'छोटे देशों को परेशान करता है अमेरिका', ट्रंप पर फायर हुए ड्रैगन; जमकर किया जुबानी वार

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति एक बार फिर गरमा गई है. इस बार चीन ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं, खासकर उसके वीज़ा प्रतिबंध और व्यापार नीतियों को लेकर. सोमवार को चीन ने अमेरिका की उस नीति की कड़ी आलोचना की जिसमें मध्य अमेरिकी नागरिकों पर वीज़ा प्रतिबंध लगाए गए हैं.

China and America Relations over Visa tensions Xi jinping alleged trump
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अंतरराष्ट्रीय कूटनीति एक बार फिर गरमा गई है. इस बार चीन ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं, खासकर उसके वीज़ा प्रतिबंध और व्यापार नीतियों को लेकर. सोमवार को चीन ने अमेरिका की उस नीति की कड़ी आलोचना की जिसमें मध्य अमेरिकी नागरिकों पर वीज़ा प्रतिबंध लगाए गए हैं, और कहा कि यह कदम "छोटे देशों को डराने और दबाने" की कोशिश है.

चीन के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को अमेरिका की "दबाव की कूटनीति" करार देते हुए कहा कि वीज़ा को हथियार बनाना अमेरिका की आदत बन गई है, लेकिन इससे चीन या उसके सहयोगी देश पीछे हटने वाले नहीं हैं.

वीज़ा हथियार नहीं, कूटनीति का पुल होना चाहिए

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रेस वार्ता में कहा कि “संयुक्त राज्य अमेरिका निराधार आरोप लगाकर छोटे देशों के आत्मनिर्णय में हस्तक्षेप कर रहा है. वीज़ा प्रतिबंध लगाकर वह इन देशों को चीन से दूर करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह रणनीति विफल होगी.” चीन का दावा है कि अमेरिका केवल इन प्रतिबंधों के जरिए यह दिखाना चाहता है कि उसे वैश्विक संबंधों पर पूर्ण नियंत्रण है, जबकि वास्तविकता यह है कि मध्य अमेरिकी देशों और चीन के बीच बढ़ता सहयोग अमेरिका की चिंता का कारण बना हुआ है.

ट्रंप के टैरिफ फैसले पर भी चीन का कड़ा ऐतराज

केवल वीज़ा ही नहीं, चीन ने अमेरिका की टैरिफ नीति को भी आड़े हाथों लिया है. हाल ही में रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने के ट्रंप प्रशासन के आदेश के बाद चीन ने अमेरिका की "टैरिफ के दुरुपयोग" की रणनीति को दोहराया. बीजिंग में मीडिया से बात करते हुए प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि “अमेरिका बार-बार टैरिफ और व्यापार नियमों का गलत इस्तेमाल कर रहा है. वह न केवल चीन बल्कि भारत जैसे साझेदारों पर भी दबाव बना रहा है. यह व्यापार नीति नहीं, दबाव नीति है.” चीन का आरोप है कि अमेरिका तकनीकी और व्यापारिक मुद्दों को राजनीतिक रंग दे रहा है और इनका उपयोग विरोधी देशों पर हमला करने के लिए करता है.

चीन का रुख साफ: दबाव से नहीं डरेंगे

प्रवक्ता ने कहा कि चीन और मध्य अमेरिकी देशों के बीच आपसी सहयोग का दायरा बढ़ता जा रहा है और अमेरिका की नीति इन संबंधों को प्रभावित नहीं कर पाएगी. उन्होंने यह भी दोहराया कि चीन इन देशों के साथ साझेदारी को और मजबूत करेगा और स्थानीय विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है.

क्या कहता है यह टकराव?

अमेरिका और चीन के बीच यह कूटनीतिक तनाव नया नहीं है, लेकिन छोटे देशों को लेकर दोनों की खींचतान अब ज्यादा खुलकर सामने आ रही है. जहां अमेरिका अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत से प्रभाव बनाना चाहता है, वहीं चीन सहयोग और निवेश के ज़रिए अपना प्रभाव फैलाने की कोशिश कर रहा है.भारत को लेकर अमेरिका के फैसले और उस पर चीन की प्रतिक्रिया यह भी दर्शाती है कि वैश्विक भू-राजनीति में भारत अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि एक निर्णायक भूमिका में है.

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