Bittu Tabahi Ajnar River: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर प्रशासन तक लोगों का ध्यान खींचा है. यहां 21 साल के बीएससी छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी ने प्रदूषित अजनार नदी की सफाई का जिम्मा उठाया है. सुरेंद्र को सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है.
बिट्टू ने इस साल 26 जनवरी से नदी की सफाई का अभियान शुरू किया था. शुरुआत में उन्होंने अकेले ही नदी से कचरा और मलबा निकालना शुरू किया. इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा और सफाई करते समय उनकी सेहत पर भी असर पड़ा.
सांपों के बीच भी जारी रखा सफाई अभियान
नदी की सफाई के दौरान बिट्टू का सामना सांपों से भी हुआ. वहीं, स्थानीय मंदिर के पास सफाई करते समय उनके शरीर के कुछ हिस्सों में संक्रमण भी हो गया. इसके बावजूद उन्होंने अपना अभियान नहीं रोका और लगातार नदी की सफाई में जुटे रहे.
भोपाल निवास पर ब्यावरा के बेटे सुरेंद्र सिंह चौधरी ‘बिट्टू तबाही’ से आत्मीय भेंट की।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) September 5, 2026
बिट्टू ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प से सिर्फ अजनार नदी की सफाई ही नहीं की, बल्कि अपने प्रयासों से समाज को यह संदेश भी दिया है कि बदलाव के लिए बड़ी भीड़ नहीं, एक सच्ची पहल ही काफी है।
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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की मुलाकात
बिट्टू के सफाई अभियान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनकी हर तरफ चर्चा होने लगी. उनकी मेहनत की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक भी पहुंची. इसके बाद मुख्यमंत्री ने बिट्टू से मुलाकात की और उनके काम की जमकर तारीफ की.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिट्टू ने सिर्फ एक नदी को साफ करने का काम नहीं किया, बल्कि लोगों को यह भरोसा भी दिलाया कि बड़े बदलाव के लिए हमेशा बड़ी भीड़ की जरूरत नहीं होती. एक व्यक्ति की मजबूत पहल भी बदलाव की शुरुआत कर सकती है.
उन्होंने कहा कि अगर एक युवा अकेले नदी को बचाने का संकल्प ले सकता है, तो सभी लोग मिलकर अपने जल स्रोतों को और बेहतर बना सकते हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार के ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का मकसद भी जल स्रोतों का संरक्षण, उनका पुनर्जीवन और लोगों की भागीदारी बढ़ाना है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें
बिट्टू ने सोशल मीडिया पर नदी की सफाई के दौरान की तस्वीरें शेयर की थीं. इनमें सफाई से पहले और बाद की नदी की स्थिति साफ नजर आ रही थी. ‘बिट्टू तबाही’ नाम से शेयर की गई ये तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं और लोगों ने उनकी मेहनत की खूब तारीफ की.
नगर पालिका भी मदद के लिए आई आगे
बिट्टू की मेहनत देखकर ब्यावरा नगर पालिका भी उनके अभियान में शामिल हो गई. नगर पालिका के सब-इंजीनियर रूपेश कुमार नेताम के मुताबिक, पालिका की ओर से सफाई के लिए पूरी मदद दी जा रही है. कचरा और मलबा हटाने के लिए भारी मशीनें भी लगाई गई हैं.
नदी से पुराने कचरे, मलबे और पॉलीथिन को निकालने के लिए पोक्लेन मशीन तैनात की गई है. बिट्टू से प्रेरित होकर स्थानीय लोग भी सफाई अभियान से जुड़ने लगे हैं. अधिकारियों के मुताबिक, मानसून से पहले हर साल नदी और नालों की सफाई कराई जाती है. इस बार मानसून की बारिश से भी सफाई में मदद मिली है. अधिकारियों ने यह भी कहा कि बिट्टू की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गई नदी की ‘पहले और बाद’ की तस्वीरें असली हैं.
गंदे पानी को रोकना सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि नदी की सफाई के बाद भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. अधिकारियों के मुताबिक, नदी के प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह इसमें सीधे गिरने वाला गंदा पानी है. ब्यावरा नदी में पांच बड़े नालों से गंदा पानी पहुंच रहा है.
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर पालिका ने करीब 14.77 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है. सब-इंजीनियर रूपेश कुमार नेताम ने बताया कि एसटीपी बनने के बाद नालों का गंदा पानी साफ किए बिना नदी में नहीं जाएगा. इससे नदी में प्रदूषण की समस्या को लंबे समय के लिए खत्म करने में मदद मिलेगी.
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