खेती, किसान सम्मान और क्लाइमेट चेंज... 'प्रवासी राजस्थान SUMMIT' में बोले कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी

Prawasi Rajasthan Summit: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'प्रवासी राजस्थान SUMMIT' में कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने शिरकत की. भागीरथ चौधरी ने मोदी सरकार में किसानों के लिए किए जा रहे कामों के बारे विस्तार से बताया.

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Prawasi Rajasthan Summit: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'प्रवासी राजस्थान SUMMIT' में कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने शिरकत की. भागीरथ चौधरी ने मोदी सरकार में किसानों के लिए किए जा रहे कामों के बारे विस्तार से बताया. इसके साथ पारंपरिक खेती, किसान सम्मान राशि और क्लाइमेट चेंज जैसी समस्याओं को लेकर भी अपनी बात रखी.

सवाल: राजस्थान की विशेषताएं क्या हैं?

जवाब: सबसे पहले तो मैं आज जगदीश जी भाई साहब को मैं बहुत-बहुत आभार व्यक्त करना चाहूंगा. धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने मुझे यहां बुलाया. और प्रवासी राजधानी भाइयों से सबके दर्शन करने का मुझे अवसर दिया. उसके लिए जगदीश जी भाई साहब का भारत 24 फर्स्ट इंडिया और पूरे परिवार को सबको बहुत-बहुत आभार. बहन पूजा जी जब राजस्थान की बात आती है तो राजस्थान का एक अलग ही पहचान है अलग ही शान है और देश बनी पूरी दुनिया में जो राजस्थानियों की जो बोलचाल है उनकी संस्कृति है और आओ भगत का जो कल्चर है वो दुनिया में कहीं नहीं है. मैं कह सकता हूं कि पूरे वर्ल्ड में सबसे ज्यादा यदि भाषा शब्द यही तो है सब कुछ इंसान का और यदि मीठी भाषा मैं बार-बार कहूं तो मैं कह सकता हूं कि जो राजस्थानियों की जो बोलचाल है बहुत पूरे वर्ल्ड में पूरे संसार में इसका कोई शान ही नहीं है और राजधानी होने पर गर्व भी है और पहनावा की बात करूं मैं तो जो ही मैंने कॉलेज से पढ़ाई छोड़ी और उसी दिन मैंने ये जो धोती और कुर्ता और इस पगड़ी के अंदर में और अपने आप को मैं अच्छा महसूस कर रहा हूं. 

कहते भी हैं जहां नहीं पूछे रेलगाड़ी वहां पहुंचे मारवाड़ी. क्या बात अरे देश तो नहीं पूरी दुनिया में पूरी दुनिया में पूजा जी मैं 2000 में यूरोप गया था जब राजनीति में नहीं था और जब मैंने उस टाइम देखा कि राजधानी जिनको मारवाड़ी कहते हैं हर जगह यूरोप में मैं काफी दिनों तक रहा वहां भी और भी जगह सब जगह जाते हैं तो मारवाड़ी क्या मारवाड़ी पुरुषार्थी है? कर्मशील है. कोलेरिया जी. हां. क्योंकि हमारी जो अभी नई जो पार्लियामेंट बनी है संसद उसमें सारा इंटीरियर का काम इन्हीं का है वास्तव में. तो क्योंकि आते ही मैंने कहा आज आए हो या नहीं? उन्होंने कहा मैं तो मुंबई में ही रहता हूं. तो मेरा कहने का मतलब है मारवाड़ी पुरुषार्थी है, कर्मशील है और उनमें जज्बा भी है इसलिए वो देश बने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना रखा है और प्रधानमंत्री मोदी जी का जो सपना है कि 2047 में यह देश विकसित राष्ट्र बने. मैं कह सकता हूं कि वैसे तो मैं केंद्र में मंत्री हूं परंतु क्योंकि मैं राजस्थान राजस्थानी हूं और फिर मैं किसान हूं और एक साधारण सा एक किसान परिवार में छोटी सी ढाणी में गांव में नहीं एक छोटी सी छोटी सी ढाणी के अंदर मेरा जन्म हुआ है. तो मैं मुझे गर्व है और राजधानियों पे गर्व है कि राजधानी 2047 में जो प्रधानमंत्री जी का सपना है 2047 विकसित राष्ट्र बने. मैं कह सकता हूं कि उसमें हमारी राजस्थानी मारवाड़ियों का एक बहुत बड़ा योगदान रहेगा. 

