अमेरिका के खिलाफ चीन-रूस की बड़ी प्लानिंग, 'खूबसूरत' हथियार से हमला करने की तैयारी

Russian Spy: जासूसी अब सिर्फ़ जेम्स बॉन्ड या हॉलीवुड फिल्मों की कहानी नहीं रह गई है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के ताज़ा खुलासों से यह स्पष्ट हो गया है कि रूस और चीन ने अमेरिका के खिलाफ एक नया, बेहद खतरनाक “हनीट्रैप वॉर” छेड़ दिया है. यह युद्ध बंदूक या मिसाइल से नहीं, बल्कि “हुस्न, रोमांस और मनोवैज्ञानिक रणनीति” के जरिए लड़ा जा रहा है.

Big planning of China and Russia against America preparation to attack with beautiful weapon
Image Source: ANI/ File

Russian Spy: जासूसी अब सिर्फ़ जेम्स बॉन्ड या हॉलीवुड फिल्मों की कहानी नहीं रह गई है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के ताज़ा खुलासों से यह स्पष्ट हो गया है कि रूस और चीन ने अमेरिका के खिलाफ एक नया, बेहद खतरनाक “हनीट्रैप वॉर” छेड़ दिया है. यह युद्ध बंदूक या मिसाइल से नहीं, बल्कि “हुस्न, रोमांस और मनोवैज्ञानिक रणनीति” के जरिए लड़ा जा रहा है.

अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी विशेषज्ञ जेफ स्टॉफ के मुताबिक, अब रूस और चीन की खुफिया एजेंसियां अमेरिका के वैज्ञानिकों, रक्षा विशेषज्ञों, टेक्नोलॉजी इंजीनियरों और रिसर्च प्रोजेक्ट्स से जुड़े लोगों को निशाना बना रही हैं. इसका उद्देश्य है, आकर्षण और भावनात्मक रिश्ता बनाकर उनसे गोपनीय जानकारी हासिल करना.

“हनीट्रैप”: जहां भावनाएं बनती हैं हथियार

इस जासूसी तकनीक को खुफिया जगत में “हनीट्रैप” कहा जाता है. इसमें एजेंट आकर्षक व्यक्तित्व, रोमांस, दोस्ती या शादी का झांसा देकर अपने लक्ष्य से राज निकलवाते हैं. कई बार यह रिश्ता वर्षों तक चलता है, ताकि सामने वाले को पूरी तरह विश्वास में लेकर गुप्त सूचनाएं हासिल की जा सकें.

मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) की इस नई शैली में हथियारों की जगह मानवीय कमजोरियों, जैसे प्रेम, लालच और अकेलापन का इस्तेमाल किया जा रहा है. अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक, यह रणनीति 21वीं सदी का सबसे खतरनाक “स्पाई टूल” बन चुकी है.

सोशल मीडिया बना वैश्विक जासूसी का नया ठिकाना

ब्रिटिश अखबार The Sun की रिपोर्ट के अनुसार, लिंक्डइन (LinkedIn) और फेसबुक जैसी प्रोफेशनल साइट्स को अब जासूसी का नया माध्यम बना लिया गया है. उदाहरण के तौर पर, अमेरिकी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ जेम्स मल्वेनन को लिंक्डइन पर कई आकर्षक चीनी महिलाओं से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिलीं. ये महिलाएं खुद को बिजनेस कंसल्टेंट या टेक इन्वेस्टर बताती थीं. बातचीत धीरे-धीरे निजी संबंधों तक बढ़ाई गई, ताकि उनके नेटवर्क और काम से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल की जा सके.

वर्जीनिया में दो चीनी महिलाओं को सुरक्षा सम्मेलन में फर्जी पहचान के साथ घुसने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया गया. इसी तरह एक रूसी महिला ने एक अमेरिकी एयरोस्पेस इंजीनियर से शादी की, बाद में खुलासा हुआ कि वह रूस की खुफिया एजेंसी के लिए काम कर रही थी. उसका पति आज भी उसकी वास्तविक पहचान नहीं जानता.

