बेमिसाल, अकल्पनीय, अकथनीय... पीएम मोदी के कार्यकाल को लेकर भारत 24 के मंच पर बोले मंत्री डॉ दया शंकर मिश्र

बनारस: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Viksit Uttar Pradesh Kashi Samvad 2026' में मंत्री दया शंकर मिश्र ने शिरकत की. इस दौरान मंत्री दया शंकर मिश्र ने काशी के विकास, पीएम मोदी के काम सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई.

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बनारस: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Viksit Uttar Pradesh Kashi Samvad 2026' में मंत्री दया शंकर मिश्र ने शिरकत की. इस दौरान मंत्री दया शंकर मिश्र ने काशी के विकास, पीएम मोदी के काम सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. 

काशी के विकास के साथ-साथ शहर की आत्मा, शहर की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में आप लोग सफल रहे हैं?

यह जो आपने कहा कि विरासत भी विकास भी मुझको लगता है कि इस देश में इससे अच्छा काशी से अच्छा कोई उदाहरण नहीं. यह दुनिया की सबसे प्राचीनतम जिंदा नगरी है. ज्ञान, वैराग, अध्यात, सांस्कृतिक राजधानी के रूप में काशी है तो ना जाने बाबा विश्वनाथ की नगरी है और जब से इस देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी की कर्मस्थली बनी है. तब से काशी के सपनों को जैसे पंख लग गए हो. यहां के लोग अतीत के काशी के लोगों के मन में काशी के विकास का जो सपना कभी ना देख पाए हो क्योंकि यह मैंने कहा ना कि अध्यात्म की नगरी थी. ऐतिहासिक नगरी है. यह नगरी अतीत में कहते हैं ना इतिहास से पुरानी है. जब भी जिक्र करिएगा काशी का जिक्र आया है तो न जाने कितनी सदियां बीत गई. मां गंगा जैसे एक सबसे बड़ा सौभाग्य काशी का यह है कि बाबा विश्वनाथ से जब उनका दोबारा मिलन होता है. कहते हैं ना भगवान शंकर की जटाओं से उलझकर जब वो पृथ्वी पर आई उसके बाद वो जो बिछड़ी तो काशी में ही वो मिलन है. और इस बार 12 ज्योतिर्लिंग में काशी बाबा की नगरी है. 

शिव की नगरी है. ऐसे में इस शहर को जो मिलना चाहिए था जो इस शहर की चिंता कभी पिछले सरकारों ने कभी नहीं किया. उनके आने के बाद से देखिए सड़कें हो. सबसे पहले तो मां गंगा का निर्मलीकरण. आज हमारी मां गंगा स्वच्छ है, निर्मल है, अविरल है. हमारे घाट कभी इन घाटों से गुजरना एक सिरे से दूसरे सिरे तक आप कभी नहीं जा पाते थे. आज हमारे घाट स्वच्छ है. हमारी गलियां साफ है. स्मार्ट सिटी है. तो सब कुछ बदला बदला सा है. फोर लेन सड़कें हैं. रिंग रोड है. बड़े अस्पताल हैं. जहां जैसे एक कंटोनमेंट के बाहर एक सड़क बनी. उस सड़क के लिए काशी के लोग न जाने कब से तरस रहे थे क्योंकि वो कंटोनमेंट का पार्ट था. सेना से बहुत लोगों ने प्रयास किया. काशी के बहुत सारे लोगों ने लेकिन प्रधानमंत्री जी के बाद जब ये बात उनके संज्ञान में आई आज एक बड़ी शानदार सी सड़क है. दो उसमें फ्लाई ओवर्स हैं. पुल है. तो कुल मिला के काशी जब वो काशी आए तो पहली जो सड़क बनी वो एयरपोर्ट से काशी को जोड़ने वाली. 

