जमीन सर्वे नियमों में बदलाव, जजों के लिए नई गाड़ियां, कैशलेस इलाज... बिहार कैबिनेट में 27 एजेंडों पर मुहर

Bihar Cabinet Meeting Decisions: बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बुधवार का दिन कई बड़े फैसलों के नाम रहा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट बैठक में 27 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी.

Bihar Cabinet Meeting Decisions Land Survey Rules samrat chaudhary
Image Source: Social Media

Bihar Cabinet Meeting Decisions: बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बुधवार का दिन कई बड़े फैसलों के नाम रहा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट बैठक में 27 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी. इन फैसलों में सबसे ज्यादा चर्चा भूमि सर्वे, जमीन खरीद नीति, कैशलेस इलाज, युवाओं के रोजगार और सिंचाई परियोजनाओं को लेकर रही. सरकार ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में बिहार में प्रशासनिक ढांचे से लेकर स्वास्थ्य, रोजगार और भूमि व्यवस्था तक कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे.

भूमि सर्वे और बंदोबस्त प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

कैबिनेट ने बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त (संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी देकर राज्य में चल रहे भूमि सर्वेक्षण कार्य को नई दिशा देने की कोशिश की है. सरकार का दावा है कि इससे जमीन से जुड़े रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी और सटीक बनेंगे. लंबे समय से बिहार में जमीन विवाद, पुराने खतियान और नक्शों की गड़बड़ी लोगों के लिए बड़ी परेशानी रहे हैं. ऐसे में नई नियमावली को प्रशासनिक सुधार के तौर पर देखा जा रहा है. 

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार अब रैयती और अन्य प्रकार की जमीनों का नया खतियान और भू-मानचित्र तैयार किया जाएगा. इससे जमीन मालिकों को स्पष्ट दस्तावेज मिल सकेंगे और विवाद कम होने की उम्मीद है.

जमीन खरीद पर किसानों और मालिकों को बड़ा फायदा

कैबिनेट ने बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026 को भी मंजूरी दी है. इस नई नीति के तहत सरकार अगर किसी की जमीन खरीदेगी तो उसका भुगतान पहले की तुलना में काफी ज्यादा होगा. शहरी क्षेत्रों में जमीन मालिकों को बाजार मूल्य या सर्किल रेट में जो अधिक होगा, उसकी दोगुनी राशि दी जाएगी. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यही भुगतान चार गुना तक होगा. इसके अलावा सरकार ने जमीन मालिकों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने का भी फैसला किया है. सबसे बड़ी राहत यह है कि ऐसी जमीनों की खरीद पर स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा. माना जा रहा है कि इससे सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान होगी और किसानों का विरोध भी कम हो सकता है.

विधायकों से लेकर कर्मचारियों तक को कैशलेस इलाज

बिहार सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया है. कैबिनेट ने वर्तमान और पूर्व विधायकों, उनके आश्रितों, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों, पेंशनधारियों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी दी है.

सरकार का मानना है कि इससे इलाज के दौरान आर्थिक बोझ कम होगा और सरकारी सेवाओं से जुड़े लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सकेगी. आने वाले दिनों में इस योजना के लागू होने के बाद हजारों परिवार सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे.

युवाओं के रोजगार पर सरकार का नया फोकस

राज्य सरकार ने श्रम संसाधन विभाग का नाम बदलकर “युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग” करने का फैसला लिया है. यह बदलाव केवल नाम का नहीं बल्कि सरकार की नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. अब रोजगार, स्किल डेवलपमेंट, प्रशिक्षण और विदेश रोजगार से जुड़े काम इसी विभाग के अधीन होंगे.

सरकार ने इस विभाग के संचालन के लिए 57 नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है. साथ ही छह नए विशेष नियोजन निदेशालय बनाए जाएंगे, ताकि युवाओं को रोजगार आधारित प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें. दिव्यांग युवाओं के लिए भी विशेष योजनाएं और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है.

PMCH में आधुनिक स्पाइन यूनिट बनेगी

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल यानी Patna Medical College and Hospital में स्वतंत्र स्पाइन सब-स्पेशियलिटी यूनिट की स्थापना को मंजूरी मिलना स्वास्थ्य क्षेत्र का बड़ा फैसला माना जा रहा है. इसके लिए 39 नए पदों का सृजन होगा. नई यूनिट में मिनिमल इनवेसिव सर्जरी, एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी, स्पाइनल डिफॉर्मिटी करेक्शन और टीबी स्पाइन जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज संभव हो सकेगा. अब रीढ़ की जटिल बीमारियों के लिए मरीजों को दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़ सकता है.

पटना हाईकोर्ट के जजों के लिए नई EV और हाइब्रिड गाड़ियां

कैबिनेट ने Patna High Court के न्यायाधीशों के उपयोग के लिए 10 नई इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों की खरीद को मंजूरी दी है. इसे पर्यावरण अनुकूल पहल के रूप में भी देखा जा रहा है.

बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई परियोजनाओं पर बड़ा निवेश

बिहार सरकार ने विश्व बैंक सहायता प्राप्त योजनाओं के लिए 102.98 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसके तहत मधुबनी और सुपौल जिलों के 21 हजार हेक्टेयर से ज्यादा इलाके को बाढ़ से सुरक्षा देने की योजना है. इसके अलावा पश्चिमी कोसी सिंचाई परियोजना और झंझारपुर शाखा नहर के आधुनिकीकरण को भी स्वीकृति दी गई है. इन योजनाओं से लगभग 89 हजार हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है.

सुरक्षा और न्यायिक व्यवस्था को भी मजबूती

कैबिनेट ने शेखपुरा और गोपालगंज में इंटेलिजेंस ब्यूरो के आवासीय परिसर निर्माण को मंजूरी दी है. वहीं बेगूसराय में नए उपकारा के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है. पूर्णिया, भागलपुर और गया में एक्सक्लूसिव स्पेशल कोर्ट बनाने के फैसले को न्यायिक प्रक्रिया तेज करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

बालू घाटों और सरकारी नलकूपों पर बड़ा फैसला

राज्य सरकार ने बालू घाटों की बंदोबस्ती के लिए बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड को अधिकृत एजेंसी घोषित कर दिया है. इससे बालू कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश मानी जा रही है. वहीं सरकारी नलकूपों की मरम्मत और संचालन की जिम्मेदारी अब लघु जल संसाधन विभाग को सौंप दी गई है, ताकि सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके.

ये भी पढ़ें: बिहार में शिक्षक भर्ती को लेकर सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान, विज्ञापन को लेकर हुई स्थिति साफ