सीजफायर की गुहार, 58 पाकिस्तानी सैनिक बंधक... पाकिस्तान को लेकर तालिबान का बड़ा दावा

Pakistan Taliban Clash: दक्षिण एशिया के दो कट्टर पड़ोसी, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद ने एक बार फिर से हिंसक मोड़ ले लिया है. डूरंड लाइन के समीप स्थित स्पिन बोल्डक क्षेत्र में ताज़ा झड़पों के बाद दोनों देशों ने 48 घंटे का अस्थायी युद्धविराम लागू करने पर सहमति जताई है.

Ceasefire 58 Pakistani soldiers held hostage Taliban makes big claim about Pakistan
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Pakistan Taliban Clash: दक्षिण एशिया के दो कट्टर पड़ोसी, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद ने एक बार फिर से हिंसक मोड़ ले लिया है. डूरंड लाइन के समीप स्थित स्पिन बोल्डक क्षेत्र में ताज़ा झड़पों के बाद दोनों देशों ने 48 घंटे का अस्थायी युद्धविराम लागू करने पर सहमति जताई है. लेकिन संघर्षविराम से पहले और इसके दौरान भी ज़मीन पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं.

तालिबान सरकार के सैन्य सूत्रों के हवाले से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान सुरक्षाबलों ने बुधवार तड़के एक विशेष सैन्य अभियान में पाकिस्तान की कई सीमाई चौकियों को ध्वस्त कर दिया. यह ऑपरेशन डूरंड लाइन पर स्पिन बोल्डक के पास चलाया गया. अफगानी बलों का दावा है कि इस कार्रवाई में न केवल पाकिस्तानी चौकियों को नष्ट किया गया, बल्कि कई पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी भी बना लिया गया है.

इतना ही नहीं, अफगानी सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान की सेना से टैंकों सहित भारी और हल्के हथियारों के कई जत्थे भी जब्त किए हैं. इन हथियारों और उपकरणों को अफगान सीमा के भीतर ले जाया गया है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, स्पिन बोल्डक बॉर्डर गेट पर भी अब तालिबान समर्थित सुरक्षाबलों का नियंत्रण हो गया है.

पाकिस्तान के अनुरोध पर सीजफायर लागू

तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबिउल्लाह मुजाहिद ने मीडिया को जानकारी दी है कि पाकिस्तान की ओर से आए अनुरोध पर अफगानिस्तान ने युद्धविराम स्वीकार किया है. उनके अनुसार, बुधवार शाम 5:30 बजे से 48 घंटे के लिए युद्धविराम प्रभावी हो गया है. उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान नेतृत्व ने अपने सुरक्षाबलों को इस संघर्षविराम का पालन करने के निर्देश दिए हैं. हालांकि, सीजफायर की घोषणा से पहले जो घटनाएं घटीं, उन्होंने पूरे क्षेत्र में गहरी चिंता पैदा कर दी है.

पाकिस्तान ने किया अफगानिस्तान पर हवाई हमला

संघर्षविराम से कुछ ही घंटे पहले, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई की. रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने कंधार और राजधानी काबुल के कुछ हिस्सों में हवाई हमले किए. इन हमलों में दर्जनों लोगों के मारे जाने की खबर है. काबुल में नागरिक इलाकों में बमबारी की वजह से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया.

अफगानिस्तान का पलटवार

इन हवाई हमलों के जवाब में, अफगान सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान के पेशावर शहर में एक ड्रोन हमला किया. इस हमले में एक सीक्रेट इंटेलिजेंस ऑफिस को निशाना बनाया गया, जो एक प्लाजा की ऊपरी मंज़िल पर स्थित था. अफगान सूत्रों का दावा है कि इस दफ्तर का इस्तेमाल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों द्वारा तालिबान के खिलाफ ऑपरेशन संचालित करने के लिए किया जा रहा था.

पाक मीडिया का दावा: तालिबान की बटालियन तबाह

पाकिस्तानी मीडिया ने एक अलग ही तस्वीर पेश की है. उनके अनुसार, कंधार प्रांत में हुए हमलों में तालिबान की चौथी बटालियन और छठी बॉर्डर ब्रिगेड को पूरी तरह से तबाह कर दिया गया है. हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि दोनों पक्षों को भारी सैन्य नुकसान झेलना पड़ा है.

बलूचिस्तान बॉर्डर पर भयंकर मुठभेड़

इससे पहले मंगलवार रात को भी पाकिस्तान के बलूचिस्तान बॉर्डर पर पाकिस्तानी सेना और अफगान तालिबान के लड़ाकों के बीच जबरदस्त झड़प हुई थी. पाक सेना के मीडिया विंग ISPR ने एक बयान जारी कर बताया कि उनके सुरक्षा बलों ने तालिबान के एक बड़े हमले को नाकाम कर दिया, जिसमें 15 से 20 तालिबान लड़ाके मारे गए.

तनाव की आग बुझने का नाम नहीं ले रही

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बीते एक हफ्ते में यह तीसरी बड़ी सैन्य मुठभेड़ है. बार-बार हो रही इन झड़पों से यह साफ है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद पूरी तरह ठप हो चुका है और सीमा पर तनाव अब युद्ध की शक्ल लेता जा रहा है.

डूरंड लाइन: एक पुराना घाव जो आज भी ताज़ा है

डूरंड लाइन, जो 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगान अमीरात के बीच खींची गई थी, आज भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद का प्रमुख कारण है. अफगानिस्तान इसे कभी आधिकारिक सीमा नहीं मानता, जबकि पाकिस्तान इसे एक अंतरराष्ट्रीय सीमा के तौर पर देखता है. इस सीमा पर अक्सर दोनों देशों की सेनाओं के बीच टकराव होते रहे हैं.

क्या 48 घंटे का युद्धविराम शांति की ओर पहला कदम है?

48 घंटे का यह अस्थायी युद्धविराम क्षेत्र में शांति का संकेत हो सकता है, अगर दोनों पक्ष ईमानदारी से इसका पालन करें. हालांकि, अब तक की घटनाओं से यही प्रतीत होता है कि यह संघर्षविराम केवल एक "ब्रेक" है, स्थायी समाधान नहीं. बिना राजनयिक बातचीत, भरोसे के निर्माण, और सीमा पर सहमति के यह संकट और भी गहरा हो सकता है.

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