ग्रैमी के मंच से बिली आइलीश बिली आइलीश ने ऐसा क्या कहा, जिसे सुन कर पक्का भड़क जाएंगे ट्रंप?

Billie Eilish On Trump: ग्रैमी अवॉर्ड्स आमतौर पर संगीत, गायन प्रतिभा और बेहतरीन एल्बम्स के लिए चर्चा में रहते हैं. कई बार रेड कार्पेट पर सितारों के फैशन और लुक्स भी सुर्खियां बटोर लेते हैं.

Billie Eilish What did Billie Eilish say from the Grammy stage that would make Trump angry America
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Billie Eilish On Trump: ग्रैमी अवॉर्ड्स आमतौर पर संगीत, गायन प्रतिभा और बेहतरीन एल्बम्स के लिए चर्चा में रहते हैं. कई बार रेड कार्पेट पर सितारों के फैशन और लुक्स भी सुर्खियां बटोर लेते हैं. लेकिन साल 2026 की ग्रैमी अवॉर्ड्स की रात इन तमाम पहलुओं से हटकर एक अलग वजह से चर्चा में आ गई. इस बार ग्रैमी का मंच अमेरिका की इमिग्रेशन एजेंसी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) के खिलाफ विरोध का प्रतीक बन गया.

समारोह के दौरान कई नामी कलाकारों ने अवॉर्ड स्वीकार करते समय देश में चल रही सख्त इमिग्रेशन कार्रवाइयों पर खुलकर सवाल उठाए. मंच से दिए गए भाषणों में कलाकारों की भावनाएं साफ झलक रही थीं, जहां उन्होंने प्रवासियों के साथ हो रहे व्यवहार पर नाराजगी जताई और मानवता की बात की.

बैड बनी का तीखा संदेश: “ICE out”

एल्बम ऑफ द ईयर का सम्मान जीतने वाले प्यूर्टो रिको के मशहूर रैपर बैड बनी ने अपने भाषण की शुरुआत ही एक मजबूत राजनीतिक संदेश के साथ की. उन्होंने मंच से “ICE out” कहकर अपनी बात शुरू की और कहा कि प्रवासी न तो अपराधी हैं, न ही जानवर और न ही बाहरी दुनिया से आए एलियन. उनके मुताबिक प्रवासी भी इंसान हैं और अमेरिकी समाज का हिस्सा हैं.

बैड बनी ने अपना अवॉर्ड उन सभी लोगों को समर्पित किया, जिन्हें बेहतर भविष्य और सपनों की तलाश में अपना देश छोड़ना पड़ा. उनका संदेश साफ था कि अमेरिका जैसी विविधताओं से बनी सभ्यता में प्रवासियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

ओलिविया डीन ने साझा की अपनी जड़ें

बेस्ट न्यू आर्टिस्ट का पुरस्कार जीतने वाली ओलिविया डीन ने भी मंच का इस्तेमाल अपने पारिवारिक इतिहास को सामने रखने के लिए किया. उन्होंने बताया कि वह एक प्रवासी परिवार की पोती हैं और उनकी सफलता उन अनगिनत लोगों के संघर्ष का नतीजा है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद नहीं छोड़ी. ओलिविया के शब्दों में यह भावना झलकी कि प्रवासियों को सिर्फ नीतियों और कानूनों के नजरिए से नहीं, बल्कि इंसानी नजरिए से देखा जाना चाहिए.

“चोरी की गई ज़मीन पर कोई गैरकानूनी नहीं होता”

अमेरिकी पॉप स्टार बिली आइलीश ने भी ICE के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने समारोह के दौरान “ICE out” लिखा हुआ पिन पहना और सॉन्ग ऑफ द ईयर का पुरस्कार लेते समय मंच से कहा कि “चोरी की गई ज़मीन पर कोई भी गैरकानूनी नहीं होता.”

उनका यह बयान अमेरिका के औपनिवेशिक इतिहास की ओर इशारा करता है, जहां मूल अमेरिकी समुदायों को उनकी पुश्तैनी ज़मीनों से बेदखल किया गया था. बिली आइलीश ने अपने शब्दों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि जिस भूमि पर आधुनिक अमेरिका खड़ा है, उसका इतिहास भी पीड़ा और अन्याय से जुड़ा हुआ है.