बड़ी सकरी सी सड़क हुआ करती थी. इंटरनेशनल एयरपोर्ट था. दुनिया में शायद सबसे ज्यादा विदेशी इस देश में अगर आते हैं. काशी जरूर आते हैं. हमारे जो देसी तीर्थ यात्री हैं उनके लिए भी काशी दुनिया के सबसे प्राचीन उनके पवित्र शहरों में उनके लिए तो इतना आध्यात्मिक नगरी की इस कदर उपेक्षा हुई थी. लेकिन आज आप कह सकते हो कि काशी जितना सोचा था काशी ने फोर लेन कनेक्टिविटी है. सिक्स लेन एट लेन अभी एक सड़क बन रही है जो रोहनिया से काशी को जोड़ती है वो एट लेन की कनेक्टिविटी है. नया पुल बन रहा है. मां गंगा पे आजादी के समय गुलामी के दौर में अंग्रेजों ने एक पुल बनाया था जिसको हम गांधी सेतु कहते हैं. उस सेतु के बाद एक नया पुल बना. लेकिन अब एक तीसरा पुल बन रहा. सारे स्टेशन हमारे बहुत सुंदर काशी स्टेशन बन रहा है. 

पुराना एक सिटी स्टेशन था वो है बनारसी स्टेशन, कैंट स्टेशन और हिंदुस्तान की शायद सबसे ज्यादा ट्रेनों की कनेक्टिविटी वो काशी में है. चाहे वंदे भारत हो, अमृत भारत हो. इन ट्रेनों में लगता है कि जो किसी ट्रेन की शुरुआत होती है तो जो पहला तोहफा मिलता है वो काशी को मिलता है. तो ऐसे में हम काशी के लोग अपने आप को बहुत गौरवशाली समझते हैं कि ये नरेंद्र मोदी जी की कर्मस्थली है और उन्होंने काशी को जब आते हैं हजारों हजार करोड़ रुपए की वो अब तक मुझको लगता है कि 52 52 टाइम्स 52 बार वो काशी आ चुके हैं. 

जब आए काशी की झोली को वो भर के जाते हैं और हम लोग तो जो कल्पना नहीं करते सोच नहीं पाते उससे ज्यादा तो काशी का अतीत का जो शानदार ऐतिहासिक काशी है उसका गौरव बना रहे उसकी प्राचीनता आध्यात्मिकता उसका जो स्वरूप है मौलिक स्वरूप उससे बिना छेड़छाड़ किए इन गलियों को बिना छेड़े इन घाटों को बिना छेड़े तो अतीत की काशी भी दिखे लेकिन काशी शहर जो बनारस शहर है उसकी जो जरूरतें हैं वो एक नया काशी के रूप में तीन से चार जैसा अभी हमारे प्राधिकरण के अधिकारी लोग कह रहे थे कि नया नई काशी के रूप में नए शहरों की प्लानिंग हो रही नया स्टेडियम इंटरनेशनल स्टेडियम बन रहा काशी में तो काशी जितना यहां के लोग सोचते हैं शायद वो मन की बातें मोदी जी तक पहुंच जाती हैं और जब वो आते हैं तो उसकी घोषणा हो जाती है.

प्रधानमंत्री मोदी के 12 सालों के कार्यकाल को आप कैसे देखते हैं?

बेमिसाल अकल्पनीय है, अकथनीय है. मुझको लगता है कि यह 12 वर्ष देश के इतिहास में सदैव याद किए जाएंगे. तीसरी पारी है. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. 140 करोड़ की आबादी है. दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता के हाथ में इस देश की कमान है. 2014 में जब इस देश के प्रधानमंत्री बने तो देश अर्थव्यवस्था के मामले में 11वीं पायदान पर था. सभागार भी जानता है और देश जानता है. दुनिया जानती है. वर्तमान में हम बड़े गर्व से कह सकते हैं कि देश तब जाना जब हमने जिस देश के हम 200 साल गुलाम थे जिन अंग्रेजों के जिन ब्रिटिश के जब पांचवी पायदान हमने हासिल किया तो देश को लगा कि सच में ऐसा हुआ. एक कल्पना भी साकार होने जैसा नहीं. कोई सोच नहीं सकता था कि जिस देश के हम गुलाम रहे 200 साल तक उसकी ईस्ट इंडिया कंपनी जिसने इस देश पर शासन किया उसको एक भारतवंशी बेटे ने खरीदा. 

