Amit Shah on Naxalism: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ में हैं. इस दौरान रविवार को उन्होंने रायपुर में अधिकारियों के साथ नक्सलविरोधी अभियानों पर समीक्षा बैठक की. इस दौरान अमित शाह ने कहा, "सिक्योरिटी सेंट्रिक स्ट्रेटजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, नक्सल फाइनेंशियल नेटवर्क पर प्रहार व आत्मसमर्पण नीति के सकारात्मक परिणाम आए हैं और इस 31 मार्च से पहले नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो रहा है."
अमित शाह ने एक्स पर बैठक की कुछ तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा, "जो छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा का गढ़ था, भाजपा की डबल इंजन सरकार में विकास का पर्याय बन चुका है. यहाँ के युवा स्पोर्ट्स, फॉरेंसिक व टेक्निकल एजुकेशन को गति देते हुए अपनी संस्कृति व परंपराओं को भी सहेज रहे हैं. आज रायपुर में, छत्तीसगढ़ के विभिन्न विकास कार्यों पर समीक्षा बैठक की."
जो छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा का गढ़ था, भाजपा की डबल इंजन सरकार में विकास का पर्याय बन चुका है। यहाँ के युवा स्पोर्ट्स, फॉरेंसिक व टेक्निकल एजुकेशन को गति देते हुए अपनी संस्कृति व परंपराओं को भी सहेज रहे हैं। आज रायपुर में, छत्तीसगढ़ के विभिन्न विकास कार्यों पर समीक्षा बैठक की। pic.twitter.com/kMWdO4QbPs
— Amit Shah (@AmitShah) February 8, 2026
माओवादियों को सख्त संदेश
अमित शाह ने रायपुर में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा, "सभी माओवादी हथियार डाल दें. हम किसी को मारना नहीं चाहते, लेकिन जब आप बंदूक लेकर किसी की हत्या करते हैं, तो उसकी रक्षा करना छत्तीसगढ़ और भारत सरकार की जिम्मेदारी है." उन्होंने आगे कहा कि माओवादी चार दशकों तक बस्तर के विकास पर फन फैलाकर बैठे रहे हैं. अगर माओवादी समस्या से बस्तर पीड़ित न होता, तो यह खनिज संपदा से परिपूर्ण क्षेत्र देश का सबसे विकसित संभाग बन गया होता.
अमित शाह ने कहा, "माओवादी समस्या विकास और कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है. माओवादी समस्या जब उपजी, तब बस्तर से ज्यादा पिछड़े 100 से ज्यादा जिले थे. यह समस्या विचारधारा से जुड़ी है. समस्या का समाधान बंदूक से निकलता है. यह उस माओवादी विचारधारा की उपज है."
साप्ताहिक पत्र 'ऑर्गेनाइजर' के ‘भारत प्रकाशन’ द्वारा प्रकाशित ‘छत्तीसगढ़ @ 25 : शिफ्टिंग द लेंस’ पुस्तक पर आयोजित राष्ट्रीय कॉन्क्लेव से लाइव… https://t.co/3M57w7kycb
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"ट्राइबल को हथियार पकड़ा दिए"
अमित शाह ने कहा, "जहाँ कम्युनिस्ट शासन में रहे, विकास नहीं कर पाए. ट्राइबल के कल्याण की बात कर हथियार पकड़ा दिए, वहाँ भी अंधकार फैला दिया. यह विचारधारा ही विनाश की द्योतक है. इनसे निजात पा लेना देश की इमीडिएट रिक्वायरमेंट है. अब तो वे डेमोक्रेटिक पॉलिटिक्स में बचे ही नहीं हैं. दूरबीन लेकर देखना पड़ता है. त्रिपुरा और बंगाल में समाप्त हो गए; केरल में थोड़ा बचा है, वहाँ भी तिरुवनंतपुरम से जनता ने शुरुआत कर दी है."
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