सवाल: विकसित भारत 2047 का हम जब जिक्र करते हैं तो किसान का रोल क्या होगा और इसके लिए आपका क्या प्रयास हैं?

जवाब: हमारा देश कृषि प्रधान देश है और कृषि इस देश की रीड की हड्डी है. किसान इसकी आत्मा है. मैं उस दौर से आज भी मुझे बस जो समय मिलता है मैं खेत पर जाता हूं और आनंद आता है मुझे किसान भगवान तो नहीं है परंतु भगवान से कम नहीं है जो 140 करोड़ जनता का पेट भरता है किसान की नहीं काम करने की नहीं तो समय सीमा है और नहीं उसकी आयु सीमा बूढ़े से लेकर बच्चे महिला रात और दिन काम करती है तो हमारे देशवासियों का पेट भरते हैं और इसलिए जब तक किसान संपन्न नहीं होगा किसान के घर में समृद्धि नहीं आएगी जब तक ये देश विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता है. तभी तो प्रधानमंत्री मोदी जी ने किसान सम्मान निधि क्या नाम भी क्या दिया?
किसान को कोई दे सकता है क्या? कोई नहीं दे सकता है. परंतु प्रधानमंत्री जी ने किसान सम्मान निधि का नाम दिया जो ₹ ₹2000 में तीन किस्तों में साल में ₹6000 दे रहे हैं. और प्रधानमंत्री जी ने मैं कह सकता हूं कि देखिए देश 1947 में आजाद हुआ. 

नारे बहुत दिए. मैं कुछ ज्यादा कहना नहीं. मैं कोई राजनीति बात नहीं करना चाहता हूं. क्योंकि परंतु मैं किसान हूँ और किसान के दर्द को मैं जानता हूं और वह समय मैंने बचपन में देखा है अभी जगदीश जी भाई साहब कह रहे थे वो मेरी दादी जी नहीं थी वो माताजी थी और 105 साल की उनकी आयु थी मैंने देखा अनाज की बहुत बड़ी कमी थी मैंने खुद ने मैं उस परिस्थिति से खुद निकला हुआ हूं अनाज की बहुत बड़ी कमी हुआ करती थी बाहर से अनाज सड़ा गला अनाज आता था और हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने यह आह्वान किया था कि एक हफ्ते में एक दिन का उपवास रखें और पूरे भारतीयों ने उस शास्त्री जी के आह्वान की उन्होंने पालन किया. इतनी अनाज की कमी थी. पर तो हमारे देश के अन्नदाताओं ने हमारे साइंटिस्ट हमारे वैज्ञानिकों ने कमाल करके दिया. कमाल क्या किया? कोरोना काल से लेकर अब तक 81 करोड़ जनता को आज फ्री अनाज दिया जा रहा है. यह पूरे विश्व में इस तरह की स्कीम कहीं नहीं है. 

और हमारे प्रधानमंत्री जी ने जो किसानों के हित में जो काम किया किसान सम्मान निधि नहीं एमएसपी बढ़ाने की नहीं. देश 1947 में आजाद हुआ. आज अभी हम 80वां 80 हम समता दिवस मनाया. और जब किसानों के लिए बहुत कुछ कहने के लिए गरीब के लिए, किसान के लिए, गांव के लिए, मजदूर के लिए नारे बहुत दिए. परंतु सच्चाई के अंदर सिर्फ नारे दिए. किसानों की, गरीब की कभी, गांव की कभी सुध नहीं ली. परंतु मैं गर्व से कहता हूं कि आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने किसान को समृद्ध करने के लिए उन्होंने आह्वान किया किसान की आमदनी दुगनी होनी चाहिए और मैं कह सकता हूं कि कहीं-कहीं तो दुगनी चौगुनी और 10 गुनी भी हुई है. परंतु अभी भी किसान को और कुछ देने की जरूरत है. और प्रधानमंत्री जी आपको पता है अभी किसान सम्मान निधि को 2000 30 31 तक बढ़ा है. 3 15 लाख करोड़ 3.15 हजार लाख करोड़ उन्होंने अभी किसान सम्मान निधि को 2030 31 तक बढ़ाने के लिए उन्होंने किया है. उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए काम किया. कृषि बजट को बढ़ावा देने का काम किया. ऐसे प्रधानमंत्री जी चाहते हैं कि किसान समृद्ध होगा तभी यह राष्ट्र 2047 में विकसित राष्ट्र बन रहा है तभी संभव है. 

