दिल्ली में सांस लेना मतलब रोज 11 सिगरेट फूंकना, दिवाली के बाद धुंआ-धुंआ हुआ इलाका, देखें VIDEO

दिवाली के बाद एक बार फिर से दिल्ली की हवा बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है.

Breathing in Delhi means smoking 11 cigarettes a day
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

दिवाली के बाद एक बार फिर से दिल्ली की हवा बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है. हर साल की तरह इस बार भी त्योहार के बाद राजधानी की फिज़ा में जहर घुल गया है, और इसके परिणाम बेहद चिंताजनक हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा वायु गुणवत्ता (Air Quality Index – AQI) इतनी खराब हो गई है कि इसे सांस लेने लायक नहीं कहा जा सकता.

बर्कले अर्थ (Berkeley Earth) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में मौजूदा वायु प्रदूषण स्तर इतना अधिक है कि यहां रह रहे लोगों का हर दिन का प्रदूषण से सामना ऐसा है जैसे वे लगभग 11.1 सिगरेट पी रहे हों. रिपोर्ट ने यह तुलना PM2.5 (Particulate Matter 2.5) के स्तर के आधार पर की है, जो कि हवा में मौजूद सबसे खतरनाक प्रदूषक कणों में से एक है.

  • रोजाना: 11.1 सिगरेट
  • साप्ताहिक: 77.7 सिगरेट
  • मासिक: लगभग 333 सिगरेट

इसका अर्थ है कि दिल्ली की हवा में लंबे समय तक रहना, एक चेन स्मोकर बनने के बराबर है, बिना सिगरेट के धुएं को सीधे फेफड़ों में लिए हुए.

वायु गुणवत्ता किस स्तर पर पहुंची?

21 अक्टूबर की सुबह, दिल्ली के अधिकांश इलाकों में वायु गुणवत्ता बहुत खराब (Very Poor) से गंभीर (Severe) श्रेणी में दर्ज की गई. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) और SAFAR (System of Air Quality and Weather Forecasting And Research) की रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली में कई जगहों पर AQI 400 से ऊपर रहा, जो कि ‘गंभीर’ स्तर की श्रेणी में आता है.

कुछ प्रमुख इलाकों में AQI स्तर:

  • वजीरपुर: 423 (Severe)
  • द्वारका: 417
  • आनंद विहार: 404
  • अशोक विहार: 404
  • बवाना: 427 (देश का सबसे खराब AQI 21 अक्टूबर की सुबह)

इन आंकड़ों से साफ है कि राजधानी के लोग खुली हवा में सांस नहीं ले पा रहे हैं. सबसे खतरनाक बात यह है कि 36 में से लगभग सभी मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता गंभीर या बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई है.

NCR क्षेत्र भी प्रदूषण की चपेट में

सिर्फ दिल्ली ही नहीं, उसके आसपास के क्षेत्र- नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम भी प्रदूषण की गिरफ्त में हैं. कुछ स्थानों के आंकड़े:

  • गाजियाबाद (वसुंधरा): AQI 353
  • गाजियाबाद (लोनी): AQI 333
  • गुरुग्राम (ग्वाल पहाड़ी): AQI 369
  • गुरुग्राम (सेक्टर 51): AQI 348

दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले करोड़ों लोग इस समय घातक वायु प्रदूषण की चपेट में हैं, जो आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है.

4 वर्षों में सबसे प्रदूषित रही यह दिवाली

  • पिछले चार वर्षों के आंकड़ों की तुलना करें तो यह दिवाली अब तक की सबसे प्रदूषित दिवाली रही है.
  • पटाखों की आवाजें पूरी रात गूंजती रहीं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों की धज्जियां उड़ाई गईं.
  • ग्रीन पटाखों के बजाय प्रतिबंधित आतिशबाज़ियों का अधिक इस्तेमाल हुआ, जिससे हवा में PM2.5 और PM10 का स्तर खतरनाक ढंग से बढ़ गया.
  • दिवाली की अगली सुबह कई लोगों ने आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की.

सरकार द्वारा लागू की गई GRAP (Graded Response Action Plan) जैसी योजनाएं भी इस बार असरदार साबित नहीं हो सकीं, क्योंकि आम जनता का सहयोग और जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार नहीं दिखा.

दिल्ली दुनिया में सबसे प्रदूषित शहर

वर्तमान वायु गुणवत्ता स्तर के आधार पर, दिल्ली इस समय दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में पहले स्थान पर आ गया है.

  • दिल्ली: पहले स्थान पर
  • लाहौर (पाकिस्तान): दूसरे स्थान पर
  • ढाका (बांग्लादेश) और अन्य दक्षिण एशियाई शहर भी सूची में हैं

इस रैंकिंग से जाहिर होता है कि दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट बन चुका है.

स्वास्थ्य पर प्रभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लंबे समय तक PM2.5 के संपर्क में रहना निम्नलिखित गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है:

  • फेफड़ों का कैंसर
  • स्ट्रोक
  • अस्थमा और ब्रोंकाइटिस
  • हृदय रोग
  • समय से पहले मृत्यु

बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग सबसे अधिक जोखिम में होते हैं.

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