Israel-Iran War: कई देशों में फैल चुकी है यह जंग, ईरान ने कहां-कहां किए हमले, किसे कितना हुआ नुकसान?

मध्य पूर्व में जारी सैन्य टकराव अब तेजी से व्यापक रूप लेता जा रहा है. इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर की गई कार्रवाई के बाद हालात बेकाबू होते दिख रहे हैं.

Israel-Iran War The war has spread to how many countries where the attacks
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Iran War: मध्य पूर्व में जारी सैन्य टकराव अब तेजी से व्यापक रूप लेता जा रहा है. इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर की गई कार्रवाई के बाद हालात बेकाबू होते दिख रहे हैं. जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और उसके सहयोगी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. मिसाइल और ड्रोन हमलों की वजह से खाड़ी देशों से लेकर भूमध्यसागर तक तनाव फैल चुका है.

कैसे बढ़ा संघर्ष?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान को बड़ा नुकसान हुआ, जिसमें उसके शीर्ष नेतृत्व से जुड़े अहम लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आईं. इनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का नाम भी शामिल बताया जा रहा है. इसके बाद ईरान ने इसे सीधा हमला मानते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी.

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए करीब 27 जगहों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. साथ ही इजरायल के प्रमुख इलाकों, खासकर तेल अवीव में भी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया.

किन-किन देशों में फैला संघर्ष?

ईरान की जवाबी कार्रवाई अब कई देशों तक फैल चुकी है. खास तौर पर खाड़ी क्षेत्र के 8 देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. इनमें शामिल हैं:

  • बहरीन
  • इराक
  • जॉर्डन
  • कुवैत
  • कतर
  • सऊदी अरब
  • संयुक्त अरब अमीरात
  • ओमान

इन सभी देशों में एयरबेस, सैन्य ठिकानों और कुछ रणनीतिक इलाकों पर हमले की खबरें सामने आई हैं.

देशवार क्या हुआ?

बहरीन

राजधानी मनामा के पास अमेरिकी Fifth Fleet मुख्यालय को निशाना बनाया गया. कुछ रिहायशी इलाकों और एयरपोर्ट के पास भी खतरे की स्थिति बनी, जिसके बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई.

कुवैत

अली अल सलेम एयर बेस और कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास हमले की खबरें आईं. कई लोग घायल हुए और उड़ानों पर असर पड़ा.

कतर

अल उदैद एयरबेस, जो क्षेत्र में अमेरिका का बड़ा सैन्य अड्डा है, वहां मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए. राजधानी दोहा में धमाकों की आवाजें सुनी गईं और हवाई सेवाएं प्रभावित हुईं.

संयुक्त अरब अमीरात

अल धफ्रा एयरबेस को निशाना बनाया गया. अबू धाबी और दुबई के कुछ हिस्सों में मिसाइल गिरने की खबरें आईं, जिसके बाद एयरपोर्ट अस्थायी रूप से बंद करने पड़े.

जॉर्डन

मुवफ्फक सल्ती एयरबेस पर हमले की कोशिश हुई. कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, लेकिन कुछ इलाकों में असर देखने को मिला.

सऊदी अरब

प्रिंस सुल्तान एयरबेस सहित अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. साथ ही तेल क्षेत्रों पर खतरा बढ़ गया है, जिसे लेकर सऊदी अरब ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

इराक

एरबिल में अमेरिकी बेस और कांसुलेट पर हमले की कोशिश हुई. कुछ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया, लेकिन हल्का नुकसान हुआ.

ओमान

दुक्म पोर्ट पर ड्रोन हमला किया गया. इसके अलावा समुद्री क्षेत्र में एक तेल टैंकर को भी निशाना बनाए जाने की खबर है.

अन्य प्रभावित क्षेत्र

संघर्ष केवल इन देशों तक सीमित नहीं रहा. यमन, लेबनान और सीरिया में भी हमलों की घटनाएं सामने आई हैं. दक्षिणी सीरिया के सुवैदा शहर में मिसाइल गिरने से जनहानि की खबर है.

वहीं साइप्रस में स्थित एक ब्रिटिश एयरबेस को भी निशाना बनाया गया. इस दौरान कीर स्टारमर ने अमेरिका को सीमित सैन्य सहयोग देने की बात कही और अपने एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति दी.

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत पर भी पड़ सकता है:

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं. हालात बिगड़ने पर उनकी सुरक्षा चिंता का विषय बन सकती है.

तेल की कीमतें: सऊदी अरब और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों में अस्थिरता से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है.

हवाई यात्रा पर असर: कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द या डायवर्ट हो रही हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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