मंच पर दिखा प्रतीकात्मक विरोध

ग्रैमी समारोह में केवल भाषणों तक ही विरोध सीमित नहीं रहा. कई कलाकार ICE विरोधी पिन, बैज और प्रतीक पहनकर पहुंचे. गीतकार एमी एलन, जेसन इसबेल, मार्गो प्राइस, केहलानी और रियानन गिडेंस जैसे कलाकारों ने भी अपनी मौजूदगी से असहमति जाहिर की.

बोन आइवर बैंड के जस्टिन वर्नन ने सीटी पहनकर उन कानूनी पर्यवेक्षकों को सम्मान दिया, जो ज़मीन पर ICE की कार्रवाइयों की निगरानी करते हैं और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को दस्तावेज़ी रूप में दर्ज करते हैं. यह प्रतीकात्मक कदम यह दिखाता है कि कलाकार केवल मंच से बोल ही नहीं रहे थे, बल्कि विरोध को एक दृश्य रूप भी दे रहे थे.

कौन हैं बिली आइलीश?

बिली आइलीश आज के दौर की सबसे चर्चित और प्रभावशाली अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर में से एक हैं. उनका पूरा नाम बिली आइलीश पाइरेट बेयर्ड ओ’कॉनेल है और उनका जन्म 18 दिसंबर 2001 को कैलिफोर्निया में हुआ था. बहुत कम उम्र में उन्होंने वैश्विक संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बना ली.

उनका 2019 में रिलीज हुआ एल्बम When We All Fall Asleep, Where Do We Go? दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय हुआ. अपनी अलग तरह की आवाज़, डार्क म्यूज़िक स्टाइल और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय के कारण बिली युवाओं के बीच खास तौर पर लोकप्रिय हैं. उन्होंने अब तक कई ग्रैमी अवॉर्ड्स जीते हैं और इस साल उनके गाने ‘वाइल्डफ्लावर’ को सॉन्ग ऑफ द ईयर का सम्मान मिला.

अमेरिका को “चोरी की गई ज़मीन” क्यों कहा जाता है?

अमेरिका को “चोरी की गई ज़मीन” कहने का संदर्भ उसके ऐतिहासिक अतीत से जुड़ा है. माना जाता है कि आधुनिक अमेरिका के निर्माण के दौरान मूल अमेरिकी समुदायों को उनकी पारंपरिक और पुश्तैनी ज़मीनों से जबरन हटाया गया. कई मामलों में सैन्य ताकत का इस्तेमाल हुआ और कई बार धोखे से किए गए समझौतों के जरिए आदिवासियों को विस्थापित किया गया.

19वीं सदी में “ट्रेल ऑफ टीयर्स” जैसे अभियानों के तहत हजारों मूल निवासियों को अपने घर-बार छोड़कर दूर-दराज के इलाकों में बसने के लिए मजबूर किया गया. अमेरिका सरकार ने आदिवासी समुदायों के साथ सैकड़ों संधियां कीं, लेकिन बाद में उनमें से अधिकांश को तोड़ दिया गया.

इंडियन रिमूवल एक्ट और होमस्टेड एक्ट जैसे कानूनों के जरिए आदिवासी ज़मीनें श्वेत बसने वालों को सौंप दी गईं. इसके पीछे ज़मीन को लेकर दो अलग-अलग सोच भी थी, जहां मूल अमेरिकी समुदाय ज़मीन को साझा विरासत मानते थे, वहीं यूरोपीय मूल के बसने वाले निजी मालिकाना हक की अवधारणा पर विश्वास करते थे. इसी टकराव ने बड़े पैमाने पर ज़मीन छीने जाने और आदिवासी समाज के हाशिए पर चले जाने की स्थिति पैदा की.

संगीत मंच से सामाजिक संदेश

ग्रैमी अवॉर्ड्स 2026 ने यह दिखा दिया कि बड़े मंच केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आवाज़ उठाने का भी सशक्त माध्यम बन सकते हैं. इस बार कलाकारों ने संगीत से आगे बढ़कर मानवाधिकार, प्रवासी समुदायों की स्थिति और ऐतिहासिक अन्याय जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी.

इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि कला और राजनीति को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता, क्योंकि कलाकार भी उसी समाज का हिस्सा होते हैं, जिसकी समस्याओं पर वे अपनी आवाज़ उठाते हैं.

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