़ मानी जाती है.
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम चीन की “सुपरपावर बनने की दीर्घकालिक रणनीति” का हिस्सा है और इसका असर वैश्विक सामरिक संतुलन पर पड़ सकता है.
2020 से अब तक 60% ठिकानों में विस्तार
अमेरिकी विश्लेषण संस्थानों द्वारा की गई जियो-स्पेशल स्टडी के अनुसार, चीन के पास फिलहाल 136 प्रमुख रक्षा और मिसाइल उत्पादन ठिकाने हैं. इनमें से 60% ठिकानों पर 2020 से 2025 के बीच बड़े पैमाने पर निर्माण हुआ है.
सैटेलाइट तस्वीरों में नए फैक्ट्री ब्लॉक, बंकर, टनल, टेस्ट साइट्स और लॉन्च रैम्प दिखाई दे रहे हैं. कई इलाकों में पहले गांव या कृषि भूमि थी, जिन्हें अब मिलिट्री जोन में बदल दिया गया है. अनुमान है कि 2020 से अब तक चीन का मिसाइल उत्पादन क्षेत्र करीब 20 लाख वर्ग मीटर तक बढ़ चुका है.
रॉकेट फोर्स: चीन की सैन्य ताकत का केंद्र
2015 में बनाए गए “PLA Rocket Force” को चीन की रणनीतिक ढाल और राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव कहा जाता है. यह संगठन चीन के परमाणु हथियारों, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल प्रोग्राम को नियंत्रित करता है.
रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सत्ता संभालने के बाद इसे “विश्वस्तरीय फाइटिंग फोर्स” में बदलने का लक्ष्य रखा था.
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा विस्तार उसी योजना का हिस्सा है, ताकि चीन अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सैन्य उपस्थिति को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में संतुलित कर सके.
ताइवान को लेकर बढ़ी तैयारी
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि चीन जिन मिसाइल केंद्रों का विस्तार कर रहा है, वे ताइवान पर संभावित सैन्य अभियान में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं. विशेष रूप से “एंटी-एक्सेस एंड एरिया डिनायल (A2/AD)” रणनीति के तहत चीन की योजना है कि अगर संघर्ष होता है, तो वह अमेरिकी नौसेना और उसके सहयोगियों को ताइवान के तटों से दूर रख सके.
रक्षा थिंक टैंक CNA के विश्लेषक डेकर ईवलेथ के मुताबिक, "चीन का लक्ष्य ताइवान के बंदरगाहों, हेलिपैड्स और सप्लाई बेस को निशाना बनाना है ताकि अमेरिका और जापान जैसी ताकतें किसी तरह की मदद न भेज सकें."
अमेरिका पर बढ़ा दबाव
दूसरी ओर, अमेरिका अपनी रक्षा आपूर्ति को लेकर दबाव में है. यूक्रेन और इज़रायल को भेजे जा रहे हथियारों के कारण उसका THAAD मिसाइल इंटरसेप्टर स्टॉक घटकर लगभग 25% रह गया है. इस कमी को पूरा करने के लिए लॉकहीड मार्टिन को अतिरिक्त उत्पादन के लिए 2 अरब डॉलर का ठेका दिया गया है, लेकिन एक THAAD मिसाइल की कीमत करीब 12.7 मिलियन डॉलर (106 करोड़ रुपये) है और इसे तैयार होने में कई महीने लगते हैं.
इस स्थिति ने अमेरिका की दो मोर्चों पर रक्षा तैयारी की चुनौती को और बढ़ा दिया है, एक तरफ यूरोप और पश्चिम एशिया, और दूसरी तरफ एशिया-प्रशांत क्षेत्र.
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