Chandigarh Mayor Election: चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जीत दर्ज करते हुए सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. भाजपा उम्मीदवार सौरभ जोशी ने त्रिकोणीय मुकाबले में आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के प्रत्याशियों को हराकर मेयर पद हासिल किया. चुनाव में अंत तक AAP और कांग्रेस के उम्मीदवार मैदान में बने रहे, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिला.
सौरभ जोशी पंजाब भाजपा के स्टेट मीडिया हेड विनीत जोशी के सगे भाई हैं और अब वे चंडीगढ़ के नए मेयर होंगे.
ओपन वोटिंग में हुआ फैसला
इस बार मेयर चुनाव सीक्रेट बैलेट की बजाय ओपन वोटिंग के जरिए कराया गया. पार्षदों ने सीट से खड़े होकर अपना वोट दिया. मेयर चुनाव में:
चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने कांग्रेस प्रत्याशी गुरप्रीत सिंह गाबी के पक्ष में मतदान किया.
वीडियोग्राफी के बीच पूरी हुई चुनाव प्रक्रिया
मेयर चुनाव की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि किसी तरह के विवाद या आरोप से बचा जा सके.
वोटिंग से पहले प्रिजाइडिंग ऑफिसर ने उम्मीदवारों से पूछा कि क्या कोई अपना नामांकन वापस लेना चाहता है, लेकिन AAP और कांग्रेस—किसी भी दल के उम्मीदवार ने नाम वापस नहीं लिया.
तीनों दल मैदान में, नंबर गेम में BJP आगे
इस चुनाव में भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस तीनों प्रमुख दलों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे. नगर निगम की मौजूदा स्थिति इस प्रकार थी:
इस तरह कुल वोटों की संख्या 36 हो गई. नंबर गेम में शुरुआत से ही भाजपा मजबूत स्थिति में थी, बावजूद इसके AAP और कांग्रेस ने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया.
AAP-कांग्रेस गठबंधन की अटकलें
चुनाव से पहले चर्चा थी कि अगर AAP और कांग्रेस एक साथ आ जातीं, तो वे भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकती थीं. यदि AAP के 11 पार्षद, कांग्रेस के 6 पार्षद और सांसद का 1 वोट एकजुट हो जाता, तो कुल 18 वोट बनते जो भाजपा के बराबर होते.
ऐसी स्थिति में मेयर का फैसला ड्रा (पर्ची) के जरिए होता. हालांकि, दोनों दलों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि किसी तरह का गठबंधन नहीं होगा, और अंततः यही भाजपा की जीत की वजह बनी.
क्रॉस वोटिंग के डर से रिसॉर्ट पॉलिटिक्स
सभी की नजर इस बात पर थी कि क्या कोई पार्षद खुलकर क्रॉस वोटिंग करेगा, लेकिन ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला.
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