दिवाली के बाद एक बार फिर से दिल्ली की हवा बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है. हर साल की तरह इस बार भी त्योहार के बाद राजधानी की फिज़ा में जहर घुल गया है, और इसके परिणाम बेहद चिंताजनक हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा वायु गुणवत्ता (Air Quality Index – AQI) इतनी खराब हो गई है कि इसे सांस लेने लायक नहीं कहा जा सकता.
बर्कले अर्थ (Berkeley Earth) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में मौजूदा वायु प्रदूषण स्तर इतना अधिक है कि यहां रह रहे लोगों का हर दिन का प्रदूषण से सामना ऐसा है जैसे वे लगभग 11.1 सिगरेट पी रहे हों. रिपोर्ट ने यह तुलना PM2.5 (Particulate Matter 2.5) के स्तर के आधार पर की है, जो कि हवा में मौजूद सबसे खतरनाक प्रदूषक कणों में से एक है.
इसका अर्थ है कि दिल्ली की हवा में लंबे समय तक रहना, एक चेन स्मोकर बनने के बराबर है, बिना सिगरेट के धुएं को सीधे फेफड़ों में लिए हुए.
वायु गुणवत्ता किस स्तर पर पहुंची?
21 अक्टूबर की सुबह, दिल्ली के अधिकांश इलाकों में वायु गुणवत्ता बहुत खराब (Very Poor) से गंभीर (Severe) श्रेणी में दर्ज की गई. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) और SAFAR (System of Air Quality and Weather Forecasting And Research) की रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली में कई जगहों पर AQI 400 से ऊपर रहा, जो कि ‘गंभीर’ स्तर की श्रेणी में आता है.
VIDEO | Delhi: A thin layer of smog engulfs Anand Vihar area, reducing visibility as air quality remains in the ‘poor’ category.
— Press Trust of India (@PTI_News) October 21, 2025
Stage II (GRAP-2) measures continue to be in force across Delhi-NCR.#Delhi #AirPollution #Smog
(Full video available on PTI Videos –… pic.twitter.com/ULtqPCBBOv
कुछ प्रमुख इलाकों में AQI स्तर:
इन आंकड़ों से साफ है कि राजधानी के लोग खुली हवा में सांस नहीं ले पा रहे हैं. सबसे खतरनाक बात यह है कि 36 में से लगभग सभी मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता गंभीर या बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई है.
NCR क्षेत्र भी प्रदूषण की चपेट में
सिर्फ दिल्ली ही नहीं, उसके आसपास के क्षेत्र- नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम भी प्रदूषण की गिरफ्त में हैं. कुछ स्थानों के आंकड़े:
दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले करोड़ों लोग इस समय घातक वायु प्रदूषण की चपेट में हैं, जो आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है.
4 वर्षों में सबसे प्रदूषित रही यह दिवाली
सरकार द्वारा लागू की गई GRAP (Graded Response Action Plan) जैसी योजनाएं भी इस बार असरदार साबित नहीं हो सकीं, क्योंकि आम जनता का सहयोग और जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार नहीं दिखा.
दिल्ली दुनिया में सबसे प्रदूषित शहर
वर्तमान वायु गुणवत्ता स्तर के आधार पर, दिल्ली इस समय दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में पहले स्थान पर आ गया है.
इस रैंकिंग से जाहिर होता है कि दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट बन चुका है.
स्वास्थ्य पर प्रभाव
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लंबे समय तक PM2.5 के संपर्क में रहना निम्नलिखित गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है:
बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग सबसे अधिक जोखिम में होते हैं.
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