इस्लामाबाद: पाकिस्तान के नवनियुक्त चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने एक बार फिर भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है. इस्लामाबाद में आयोजित नेशनल उलेमा और मशाइक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुनीर ने दावा किया कि आतंकवाद पाकिस्तान का नहीं, बल्कि भारत का तरीका है.
आतंकवाद को लेकर दुनियाभर में अलग-थलग पड़ चुके पाकिस्तान के इस बयान ने एक बार फिर उसके दोहरे चरित्र को उजागर किया है. जहां दुनिया पाकिस्तान को आतंकी संगठनों का सुरक्षित ठिकाना मानती है, वहीं उसके शीर्ष सैन्य अधिकारी उस पर पर्दा डालने की कोशिश में पड़ोसी देश पर आरोप मढ़ने का प्रयास कर रहे हैं.
पाकिस्तान दुश्मनों से खुलकर मुकाबला करता है- मुनीर
अपने भाषण में मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान किसी भी तरह की 'छिपी हुई कार्रवाई' नहीं करता, बल्कि अपने विरोधियों का सामना सीधे तौर पर करता है. उन्होंने पाकिस्तान को एक इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित राष्ट्र बताया और कहा कि देश की राष्ट्रीय शक्ति आपसी एकता, अनुशासन और ज्ञान के उपयोग से मजबूत होती है, न कि विभाजन और अंदरूनी संघर्ष से.
मुनीर के इस बयान का मकसद साफ माना जा रहा है- आंतरिक अस्थिरता, आर्थिक बदहाली और चरमपंथी हमलों की आग में जल रहे पाकिस्तान के भीतर सेना पर बढ़ते सवालों को मोड़कर भारत की ओर निर्देशित करना.
सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते को बताया ऐतिहासिक
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल में हुए रक्षा सहयोग समझौते की चर्चा करते हुए मुनीर ने दावा किया कि यह पाकिस्तान के लिए सम्मान की बात है. उन्होंने कहा, "अल्लाह ने पाकिस्तान को हरमायन शरीफ (मक्का-मदीना) की सुरक्षा का दायित्व दिया है, जो किसी अन्य मुस्लिम देश को प्राप्त नहीं. हमें इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए मजबूत बनना होगा."
यह बयान पाकिस्तान में सऊदी समर्थन को लेकर बनी धारणा को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय जब उसकी अर्थव्यवस्था खस्ताहाल है और बाहरी ऋण पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है.
जेहाद पर घोषणा राज्य करेगा, कोई समूह नहीं
इसी संदर्भ में मुनीर ने कहा—
उनका यह बयान टीटीपी और उसके हमलों के संदर्भ में समझा जा रहा है, जिसने सेना पर 'इस्लाम से भटकने' का आरोप लगाकर अपने हमले तेज कर दिए हैं.
आतंकवाद खत्म किए बिना विकास असंभव- शरीफ
CDF असीम मुनीर से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सम्मेलन को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधार, विदेशी निवेश और राजनीतिक स्थिरता तभी संभव है जब देश से आतंकवाद, कट्टरवाद और सांप्रदायिक हिंसा जैसी समस्याओं का पूरी तरह खात्मा हो जाए.
शहबाज ने धार्मिक नेताओं को समाज में सद्भाव और एकता को बढ़ावा देने की अपील की और कहा कि पाकिस्तान के भविष्य के लिए सामाजिक समरसता आवश्यक है.
ये भी पढ़ें- 'भारत की ओर से शानदार ऑफर मिला...' ट्रंप के अफसर ने जमकर की तारीफ, अब अमेरिका के साथ होगी ट्रेड डील?