सवाल: किसानों को समृद्ध बनाने का रोडमैप क्या है?

जवाब: सिर्फ योजना बनाना या सिर्फ किसान सम्मान निधि से या एमएसपी से ही किसान समृद्ध नहीं हो सकता है. इसलिए सबसे पहले के किसान की उपज को बढ़ाना उसकी लागत को कम करना समय पर उसको उसका दाम मिलना सिंचाई की है बिजली की है और भी जो उसको नई तकनीकी से उसको किसान को किसानी जो मशीनरी है उपकरण वो उसको उपलब्ध कराना और देखा कि आज 84% जो किसान है वो मध्यम और लघु यानी छोटे किसान है. आज पूरे दूसरे विकसित राष्ट्रों में देखें तो वहां बड़े-बड़े किसान है. बड़े-बड़े फार्म हाउस हैं. उनके परंतु यह सीमित किसान है, छोटे किसान है. 

छोटी जोत है तो वो कृषि उपकरण नहीं ले सकते हैं. तो इसके लिए प्रधानमंत्री जी ने नीति बनाई है कि सहकारिता के आधार पर हमारे केबी के कृषि विज्ञान केंद्रों के अंदर वो उपकरण वो रेंट पे ले सकते हैं और कम रेंट किराए पे और वह अपनी खेती कर सकते हैं. इसलिए वो उत्पादन बढ़ाना उत्पादन की लागत कम करना समय पर उसका उसको मूल्य मिले उसकी खरीद हो और उसको चाहे कृषि उपकरण हो चाहे बिजली हो चाहे पानी हो उसकी समुचित व्यवस्था हो यह होगी तभी किसान समृद्ध हो सकता है और इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने जो 2014 से लेकर 2026 तक जो 12 वर्षों में किसान हित के लिए जो काम किया वास्तव में बेमिसाल है. 

सवाल: क्लाइमेट चेंज जैसी समस्या को लेकर क्या किया जा रहा है?

जवाब: क्लाइमेट चेंज एक बहुत बड़ा एक चैलेंज है और एक बहुत बड़ी मैं कह रहा हूं हमारे वैज्ञानिकों के लिए हमारे साइंटिस्ट के लिए हमारे किसानों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है जो क्लाइमेट चेंज जो मौसम परिवर्तन हो रहा है मैं पूजा जी जिस प्रदेश से मैं आता हूं वो जी बैठे हैं मैं कहता हूं कि मेरे बचपन में जगदीश जी भाई साहब बचपन के अंदर 10 साल के आठ 10 साल के बच्चे जब आसमान से जब वर्षा की बूंदे गिरी वो कहते थे ये क्या हो रहा है कहां से गिर रही है यानी वर्षा इतनी कम होती थी और बाड़मेर जो हमारे जिले का बाड़मेर गांव है कोई पहले बाड़े आया करती थी वहां पर तो फिर यह हालत है कि सात आठ साल के 10 साल के बच्चे जब वर्षा होती नहीं थी, बरसा, पानी की बूंदे गिरती, तो वह सोचते कहां से यह गिर रही है. आज फिर वहां बाढ़ आने की स्थिति है. 

यानी क्लाइमेट चेंज हो रहा है. यह एक बहुत बड़ी चुनौती है. और इस चुनौती को पार पाने के लिए हमारे साइंटिस्ट हमारे वैज्ञानिक हमारी सरकार चाहे केंद्र की हो चाहे राज्यों की सरकारें हो हमारे किसानों को सबको इसमें मैं कह रहा हूं कि अलर्ट मोड पर हमें हम आ गए हैं और आना पड़ेगा. कारण क्या है? क्लाइमेट चेंज से जो किसान जो फसल बो रहा है बो रहे हैं आज उनके अंदर कई तरह की जो डिजीज आने लग गई है तो हम इसके लिए तैयार हैं. हमारे कृषि मंत्रालय तैयार है. हमारे कृषि मंत्री शिवराज सिंह जी चौहान साहब के नेतृत्व में और प्रधानमंत्री जी का जो है यह किसान को समृद्ध करना उनके जो नेतृत्व में जो काम हो रहा है क्लाइमेट चेंज हम बीज का इस तरह का हम उसको हम बीज को हम डेवलप करें ताकि वो क्लाइमेट चेंज के अंदर भी वो उस मौसम को झेल सके इसके लिए मैं उदाहरण के लिए बता बता रहा हूं. मैं राजस्थान से आता हूं. बाजरा राजस्थान में सबसे अधिक होता है हिंदुस्तान में. पहले 120 दिन के अंदर बाजरे की फसल पकती थी. 