दूसरी घटना हुई कि हमने ब्रिटेन को पांचवें स्थान से जब पीछे किया फिर चौथी पायदान पे हमने जापान को पीछे किया. फिर तीसरी पायदान पे जर्मनी है. अब हमारी मंजिल क्या है? 2047 तक इस देश का पूरा एक पथवे उन्होंने निर्णित कर लिया है. बना लिया है कि कैसे भारत हम दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है. अप टू सेवन पॉइंट. तो सात से ज्यादा की जिसकी ग्रोथ रेट हो झंझवात आते हैं बीच में आपने देखा कोरोना आया तो हमने उस परीक्षा को पास किया अभी युद्ध के दौर में भी आपने देखा कि कैसे सारा संसार पेट्रोलियम पदार्थ की महंगाई से जूझ रहा फिर भी हम क्योंकि एक ऐसे सक्षम और मजबूत हाथों में देश की कमान है कोरोना का काल था तो दुनिया के लोग सोचते थे कि भारत में न जाने कितनी मौतें होंगी और यकीन करिए मेरी बात पे कि हिंदुस्तान आजादी के बाद ना कालाजार का टीका बना पाया, ना टिटनेस का बना पाया, ना पोलियो का बना पाया, ना खसरा का बना पाया. ये चीजें न जाने कितनी मौतें हमारे देश में होती थी. 

बड़े गर्व से कह सकता हूं सभागार में आपके कि आजादी के बाद इस देश ने पहली बार अपना टीका बनाया. कोरोना दो टीके आपको याद है और उन टीकों से हमने देश के लोगों की प्राण रक्षा किया. संसार की सबसे बड़ी आबादी का मतलब कि संसार में सबसे ज्यादा मौतें इस देश में होनी चाहिए. लेकिन वो रेशियो मेरा देश का सबसे कम था और तो और हमने दुनिया के 40 45 देशों के ज्यादा लोगों को कोरोना का टीका दिया. दूसरी उपलब्धि कि तब देश के लोगों में गरीबी लोगों को लगा कि नौकरियां छूटी हैं. देश ठहरा हुआ है. सब कुछ वक्त ठहर गया था. ऐसे में हमने देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त में अनाज देना शुरू किया. वो आज तक जारी है. आज भी इस देश में किसी को आप नहीं कह सकते कि देश का कोई कोना और किसी गरीब व्यक्ति के पास कितनो गरीब हो अनाज है 4 करोड़ से ज्यादा लोगों को गरीब को घर दे दिया इस देश में 10 करोड़ से ज्यादा जिसकी मां कभी किसी दौर में गरीबी में खुद भी चूल्हे जलाया करती हो लकड़ी से न जाने क्या-क्या सामग्री होती है चूल्हे जलाने की गोरा गोइठा रहठा जिसको कहते हैं उस व्यक्ति को की आंखों में वो मां का दर्द था 

उन्होंने देश में पहली बार उज्ज्वला गैस के कनेक्शन के रूप में 10 करोड़ से ज्यादा मातृशक्ति को उज्ज्वला गैस का कनेक्शन दिया. पहले आप ट्रेनों से जब किसी गांव से गुजरा करते थे तो उस गांव के ऊपर धुएं का एक गुबार दिखता था. ठहरा हुआ धुआं. कारण कि हर घर का चूल्हा जलना. लेकिन आज आप बड़े गर्व से कहते हैं कि इस देश में अब शायद किसी को लकड़ी के चूल्हे पर खाना या तमाम साधनों से. इस देश में हमारे गांव कितने गंदे हुआ करते थे. हमारे रास्ते गंदे थे. प्रधानमंत्री जी ने इसी काशी नगरी में जब पहली बार फावड़ा उठाया, झाड़ू पकड़ा तो विपक्ष के लोगों को लगा कि क्या किसी देश का प्रधानमंत्री झाड़ू लगा सकता है. 

