क्या है मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना, जिसने यूपी के किसानों को दिया मजबूत सुरक्षा कवच? जानें सबकुछ

Kisan Yojana UP: उत्तर प्रदेश में किसानों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना आज ग्रामीण समाज के लिए एक भरोसेमंद सहारा बन चुकी है. 

Chief Minister Farmer Accident Welfare Scheme given a strong security cover farmers of UP
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Kisan Yojana UP: उत्तर प्रदेश में किसानों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना आज ग्रामीण समाज के लिए एक भरोसेमंद सहारा बन चुकी है. 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2019 से संचालित यह योजना दुर्घटना जैसी कठिन परिस्थितियों में किसान परिवारों को आर्थिक संबल देने का काम कर रही है. इस पहल का उद्देश्य केवल सहायता राशि देना नहीं है, बल्कि संकट के समय किसानों के परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने का आधार भी उपलब्ध कराना है.

दुर्घटना के समय परिवार को आर्थिक संबल

इस योजना के अंतर्गत किसी किसान की दुर्घटनावश मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में उसके परिवार को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. यह सहायता सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है, जिससे परिवार को तत्काल आर्थिक राहत मिल सके. ग्रामीण क्षेत्रों में जहां आय के सीमित स्रोत होते हैं, वहां ऐसी सहायता कई परिवारों के लिए जीवन को दोबारा पटरी पर लाने का जरिया बन रही है.

अब तक लाखों परिवारों को मिला लाभ

योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 1 लाख 8 हजार से अधिक किसानों और उनके परिजनों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है. वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक लगभग 873.58 करोड़ रुपये की राशि वितरित कर 18,145 किसानों अथवा उनके परिवारों को लाभ पहुंचाया गया है.

इससे पहले वित्तीय वर्ष 2023–24 में भी योजना का व्यापक असर देखने को मिला था, जब लगभग 944.72 करोड़ रुपये की सहायता राशि से 23,821 किसानों को मदद मिली. इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि यह योजना लगातार बड़े पैमाने पर जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच रही है.

भूमिहीन किसानों और खेतिहर मजदूरों को भी मिला संरक्षण

सरकार ने योजना के दायरे को और व्यापक बनाते हुए वर्ष 2023–24 से भूमिहीन किसानों और खेतिहर मजदूरों को भी इसमें शामिल कर लिया है. इससे उन परिवारों को भी सुरक्षा मिली है, जो परंपरागत रूप से खेती से जुड़े होने के बावजूद भूमि स्वामी नहीं हैं. इस फैसले से योजना का सामाजिक दायरा और मजबूत हुआ है और बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को राहत मिली है, जो पहले इस तरह की सहायता योजनाओं से वंचित रह जाते थे.

डिजिटलीकरण से आसान और पारदर्शी होगी प्रक्रिया

मुख्यमंत्री के निर्देश पर योजना को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है. राजस्व परिषद और एनआईसी के सहयोग से एक आधुनिक वेब पोर्टल और सॉफ्टवेयर सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसे फरवरी 2026 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है.

डिजिटलीकरण के बाद किसान घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. आवेदन से लेकर सत्यापन और फिर डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में धनराशि पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि भ्रष्टाचार और अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी.

निगरानी व्यवस्था से बढ़ेगी जवाबदेही

योजना की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए इसे एक डैशबोर्ड आधारित निगरानी प्रणाली से भी जोड़ा जा रहा है. इससे शासन स्तर पर यह देखा जा सकेगा कि किस जिले में कितने आवेदन आए, कितनों का निस्तारण हुआ और कितनी राशि वितरित की गई. इस पारदर्शी व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि योजना का लाभ सही समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचे.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा सहारा

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का असर केवल व्यक्तिगत परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है. दुर्घटना के बाद मिलने वाली सहायता से परिवारों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमराने से बच जाती है. इससे गांवों में उपभोग और स्थानीय गतिविधियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

किसान-हितैषी नीतियों का मजबूत उदाहरण

कुल मिलाकर यह योजना उत्तर प्रदेश सरकार की किसान-हितैषी सोच को दर्शाती है. कठिन समय में किसानों और उनके परिवारों के साथ खड़े रहकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि ग्रामीण समाज की सुरक्षा और सम्मान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. डिजिटलीकरण और दायरे के विस्तार के साथ यह योजना आने वाले समय में और अधिक प्रभावी रूप से किसानों के जीवन में सुरक्षा कवच का काम करती रहेगी.

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