आज 60 दिन में पकने लगी है. यह हम 109 जो बीजों का हमने अलग-अलग उनको नईनई वैरायटी ताकि क्लाइमेट चेंज के आधार पर वो टिक सके और किसान को उत्पादन भी उनके फर्क नहीं पड़े. उत्पादन भी बढ़े और समय पर हो और कम पानी में पैदावार कैसे हो इसके लिए ये सीड्स वगैरह और हम नई-नई वैरायटी हम डेवलप कर रहे हैं ताकि क्लाइमेट चेंज से किसी तरह क्योंकि देखिए खाद्य आज मैं अभी बता रहा था 81 करोड़ जनता को कोरोना काल से लेकर अब तक फ्री अनाज दिया जा रहा है. परंतु आज भी में दालन है, तिलहन है, फल है, फूल है. उसमें भी हमें आत्मनिर्भर बनना है. क्योंकि विकसित राज तब बनेगा जब हम आत्मनिर्भर बनेंगे. इसके लिए क्लाइमेट चेंज के लिए जो भी सामने आने वाली समस्या है चैलेंजिंग है उसको हम कृष मंत्रालय हम हमारे को ध्यान है हमारे वैज्ञानिकों को हमारे अधिकारियों को और हम सबको और उस पे हम कार्य कर रहे हैं. 

सवाल: पारंपरिक खेती को आगे बढ़ाकर भारत की आत्मनिर्भरता में कैसे रोल निभाना चाहते हैं?

जवाब:  नई तकनीकी से हमें खेती करनी परंपरागत किसान खेती करता है. और हमें उसमें बदलाव लाना होगा. नई टेक्नोलॉजी लानी होगी. अभी मैंने कहा सीट्स हम नए-नए कई तरह की वैरायटी चाहे गेहूं हो चाहे धान हो चाहे चाहे श्रीन हो चाहे दलन हो चाहे तेलन हो उसमें हम सीड्स में हम नई-नई वैरायटी ला रहे हैं ताकि उसका उत्पादन बढ़े उत्पादन बढ़े आज जैसे दूसरी जो विकसित राष्ट्र है वहां उत्पादन पर एकड़ ज्यादा है हमारा कम है तो किसान भी अब समझने लग गया है. वह भी अब कब तक घाटे में खेती करेगा. इसलिए अब हम नई तकनीकी से खेती करने की ओर हम जा रहे हैं. और एक आज भारत 24 चैनल के माध्यम से मैं ये सारे देश के अन्नदाता किसान भाइयों से निवेदन करना चाहूंगा. देखिए पांच तत्वों से यह ब्रह्मांड बना है. पांच तत्वों से पृथ्वी बनी है. पांच तत्वों से इंसान बना है. तो जब पृथ्वी प्रवाहित होती है. धरती प्रभावित होती है. हमारी जमीन प्रभावित होती है तो इंसान ही नहीं पशु पक्षी जीव मात्र भी उससे प्रभावित हुए नहीं रह सकता है. हम हरित क्रांति आई. एक मैंने पहले कहा था एक समय वह था जब अनाज की बहुत बड़ी कमी थी. आज हम अनाज में आत्मनिर्भर हैं. 

तो परंतु हम देखिए अति चीज बुरी है. जगदीश भाई साहब अति चीज शर्त वर्जित है. मैं ज्यादा बोलने की आदत है इसलिए मेरा गला बैठने लग गया. तो सच्चाई है तो अति चीज शर्त वर्जित है. आज हम डॉक्टर्स के पास जाते हैं. डॉक्टर्स कोई दवा लिखने के पहले कहते हैं कि आप जांच कराइए. आप ब्लड की है, यूरिन की है. आप जांच कराइए. उसके बाद मैं दवा लिखता हूं. वो रिपोर्ट आने के बाद ही वो दवा लिखता है. वही कारगर होती है. परंतु मैं किसान भाइयों से निवेदन करना चाहूंगा कि हम अति इस धरती के साथ भी अति कर दिए. हम यूरिया, डीएपी, पेस्टिसाइड हम अंधाधुंध डालने लग गए हैं. तो क्या मैं भोजन ज्यादा कर लूंगा तो मुझे फायदा करेगा? नुकसान नुकसान करेगा. बदहजमी होगी. तो इसी तरह से इस धरती को भी हम इसके साथ भी छात्र कर दिए. इसी को भी नशीली बना दिए. इसलिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने हमारे राजस्थान में हनुमानगढ़ से उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड सोइल हेल्थ कार्ड चालू किया था कि मिट्टी का परीक्षण कराइए उसमें पोटाश की कमी है. उसमें कैल्शियम की कमी है. उसमें जिप्सम की कमी है. और उस मिट्टी की जांच कराने के बाद ही किसान भाइयों अन्नदाताओं से मैं निवेदन करना चाहूंगा कि उसके बाद ही वह उसमें क्या कमी है? 

