चीन का गंदा चेहरा हुआ बेनकाब, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर रहा था ये काम; रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

China Disinformation Campaign: भारत और पाकिस्तान के बीच मई में छिड़े संघर्ष ने पूरी दुनिया में चिंता की लहर दौड़ा दी थी. परमाणु क्षमता से लैस दो देशों के आमने-सामने आने को लेकर वैश्विक समुदाय पहले से ही बेचैन था, लेकिन इसी बीच एक और देश चुपचाप अपनी रणनीति को अंजाम दे रहा था, चीन.

China dirty face exposed it was doing this work during Operation Sindoor Big revelation
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China Disinformation Campaign: भारत और पाकिस्तान के बीच मई में छिड़े संघर्ष ने पूरी दुनिया में चिंता की लहर दौड़ा दी थी. परमाणु क्षमता से लैस दो देशों के आमने-सामने आने को लेकर वैश्विक समुदाय पहले से ही बेचैन था, लेकिन इसी बीच एक और देश चुपचाप अपनी रणनीति को अंजाम दे रहा था, चीन.

अमेरिका की एक शीर्ष द्विदलीय समिति ने अपनी विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि चीन ने इस तनावपूर्ण माहौल को मात्र एक सीमित क्षेत्रीय संकट नहीं समझा, बल्कि इसे अपने आधुनिक सैन्य उपकरणों को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में परखने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनका प्रचार बढ़ाने के सुनहरे अवसर के रूप में इस्तेमाल किया.

चार दिन का संघर्ष, चीन के लिए ‘टेस्टिंग ग्राउंड’

यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमिशन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, मई में चार दिनों तक चले भारत–पाक टकराव को चीन ने एक ऐसे प्रयोगशाला की तरह देखा, जहाँ वह अपने अत्याधुनिक हथियारों को वास्तविक तनाव की स्थिति में इस्तेमाल कर सकता था.

रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहला मौका था जब चीन ने अपने आधुनिक HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल और J-10 फाइटर जेट को किसी वास्तविक सैन्य ऑपरेशन में उतारा.

समिति का कहना है कि चीन जानबूझकर इन हथियारों को सक्रिय संघर्ष क्षेत्र के आसपास तैनात कर रहा था ताकि इनके प्रदर्शन का आकलन किया जा सके. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब चीन स्वयं भी भारत के साथ सीमा पर कई क्षेत्रों में तनाव झेल रहा है और उसकी रक्षा महत्वाकांक्षाएं लगातार विस्तार कर रही हैं.

भारत–पाक टकराव के बीच पाकिस्तान को दिली पेशकश

रिपोर्ट में बताया गया कि तनाव के दौरान चीन ने पाकिस्तान को कई अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों की पेशकश की. इसमें 40 J-35 स्टेल्थ फाइटर जेट, KJ-500 अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट और उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम शामिल थे.

यह प्रस्ताव तब आया जब 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 7 मई को ऑपरेशन ‘सिंदूर’ लॉन्च किया था. इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तानी और पीओके के कई आतंकी अड्डों पर ब्रह्मोस मिसाइलों से प्रहार किया.

अमेरिकी रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान को यह सैन्य ऑफर केवल ‘मदद’ के नाम पर नहीं था, बल्कि चीन अपने हथियारों के लिए नए खरीदार खोजने की कोशिश कर रहा था, और उसे लगा कि भारत-पाक तनाव इसके लिए बेहतरीन मंच साबित हो सकता है.

दूतावासों की सक्रिय भूमिका, दुनिया को बताया “सफल प्रदर्शन”

रिपोर्ट का यह भी दावा है कि संघर्ष के तुरंत बाद कई देशों में मौजूद चीनी दूतावासों ने आक्रामक प्रचार अभियान चलाया. उन्होंने अपने हथियारों के “सफल इस्तेमाल” और “उत्कृष्ट प्रदर्शन” की कहानियाँ विदेशी मीडिया और रणनीतिक हलकों में फैलानी शुरू कर दीं, ताकि चीन के रक्षा उद्योग को वैश्विक बाजारों में अधिक विश्वसनीय विकल्प के रूप में पेश किया जा सके. यह रणनीति चीन के उस लंबे-अवधि वाले लक्ष्य का हिस्सा मानी जा रही है जिसमें वह अमेरिकी और यूरोपीय हथियार कंपनियों के वर्चस्व को चुनौती देना चाहता है.

राफेल को बदनाम करने की कोशिश

रिपोर्ट का सबसे गंभीर और चौंकाने वाला हिस्सा फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमान से जुड़ा है. अमेरिकी समिति ने फ्रांस की खुफिया एजेंसियों का हवाला देते हुए कहा है कि भारत-पाक टकराव के बाद चीन ने राफेल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए एक बड़े पैमाने पर दुष्प्रचार अभियान चलाया. इस अभियान में फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाए गए.

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