Bihar Assembly Election 2025: बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट लेती नजर आ रही है. अक्टूबर-नवंबर 2025 में संभावित विधानसभा चुनाव से पहले ही सियासी ज़मीन गरमाने लगी है. भले ही चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक तारीखों की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राज्य में राजनीतिक गहमागहमी चरम पर है.
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर उठे विवाद ने पहले ही माहौल को ताज़ा कर दिया है, और इसी बीच C-Voter के ताज़ा सर्वे ने सियासी दलों के लिए चेतावनी की घंटी भी बजा दी है.
तेजस्वी यादव अब भी जनता की पहली पसंद, लेकिन ग्राफ गिरा
इंडिया गठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव अब भी मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे नजर आ रहे हैं. लेकिन सर्वे में उनकी लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई है. फरवरी 2025 में 41% लोग उन्हें सीएम बनाना चाहते थे. जून में यह आंकड़ा घटकर 37% हो गया. और अब अगस्त में यह गिरकर 31% तक आ गया है. यानी जनता के बीच समर्थन अब भी मजबूत है, लेकिन उत्साह में कमी दिख रही है, जो इंडिया गठबंधन के लिए चिंता की बात हो सकती है.
नीतीश कुमार की पकड़ ढीली, NDA में भरोसेमंद विकल्प की कमी
वहीं बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी चेहरे नीतीश कुमार की लोकप्रियता लगातार ढलान पर है. फरवरी और जून दोनों में उन्हें 18% समर्थन मिला था, जबकि अगस्त में यह घटकर 15% रह गया है. NDA के अन्य नेता, जैसे चिराग पासवान और सम्राट चौधरी भी उभरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई भी नीतीश की जगह लेने लायक विश्वसनीय चेहरा नहीं बन पाया है. चिराग पासवान जून में 11% तक उछले थे लेकिन अगस्त में फिर 10% पर आ गए. सम्राट चौधरी हालांकि स्थिर प्रदर्शन कर रहे हैं, अगस्त में 10% पर रहे.
बाहर से आ रहे खिलाड़ी, अंदर मचाने को तैयार हलचल
इस पूरे समीकरण में प्रशांत किशोर सबसे दिलचस्प चेहरा बनकर उभरे हैं. फरवरी में जहां उन्हें 15% समर्थन मिला था, जून में यह 16% हुआ, और अगस्त में यह आंकड़ा 22% तक पहुंच गया. तेजी से बढ़ती यह लोकप्रियता इस ओर इशारा कर रही है कि PK सिर्फ राजनीतिक रणनीतिकार नहीं, बल्कि सीधा मुकाबला करने वाले उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने को तैयार हैं. अब सवाल यह है, क्या वे किंगमेकर बनेंगे या खुद 'किंग' बनने की होड़ में उतरेंगे?
वोटर लिस्ट विवाद और राहुल गांधी का आरोप
इस बार का चुनाव केवल चेहरों का नहीं, बल्कि न्याय और पारदर्शिता का भी मुद्दा बन चुका है. राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों, जैसे वोटर लिस्ट से नाम कटने और पक्षपात के आरोप को जनता का बड़ा हिस्सा गंभीरता से ले रहा है. 59% लोगों ने माना कि राहुल के आरोपों में "दम" है. जबकि 67% जनता चाहती है कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर सफाई दे. यह पहलू वोटिंग बिहेवियर को सीधे प्रभावित कर सकता है और सत्ता के समीकरण को उलट-पलट भी सकता है.
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