अटल-आडवाणी से लेकर शाह-नवीन तक... 45 सालों में BJP को मिले 12 राष्ट्रीय अध्यक्ष, देखें पूरी लिस्ट

भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है.

BJP got 12 national presidents in 45 years see full list
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BJP Presidents List: भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. 20 जनवरी 2026 को नितिन नवीन औपचारिक रूप से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभालेंगे. इससे पहले वे निर्विरोध चुने जा चुके हैं और आज उनके नाम की औपचारिक घोषणा की जाएगी. इसके साथ ही नितिन नवीन भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे.

पार्टी नेतृत्व में यह बदलाव ऐसे समय हो रहा है, जब भाजपा देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और उसके सामने संगठन को और मजबूत करने, खासकर दक्षिण भारत में विस्तार की बड़ी चुनौती है.

नितिन नवीन: सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्षों में शामिल

नितिन नवीन को पिछले वर्ष पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. कार्यकारी अध्यक्ष का पद पहली बार वर्ष 2019 में बनाया गया था. नितिन नवीन बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं और उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी पुराना जुड़ाव रहा है.

भाजपा अध्यक्ष का कार्यकाल सामान्य रूप से तीन वर्षों का होता है, हालांकि पार्टी का संसदीय बोर्ड जरूरत पड़ने पर इस अवधि को बढ़ा भी सकता है.

कैसे चुना जाता है BJP का राष्ट्रीय अध्यक्ष?

भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए एक तयशुदा निर्वाचक मंडल होता है. इस मंडल में कुल 5708 सदस्य शामिल होते हैं, जिन्हें देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठनात्मक चुनावों के जरिए चुना जाता है.

इसके अलावा पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में 35 वरिष्ठ नेता शामिल होते हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा जैसे दिग्गज नाम शामिल रहते हैं.

एक अहम बात यह है कि पार्टी की स्थापना से लेकर अब तक भाजपा में कभी भी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए मतदान नहीं हुआ. सभी अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए हैं.

BJP की स्थापना और शुरुआती दौर

भारतीय जनता पार्टी का गठन 1980 में जनसंघ के बाद हुआ. उस समय देश आपातकाल के बाद की राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा था और जनता पार्टी का प्रयोग असफल हो चुका था. भाजपा के संस्थापक नेताओं में अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, नानाजी देशमुख, के. आर. मल्कानी, सिकंदर बख्त, विजय कुमार मल्होत्रा, विजयराजे सिंधिया, भैरों सिंह शेखावत, शांता कुमार, राम जेठमलानी और जगन्नाथराव जोशी जैसे नाम शामिल थे.

पार्टी का चुनाव चिह्न कमल था और पहले अधिवेशन में अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रसिद्ध नारा दिया- “अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा.”

अटल बिहारी वाजपेयी: (1980–1986)

अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. उनका लक्ष्य पार्टी को एक उदार हिंदुत्व वाली राष्ट्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करना था. लेखक विनय सीतापति ने अपनी पुस्तक ‘जुगलबंदी: द बीजेपी बिफोर मोदी’ में वाजपेयी को “उदार योद्धा” बताया है, जिन्होंने पार्टी को आरएसएस के समानांतर एक राजनीतिक पहचान दी.

लाल कृष्ण आडवाणी: हिंदुत्व की मुख्यधारा

अटल के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने पार्टी की कमान संभाली. वे तीन बार भाजपा अध्यक्ष बने. 1990 की राम रथ यात्रा ने आडवाणी को राष्ट्रीय राजनीति में केंद्र में ला दिया. सोमनाथ से अयोध्या तक निकली इस यात्रा ने राम मंदिर आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाया.

लेखिका सबा नकवी के अनुसार, बिहार में लालू प्रसाद यादव द्वारा आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद यह आंदोलन और तेज हुआ और भाजपा की सीटें 2 से बढ़कर 120 तक पहुंच गईं.

हालांकि 2005 में पाकिस्तान दौरे के दौरान मोहम्मद अली जिन्ना को “धर्मनिरपेक्ष” कहने पर उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा.

डॉ. मुरली मनोहर जोशी (1991–1993)

जोशी के कार्यकाल में राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था.

1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय वे अयोध्या में मौजूद थे. उन्होंने इसे “इतिहास का मोड़” बताया था. जोशी ने पार्टी में आरएसएस की वैचारिक पकड़ को और मजबूत किया.

कुशाभाऊ ठाकरे: संगठन का विस्तार

कुशाभाऊ ठाकरे के कार्यकाल में पहली पूर्ण एनडीए सरकार बनी. वे संगठन निर्माण के पक्षधर थे और मानते थे कि पार्टी एक परिवार की तरह होनी चाहिए. मध्य प्रदेश और ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन विस्तार का श्रेय उन्हें दिया जाता है.

बंगारु लक्ष्मण और उसके बाद (2000–2002)

बंगारु लक्ष्मण भाजपा के पहले दलित राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, लेकिन उनका कार्यकाल एक स्टिंग ऑपरेशन विवाद के कारण छोटा रहा. इसके बाद के. जना कृष्णमूर्ति ने पार्टी को संभाला और दक्षिण भारत में संगठन के विस्तार पर ध्यान दिया.

वेंकैया नायडू और राजनाथ सिंह

वेंकैया नायडू (2002–2004) के समय पार्टी को चुनावी झटका लगा. इसके बाद राजनाथ सिंह दो बार (2005–2009, 2013–2014) अध्यक्ष बने और संगठनात्मक मजबूती पर काम किया.

गडकरी, अमित शाह और नड्डा का दौर

  • नितिन गडकरी (2010–2013): संगठन का आधुनिकीकरण
  • अमित शाह (2014–2020): अभूतपूर्व चुनावी सफलताएं, 2019 में प्रचंड जीत
  • जेपी नड्डा (2020–2026): कोविड जैसी चुनौतियों के बीच संगठन को एकजुट रखा

अब नितिन नवीन की बारी

अब भाजपा की कमान नितिन नवीन के हाथों में है. उनसे संगठन को नई ऊर्जा देने, युवाओं को जोड़ने और दक्षिण भारत में पार्टी की पकड़ मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है.

45 वर्षों के इस सफर में भाजपा ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और हर अध्यक्ष ने अपने समय में पार्टी की दिशा तय की है. अब यह देखना अहम होगा कि नितिन नवीन के नेतृत्व में भाजपा आगे किस रास्ते पर बढ़ती है.

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