BrahMos Missile: वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम इस हफ्ते भारत के दौरे पर हैं. वे नई दिल्ली में कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे. इस दौरे को दोनों देशों के रिश्तों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस दौरान भारत और वियतनाम के बीच कई बड़े मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है, खासकर रक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर.
भारत और वियतनाम के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होने की संभावना है. दोनों देश इस बात पर विचार कर सकते हैं कि कैसे मिलकर सुरक्षा और सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाया जाए. इस बातचीत में सबसे ज्यादा चर्चा ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर हो रही है.
ब्रह्मोस मिसाइल डील की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, वियतनाम भारत और रूस की संयुक्त कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा बनाई गई ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने में रुचि दिखा रहा है. अगर यह डील होती है, तो इसकी कीमत करीब 60 अरब रुपये तक हो सकती है. इसमें सिर्फ मिसाइल ही नहीं बल्कि ट्रेनिंग और सपोर्ट सिस्टम भी शामिल होगा. हालांकि, माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान तुरंत किसी बड़े समझौते पर साइन होने की संभावना कम है.
इंडो-पैसिफिक में बढ़ती साझेदारी
भारत और वियतनाम दोनों के लिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बहुत अहम है. इस क्षेत्र में चीन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, इसलिए भारत अपने साझेदार देशों के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा है. वियतनाम को भारत इस रणनीति में एक मजबूत और भरोसेमंद साथी मानता है.
पहले से मजबूत होते रिश्ते
भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही बढ़ रहा है. भारत पहले ही फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेच चुका है और इंडोनेशिया के साथ भी रक्षा समझौता कर चुका है. इसके अलावा, भारत वियतनाम की सेना को ट्रेनिंग देने में भी मदद करता रहा है. साल 2023 में भारत ने वियतनाम को “किरपान” नाम की एक स्वदेशी युद्धपोत (कोर्वेट) भी उपहार में दी थी, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए.
व्यापारिक रिश्ते भी तेजी से बढ़े
सिर्फ रक्षा ही नहीं, भारत और वियतनाम के बीच व्यापार भी तेजी से बढ़ रहा है. पिछले वित्तीय वर्ष में दोनों देशों के बीच व्यापार 16 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंच गया. दोनों देश आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को और आगे बढ़ाने पर लगातार काम कर रहे हैं.
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