चीन का “सोशल स्पाई नेटवर्क”

अमेरिकी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट बताती है कि चीन ने अपने नागरिकों को “सूचना एकत्र करने वाले सैनिकों” में बदल दिया है. छात्र, प्रोफेसर, कारोबारी, निवेशक और रिसर्चर, लगभग हर वर्ग के लोग किसी न किसी स्तर पर राज्य-प्रायोजित जासूसी मिशनों में शामिल हैं. एक वरिष्ठ अमेरिकी खुफिया अधिकारी के शब्दों में, “अब हमें किसी कोने में छिपे KGB एजेंट को ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती, पूरा समाज ही अब हमारे खिलाफ काम कर रहा है.”

अमेरिकी व्यापार विभाग की गणना के मुताबिक, चीनी औद्योगिक जासूसी से अमेरिका को हर साल लगभग 600 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है. चीन “इनोवेशन प्रोग्राम” और “टेक स्टार्टअप पिच प्रतियोगिता” के नाम पर अमेरिकी कंपनियों से बौद्धिक संपत्ति (Intellectual Property) चुराने में लिप्त पाया गया है.

रूस की ‘रेड स्पाई गर्ल्स’ परंपरा 

रूस के लिए हनीट्रैप कोई नई रणनीति नहीं है. यह KGB के दौर से चली आ रही परंपरा है, जिसमें महिला एजेंटों को “स्पाई चार्म” के रूप में प्रशिक्षित किया जाता था. सबसे प्रसिद्ध उदाहरण एना चैपमैन का है, एक रूसी महिला एजेंट जिसे 2010 में अमेरिका में जासूसी करते हुए पकड़ा गया था. उसे बाद में रूस वापस भेज दिया गया और अब वह मॉस्को में “इंटेलिजेंस म्यूज़ियम” चलाती है, जो रूसी जासूसी इतिहास को समर्पित है.

एक अन्य रूसी एजेंट एलिया रोज़ा ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि रूस की सैन्य अकादमियों में लड़कियों को बाकायदा यह सिखाया जाता है कि कैसे “पुरुषों को आकर्षित कर उनसे राज निकलवाए जाएं.” हाल ही में ब्रिटेन की जांच एजेंसियों ने लंदन में दो बुल्गारियाई महिलाओं, त्वेटेलिना जेंचेवा और त्वेतांका डोनचेवा को गिरफ्तार किया, जो रूसी जासूसी नेटवर्क के लिए काम कर रही थीं.

अमेरिका में सबसे चर्चित मामला: “फैंग फैंग”

अमेरिकी एफबीआई की रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चर्चा चीनी एजेंट “फैंग फैंग” (Christine Fang) की होती है. 2011 से 2015 के बीच उसने कई अमेरिकी राजनेताओं से संपर्क बनाया, जिनमें कांग्रेस सदस्य एरिक स्वॉलवेल भी शामिल थे.

वह राजनीतिक फंडरेजिंग इवेंट्स में शामिल होती थी, युवा राजनेताओं से नजदीकी बढ़ाती थी और खुफिया सूचनाएं हासिल करने की कोशिश करती थी. एफबीआई की जांच शुरू होते ही फैंग फैंग रहस्यमय ढंग से अमेरिका से गायब हो गई और चीन लौट गई. यह मामला अमेरिकी राजनीति में सबसे बड़ी “हनीट्रैप इंटेलिजेंस ब्रीच” के रूप में दर्ज किया गया.

लक्ष्य है अमेरिका के विश्वास और मनोबल को तोड़ना

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि रूस और चीन अब सिर्फ सूचना चोरी नहीं कर रहे, बल्कि अमेरिकी समाज की मनोवैज्ञानिक संरचना को कमजोर करने की कोशिश में हैं.

यह “Soft Disruption” रणनीति है, जहां हथियार नहीं, बल्कि संदेह, आकर्षण और विश्वासघात का इस्तेमाल किया जाता है. इस युद्ध का मकसद है, अमेरिकी नागरिकों के बीच अविश्वास फैलाना, संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना, और अंदर से समाज की सुरक्षा प्रणाली को कमजोर करना.

“यह तीसरे विश्वयुद्ध का नया रूप है”

सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले वर्षों में यह मनोवैज्ञानिक और साइबर जासूसी युद्ध और अधिक खतरनाक रूप ले सकता है. पूर्व अमेरिकी इंटेलिजेंस अधिकारी एडवर्ड लुकास के शब्दों में, “अब युद्ध मिसाइलों से नहीं, माइक्रोचिप्स और मानव संबंधों से लड़ा जा रहा है. जिस देश के पास डेटा और दिमाग पर नियंत्रण है, वही भविष्य का विजेता होगा.”

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