ब्राजील के राष्ट्रपति लुई इनाशियो लुला डा सिल्वा ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि ट्रंप के साथ उनके किसी भी प्रकार के निजी या राजनीतिक संबंध नहीं हैं और अमेरिका की ओर से ब्राजील पर लगाए गए आयात शुल्क को उन्होंने "राजनीतिक विद्वेष" का नाम दिया.
लुला ने बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ का खामियाजा खुद अमेरिकी उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा. उन्होंने कहा, “अब अमेरिकी नागरिकों को ब्राजील से आने वाली कॉफी और मांस जैसी जरूरी वस्तुओं के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी. ये एकतरफा फैसले अंततः अमेरिका की जनता के लिए नुकसानदेह साबित होंगे.”
संपर्क की कोई पहल क्यों नहीं की गई?
जब लुला से यह सवाल किया गया कि क्या उन्होंने ट्रंप से संपर्क करने की कोशिश की थी, तो उन्होंने दो टूक कहा, “मैंने कभी कोई कॉल नहीं किया, क्योंकि ट्रंप को बात करने में दिलचस्पी नहीं थी.”गौरतलब है कि ट्रंप ने एक बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि ब्राजील के राष्ट्रपति कभी भी उन्हें कॉल कर सकते हैं, लेकिन लुला ने यह स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन का रवैया संवाद के पक्ष में कभी नहीं था.
अखबारों से मिला टैरिफ का पता, सोशल मीडिया पर ऐलान से नाराजगी
लुला ने बातचीत में यह भी बताया कि उन्हें अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बारे में किसी औपचारिक माध्यम से नहीं, बल्कि ब्राजील के अखबारों के माध्यम से पता चला. उन्होंने ट्रंप की उस प्रवृत्ति की आलोचना की जिसमें वह आर्थिक और कूटनीतिक फैसलों की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, बजाय संबंधित सरकारों से सीधे संवाद के.उन्होंने कहा, “यह कोई तरीका नहीं है. एक जिम्मेदार नेता को ऐसे अहम फैसलों की जानकारी आधिकारिक माध्यमों से साझा करनी चाहिए, न कि ट्वीट के जरिए.”
"ट्रंप ब्राजील से नहीं, बोलसोनारो से जुड़े थे"
राष्ट्रपति लुला ने स्पष्ट किया कि ट्रंप के कार्यकाल के दौरान ब्राजील में सत्ता पर जायर बोलसोनारो थे और ट्रंप के संबंध असल में बोलसोनारो से थे, ब्राजील से नहीं. उन्होंने कहा, “मैं जब राष्ट्रपति बना, तब तक ट्रंप का कार्यकाल लगभग समाप्त हो चुका था. मेरा उनसे कोई निजी या औपचारिक संबंध नहीं रहा है. वे अमेरिका के राष्ट्रपति हो सकते हैं, लेकिन दुनिया के राजा नहीं हैं.”
भारत और ब्राजील पर अमेरिकी शुल्क – एक समान स्थिति
गौरतलब है कि भारत और ब्राजील, दो ऐसे बड़े देश हैं जिन्हें ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल के दौरान अमेरिकी टैरिफ नीति का सीधा असर झेलना पड़ा. जहां भारत पर शुरुआत में 25% शुल्क लगाया गया, वहीं बाद में उसमें 25% और की बढ़ोतरी की गई. इसके अलावा, भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा.ब्राजील पर लगाए गए 50% टैरिफ को लेकर लुला ने इसे सिर्फ व्यापारिक फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम बताया. उनका मानना है कि यह अमेरिका-ब्राजील के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है.
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