लेकिन वो मुझको लगता है कि महात्मा गांधी जी के बाद इस देश में स्वच्छता के ऐसे मिशन मतलब दूत बनके उभरे कि उनकी कही हुई बात को देश ने अपनाया है. आज इस देश में इंदौर अगर सबसे स्वच्छ शहर है. हमारी काशी भी उस नंबर में काफी ऊंचाई पर है. आज इस देश में एक जंग है शहरों के बीच में. हमारे गांव ओडीएफ के मामले में कि हमारा गांव शौचालय मुक्त है. ऐसे मतलब कोई गंदगी नहीं करता. इस देश में एक जंग है. सफाई की स्वच्छता की और बड़े गर्व से कह सकता हूं कि  इस देश में 11 करोड़ से ज्यादा शौचालय बने. हम शौचालय के बाद सामुदायिक शौचालय की कल्पना किया. चाहे उत्तर प्रदेश में मैं जितनी बातें आपसे कह रहा हूं हमारे उत्तर प्रदेश का सबसे मेजर शेयर उसमें है आवास के मामले में राशन के मामले में सड़क के लिहाज से 

माननीय देश के प्रधानमंत्री जी के कामों की तुलना हो रही थी तब कुछ एक किलोमीटर सड़कें हम रोज बनाते थे आज हम न जाने इस देश को एक्सप्रेसवे का देश कह सकते हैं आप दुनिया का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे बड़े गर्व से कह रहा हूं सभागार से कि सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे 600 कि.मी. से ज्यादा गंगा एक्सप्रेसवे. उत्तर प्रदेश को आप एक्सप्रेसवे का प्रदेश कह सकते हैं. 11 से ज्यादा एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे, जमुना एक्सप्रेसवे, आगरा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे. मैं आपको कह रहा हूं कि वही उत्तर प्रदेश जो बदहाल था कभी अपराध के लिए जाना जाता था. 

बीमारू राज्य कहा जाता था. देश के किसी अपराध की श्रेणी में हम रैंक पाते हम आज उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेसवे का प्रदेश 21 वर्किंग एयरपोर्ट हम पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर के एयरपोर्ट को आप सब ने सुना कि प्रधानमंत्री जी ने उद्घाटित किया वो एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट ये वही उत्तर प्रदेश है. ग्लोबल इन्वेस्टर समिट पिछले दिनों हुई थी. मुख्यमंत्री जी ने कराया था. उसमें 45 लाख करोड़ से हमारे कुछ उद्योगपति भाई भी यहां बैठे हैं. तमाम लोग हैं. 45 लाख करोड़ से ज्यादा का इन्वेस्टर उत्तर प्रदेश में आया. इंडस्ट्री आई. दो ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी हो चुकी है. 10 लाख और ₹15 लाख करोड़ की ये योजनाएं धरातल पर है. 

जिस उत्तर प्रदेश की पहचान कभी कट्टा और ये देसी बमों के लिए जानी जाती थी. अर्थात अवैध असलों के लिए आज उस उत्तर प्रदेश को ब्रह्मोस मिसाइल क्योंकि उत्तर प्रदेश में दो डिफेंस के कॉरिडोर हैं. एक बुंदेलखंड वो बुंदेलखंड जो पानी के बूंद को तरसता था. आज हर घर नल से जल में आज बुंदेलखंड की प्यास बुझी है. देश का कोई ऐसा कोना नहीं जिस राज्य में हर घर नल से जल पीने का शुद्ध पानी रहने को घर 54 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान के कार्ड जिसमें 60 लाख 60 करोड़ से ज्यादा गरीब लोग आच्छादित है जिससे 11 करोड़ मैंने बताया कि शौचालय 10 करोड़ से ज्यादा उज्जवला गैस के कनेक्शन तो ये 54 करोड़ से ज्यादा 55 करोड़ से ज्यादा जनधन के खाते खोले गए. 