उसके बाद ही उसमें डालें ताकि अंधाधुंध आग मूंद के जो डीएपी यूरिया पेस्टिसाइड जो डाला जा रहा है इससे ये धरती बीमार हो गई है. इस धरती को बचाना है. आने वाली पीढ़ियों के लिए ये धरती में पौष्टिकता तत्व रहे वो जरूरी है. कार्बन रहे नहीं तो आने वाली पीढ़ियों के लिए तकलीफ हो जाएगी. इसलिए तो प्रधानमंत्री जी ने प्राकृतिक खेती के ऊपर उन्होंने जोर दिया है और मैं तो यह कहता हूं जो हमारी गौ माता है गाय को माता का दर्जा क्यों दिया गया इस संसार में कितने भी बड़े जानवर हैं जीव हैं चाहे हाथी नहीं मगरमच्छ बड़े-बड़े परंतु मैंने एक लेख पढ़ा था कि इस संसार में सबसे बड़ी आंत गौ माता की होती है. कहते हैं एक दफा तो उसको जहर भी दे दे तो अमृत के रूप में वो निकालती है. तो गौ आधारित हमें खेती करने की जरूरत है. मैं किसान भाइयों से कहना चाह रहा हूं. आप 10% आपकी जो जमीन है उसमें 10% आप गो आधारित खेती करें. प्राकृतिक खेती करें. एक 200 ड्रम 200 लीटर का ड्रम लें. उसमें 10 लीटर गाय का गोमूत्र लें. 10 किलो गाय का गोबर लें. दो किलो गुड़ ले और दो किलो बेसन चने की दाल का बेसन लेकर उसमें पानी भर के जैसे घड़ी घूमती है उसके आधार पर 5 मिनट सुबह पांच मिनट शाम को घुमाकर छाया में उस ड्रम को रखें और एक हफ्ते बाद अपने खेत के अंदर चाहे छिड़काव के रूप में हो चाहे स्प्रे करें चाहे उस खेत के अंदर पानी में चलाएं मैं कह सकता हूं और मैं खुद कर रहा हूं. मैं कह सकता हूं कि जितना डीएपी यूरिया पे सिंचासाई डाले उससे भी ज्यादा अधिक वो पैदावार देती है. इसलिए हमें प्राकृतिक खेती हमें करनी है. 

इस धरती को भी बचाना है. इंसान को भी बचाना है और किसानों को भी बचाना है. इसलिए आज भारत 24 के माध्यम से जगदीश जी भाई साहब देख रहे हैं. छोटी बात करनी चाहिए. बड़ा मैं तो आपको पता है. मैं तो किसान हूं. मैं तो गांव का आदमी हूं. इसलिए मेरे दिल में दर्द है कि इस धरती को बचाना जरूरी है. यह धरती माता पुकार रही है कि किसान अन्नदाता भाई हूं. आप मेरी जांच कराइए. मैं बीमार हो गई हूं. मेरे स्वास्थ्य का जांच करा के मेरे में क्या कमी है? उसके बाद ही आप उसमें प्रयोग करें ताकि मैं स्वस्थ रहूं और आने वाली सैकड़ों पीढ़ियों को मैं आपका पेट भर सकूं. कितनी अच्छी बात कही सर आपने. सिर्फ आज के लिए हमें काम नहीं करना बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हमें काम करना है और उसके लिए हमारी जो यह पीढ़ी है मौजूदा उसको भी यह समझना होगा कि धरती हमारी मां है और हमारी मां का ख्याल हमें खुद ही रखना होगा.

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