Nitish Kumar Yatra: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब बाढ़ अनुमंडल के बख्तियारपुर स्थित अपने पैतृक आवास से बाहर निकल रहे थे, तभी एक परिचित आवाज ने उनका ध्यान खींच लिया. यह आवाज एक पुराने चाय दुकानदार की थी, जो वर्षों से उसी स्थान पर चाय की दुकान चलाता आ रहा है. आवाज सुनते ही मुख्यमंत्री खुद उसके पास पहुंचे और उसकी बात गंभीरता से सुनी.
मुख्यमंत्री इस दौरान एक निजी समारोह में शामिल होने के लिए बख्तियारपुर पहुंचे थे. लेकिन कार्यक्रम से निकलते समय जैसे ही सुरों जी नामक चाय दुकानदार ने अपनी समस्या रखनी चाही, मुख्यमंत्री ने बिना किसी औपचारिकता के उससे संवाद किया.
फरियाद सुनते ही जिलाधिकारी को दिए निर्देश
चाय दुकानदार सुरों जी ने अपनी समस्या मुख्यमंत्री के सामने रखी. नीतीश कुमार ने पूरी बात ध्यान से सुनने के बाद मौके पर मौजूद जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वे मामले की पूरी जानकारी लें और इसका समाधान सुनिश्चित करें. जिलाधिकारी ने सुरों जी की समस्या को एक कागज पर लिखकर लिया और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी शिकायत पर जल्द कार्रवाई की जाएगी.
मुख्यमंत्री का यह व्यवहार वहां मौजूद लोगों के लिए भी खास रहा, क्योंकि उन्होंने एक आम नागरिक की आवाज को तुरंत गंभीरता से लिया. बताया जाता है कि सुरों जी की चाय दुकान से मुख्यमंत्री का पुराना रिश्ता रहा है. अपने शुरुआती राजनीतिक दौर में नीतीश कुमार अक्सर इसी दुकान पर चाय पीने आया करते थे.
समृद्धि यात्रा के तहत जनता से संवाद
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों समृद्धि यात्रा पर हैं. इस यात्रा की शुरुआत 16 जनवरी को बेतिया से हुई है. यात्रा के पहले चरण में मुख्यमंत्री उत्तर बिहार के 9 जिलों का दौरा करेंगे. इस दौरान वे विभिन्न सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत का जायजा लेंगे और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें करेंगे.
समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक सही तरीके से पहुंच रहा है या नहीं. इसके साथ ही वे सीधे जनता से संवाद कर उनकी समस्याएं भी सुन रहे हैं.
यात्राओं के जरिए जनता से जुड़ने की परंपरा
नीतीश कुमार की जनसंपर्क यात्राओं की परंपरा 2005 से शुरू हुई थी, जब उन्होंने इसे न्याय यात्रा का नाम दिया. इसके बाद समय-समय पर इन यात्राओं के स्वरूप बदले गए. साल 2020 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने समाज सुधार अभियान यात्रा की शुरुआत की.
इसके बाद 2023 में समाधान यात्रा और 2024 में प्रगति यात्रा निकाली गई. अब यह पहल समृद्धि यात्रा के रूप में आगे बढ़ रही है. इन यात्राओं के दौरान मुख्यमंत्री खुद जनता से मिलते हैं, उनकी शिकायतें सुनते हैं और संबंधित विभागों व अधिकारियों को मौके पर ही दिशा-निर्देश देते हैं.
जनता के करीब सरकार, तेज होता विकास
राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों का मानना है कि जब-जब सरकार सीधे जनता के संपर्क में आती है, तब-तब विकास कार्यों में तेजी देखने को मिलती है. नीतीश कुमार की यात्राएं इसी सोच को दर्शाती हैं, जहां शासन और जनता के बीच संवाद को प्राथमिकता दी जाती है.
बख्तियारपुर में एक पुराने चाय दुकानदार से मुलाकात का यह दृश्य मुख्यमंत्री की उसी शैली को दर्शाता है, जिसमें सत्ता के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति भी आम नागरिक की आवाज को उतनी ही अहमियत देता है.
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