चांद के ‘डीप फ्रीजर’ में छिपा है पानी का राज, चीन लॉन्च करेगा चांग’ई-7, जानें मिशन के बारे में सबकुछ

चंद्रमा की सतह पर इंसानी भविष्य की संभावनाएं तलाशने की दौड़ अब एक और दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। चीन अपने सबसे महत्वाकांक्षी और जटिल चंद्र अभियानों में से एक चांग’ई-7 को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।

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चंद्रमा की सतह पर इंसानी भविष्य की संभावनाएं तलाशने की दौड़ अब एक और दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। चीन अपने सबसे महत्वाकांक्षी और जटिल चंद्र अभियानों में से एक चांग’ई-7 को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इस मिशन का सबसे बड़ा लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के उन हिस्सों तक पहुंचना है, जहां अरबों वर्षों से सूर्य की रोशनी नहीं पहुंची है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन स्थायी रूप से छायादार क्रेटर्स में बर्फ के रूप में पानी मौजूद हो सकता है। चीन इस मानवरहित अभियान के जरिए रोबोटिक लैंडर, रोवर और एक विशेष ‘हॉपिंग’ प्रोब की मदद से चंद्रमा की कठिन सतह का अध्ययन करेगा।

चंद्रमा के ‘डीप फ्रीजर’ का खुलेगा राज

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के कुछ क्रेटर्स को वैज्ञानिक प्राकृतिक ‘डीप फ्रीजर’ की तरह देखते हैं। इन इलाकों में सूर्य की किरणें अरबों वर्षों से नहीं पहुंची हैं, जिसके कारण वहां तापमान बेहद कम बना रहता है। कुछ क्षेत्रों में तापमान माइनस 200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसी परिस्थितियों में प्राचीन जल-बर्फ और दूसरे वाष्पशील पदार्थ लंबे समय तक संरक्षित रह सकते हैं। चांग’ई-7 इन्हीं रहस्यमयी इलाकों में पानी और दूसरे संसाधनों की मौजूदगी के संकेत तलाशेगा।

रोबोट, रोवर और हॉपिंग प्रोब करेंगे मुश्किल इलाकों की पड़ताल

चीन के इस मिशन की खासियत इसकी तकनीकी जटिलता भी है। चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद अंतरिक्ष यान दक्षिणी ध्रुव के संभावित लैंडिंग क्षेत्रों का अध्ययन करेगा। इसके बाद लैंडर के जरिए सतह पर उतरने का प्रयास किया जाएगा। मिशन में शामिल रोवर चंद्रमा की जमीन पर घूमकर अलग-अलग स्थानों का सर्वेक्षण करेगा, जबकि ‘हॉपिंग’ प्रोब ऐसे क्षेत्रों तक पहुंचने में मदद करेगा जहां सामान्य रोवर के लिए जाना बेहद मुश्किल हो सकता है। वैज्ञानिक उपकरणों में कैमरे, रडार और पानी की मौजूदगी का विश्लेषण करने वाले उपकरण शामिल होंगे।

शेकलटन क्रेटर के आसपास भी नजर, लैंडिंग आसान नहीं

चांग’ई-7 के लिए चंद्र दक्षिणी ध्रुव के पास मौजूद संभावित लैंडिंग क्षेत्रों का चयन मिशन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगा। रिपोर्टों के मुताबिक शेकलटन क्रेटर के आसपास का क्षेत्र संभावित विकल्पों में शामिल है। यह इलाका बेहद ऊबड़-खाबड़ है और इसके कुछ हिस्से स्थायी रूप से छायादार हैं, जबकि क्रेटर का ऊपरी किनारा लगातार सूर्य के प्रकाश के संपर्क में रहता है। ऐसे विरोधाभासी वातावरण में सटीक लैंडिंग करना आसान नहीं होगा। चीन ने मिशन की पूरी समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक लैंडिंग का प्रयास नवंबर के आसपास हो सकता है।

चांद पर पानी मिला तो बदल जाएगी भविष्य की अंतरिक्ष रणनीति

चंद्रमा पर पानी की खोज केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा का विषय नहीं है, बल्कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए इसका रणनीतिक महत्व भी बहुत बड़ा है। अगर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध हुआ तो उसका इस्तेमाल अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पीने के पानी के रूप में किया जा सकता है। पानी को अलग करके ऑक्सीजन भी प्राप्त की जा सकती है, जबकि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन भविष्य में रॉकेट ईंधन के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इससे पृथ्वी से चंद्रमा तक बार-बार भारी मात्रा में संसाधन भेजने की जरूरत कम हो सकती है।

चीन का बड़ा लक्ष्य, चांद पर इंसानी मौजूदगी की तैयारी

चांग’ई-7 को चीन की लंबी अवधि की चंद्र रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। बीजिंग 2030 से पहले मानवयुक्त चंद्र लैंडिंग की दिशा में काम कर रहा है और भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी शोध एवं अनुसंधान ढांचा तैयार करने की महत्वाकांक्षा रखता है। रूस के साथ मिलकर 2035 तक संयुक्त चंद्र अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की योजना भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। ऐसे में चंद्र दक्षिणी ध्रुव पर पानी और दूसरे संसाधनों की उपलब्धता का पता लगाना चीन के लिए भविष्य के मानव मिशनों की नींव मजबूत करने जैसा होगा।

चंद्र दक्षिणी ध्रुव पर भारत पहले ही रच चुका है इतिहास

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को लेकर दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच दिलचस्प प्रतिस्पर्धा चल रही है। भारत ने 2023 में चंद्रयान-3 के जरिए दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा था। अब चीन अपने चांग’ई-7 मिशन के जरिए इसी क्षेत्र की उन गहराइयों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है, जहां बर्फ और प्राचीन पदार्थों के मौजूद होने की संभावना है। आने वाले वर्षों में अमेरिका, यूरोप, जापान और भारत से जुड़े अन्य मिशन भी चंद्र दक्षिणी ध्रुव की ओर बढ़ने वाले हैं। ऐसे में चांग’ई-7 सिर्फ चीन का मिशन नहीं, बल्कि चंद्रमा पर भविष्य की मानव बस्तियों और संसाधनों की खोज की वैश्विक होड़ का एक अहम पड़ाव बन सकता है।

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