जब सरकार बनी तो पहली बार इस देश में प्रधानमंत्री जी ने एक जनधन के खाते खुलवाए. उन गरीबों के आपको याद है अतीत का वो भारत जब एक खाता खोलने के लिए बैंक आपसे कहता था कि आप किसी की गारंटी कराइए. हम्. 54 करोड़ गरीबों के एक झटके में खाते खुले और उस गरीबी उस खाते का फायदा जान लीजिए कि डिजिटल ट्रांजैक्शन के मामले में हम दुनिया में नंबर एक है. डीबीटी डायरेक्ट मनी का जो ट्रांसफर होता है. इस देश के एक प्रधानमंत्री ने कभी किसी दौर में कहा था. सबको याद है सभागार में मुझको लगता कि कोई ऐसा इंसान नहीं जिसको यह शब्द ना पता हो. 

कि एक प्रधानमंत्री की स्वीकारोक्ति थी कि हम देश के उस आखिरी व्यक्ति के पास जब अपना पैसा दिल्ली से भेजते हैं. अगर ₹100 है तो ₹15 उस आखिरी आदमी के पास जिसकी कल्पना पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी करते हैं. लेकिन आज हमारे देश के प्रधानमंत्री गर्व से कह सकते हैं जी कि उस आखिरी व्यक्ति के पास केंद्र का भेजा ₹100 किसान सम्मान निधि ₹6000 तो 6000 ही उस व्यक्ति के खाते में किसी गरीब मां को विधवा पेंशन वृद्धा को वृद्धा पेंशन दिव्यांग को दिव्यांग पेंशन 18 प्रकार के विश्वकर्मा कामगारों को पेंशन अटल अटल पेंशन योजना मतलब एंडलेस है. 400 से ज्यादा योजनाएं इस देश में गरीब, मजदूर, किसान, मातृशक्ति आपने देखा ना आप महिला हैं. मैं आपको बताऊं कि आप इस देश में मातृक्ति की क्या स्थिति थी. 

लेकिन आज हम बड़े गर्व से कह सकते हैं कि एक करोड़ से ज्यादा स्वयं सहायता समूह उन स्वयं सहायता समूह से मिनिमम एक समूह में 10 से ज्यादा हमारी मातृशक्ति जुड़ी है. कहीं 10 है, 11 है, 12 है, 14 है. तो अगर हम 10 जोड़ें तो 1 करोड़ स्वयं सहायता समूहों से 10 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं. जो अपना कारोबार करती हैं. छोटे-छोटे दुकानें, रेड़ी, पटरी, ठेला प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ₹1,000 मिलते हैं गरीब को. 

यूपी चुनाव की तैयारी?

वो क्या तैयारियां करें जो दिन रात एक अनर्थक पथिक राही के रूप में जिस देश के प्रधानमंत्री आपने सुना होगा सदन में भी कि उन्होंने आज तक कभी छुट्टी नहीं लिया. जी अंडरलेस मतलब वही हाल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी का है. सुबह से शाम तक काम काम काम उत्तर प्रदेश में देश में 25 करोड़ से ज्यादा लोगों का जीवन गरीबी रेखा से ऊपर उठा है. इन पिछले 12 साल की यात्रा 12 साल की यात्रा में अगर इस देश के प्रधानमंत्री जी ने एक नया प्रतिमान स्थापित किया. 

वो देश के इतिहास के सफलतम प्रधानमंत्री एक बार प्रधानमंत्री बने हैं. 12 साल पूरा हुए हैं और वो 7 जून किसी ने 9 जून कहा है, किसी ने 7 जून कहा है. वो 7 जून आज है. आज वो इस देश के सफलतम प्रधानमंत्री बन जाएंगे. जिनकी एक पारी इतनी ला वो भी मैंने आपसे शुरुआत में कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र सबसे बड़ी आबादी सारा संसार विश्व में युद्ध में है हम और हम बुद्ध वाले हैं. हम शांत मन से हमारा देश तरक्की कर रहा है.

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