'G7 से आगे निकल चुका है BRICS', बिजनेस फोरम में पुतिन ने कही ऐसी बातें, अमेरिका को लगेगी मिर्ची!

पुतिन ने साफ कहा कि दुनिया लगातार बदल रही है. BRICS देश अब G7 को पीछे छोड़ चुके है. पश्चिमी देश लगातार कमजोर पड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि अभी विश्व में गहरे और बड़े बदलाव हो रहे हैं.

BRICS Business Forum russia president Vladimir Putin speech
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BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के बीच भारत और रूस के रिश्तों की मजबूती एक बार फिर नजर आई. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. दोनों नेताओं ने हाथ मिलाने के साथ गले मिलकर मुलाकात की और इसके बाद अहम द्विपक्षीय बैठक में हिस्सा लिया. मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन को संत तिरुवल्लुवर की रूसी भाषा में अनुवादित पुस्तक भी भेंट की. 

दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में राजनीतिक संबंधों के साथ व्यापार, अर्थव्यवस्था, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और स्किल मोबिलिटी जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को लेकर चर्चा हुई. वहीं BRICS बिजनेस फोरम के मंच से पुतिन ने पश्चिमी देशों पर भी निशाना साधा और वैश्विक राजनीति को लेकर अपनी बात रखी.

पश्चिमी देशों पर पुतिन का निशाना

पुतिन ने साफ कहा कि दुनिया लगातार बदल रही है. BRICS देश अब G7 को पीछे छोड़ चुके है. पश्चिमी देश लगातार कमजोर पड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि अभी विश्व में गहरे और बड़े बदलाव हो रहे हैं. इसका कारण ये है कि जो देश 20वीं सदी के दूसरे भाग में आर्थिक विकास में सबसे आगे थे, उनकी जगह अब विकास के नए इंजन ले रहे हैं. जब मैं 'पुराने' कहता हूं, तो यह बस कहने की बात है. हम सभी जानते हैं कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं.'

पुतिन ने कहा इन तथाकथित पुराने नेताओं के पास अब भी बहुत मजबूत पक्ष और अच्छा विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और साइंटिफिक एडवांटेज, वैज्ञानिक स्कूल वगैरह हैं. यह दुखद है, लेकिन चीजों का स्वभाव ऐसा नहीं है. मानवता और अर्थव्यवस्था का स्वभाव ऐसा नहीं है. विश्व हमेशा बदलता रहता है.

रूसी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि पिछले 5 साल में दुनिया की GDP का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ब्रिक्स देशों का रहा, जबकि तथाकथित G7 का योगदान महज 29 फीसदी रहा है. इसी दौरान, दुनिया की इकॉनमी में हुई ग्रोथ की बात करें, तो उस ग्रोथ का आधे से अधिक हिस्सा ब्रिक्स का रहा है, जबकि G7 का हिस्सा सिर्फ 18 प्रतिशत रहा है. ऐसा क्यों है? इसका जवाब आसान है, दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी ब्रिक्स देशों में रहती है और इसीलिए, उनके पास बहुत ही डायनामिक और वाइब्रेंट घरेलू बाजार हैं.

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