BAT-BMS App: सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में वायरल हो रहे कुछ वीडियो ने इलेक्ट्रिक रिक्शा की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है. इन वीडियो में लोग दावा करते दिखाई दे रहे हैं कि वे केवल एक मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके चलते हुए ई-रिक्शा को रोक सकते हैं. इस दावे ने आम लोगों के साथ-साथ ई-रिक्शा चालकों की भी चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, इस पूरे मामले के पीछे एक तकनीकी कारण है, जिसे समझना जरूरी है. दरअसल, यह मामला ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाली कुछ खास लिथियम बैटरियों और उनके बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से जुड़ा हुआ है.
क्या है BAT-BMS ऐप और कैसे करता है काम?
BAT-BMS एक बैटरी मैनेजमेंट एप्लिकेशन है, जिसे चीन की कंपनी Shenzhen Grenergy Technology ने विकसित किया है. इस ऐप का मूल उद्देश्य ब्लूटूथ आधारित लिथियम बैटरियों की निगरानी करना है. इसके जरिए बैटरी का चार्ज लेवल, वोल्टेज, करंट, तापमान, चार्जिंग साइकिल और प्रत्येक सेल की स्थिति जैसी तकनीकी जानकारी देखी जा सकती है. यह ऐप ब्लूटूथ लो एनर्जी (BLE) तकनीक पर काम करता है और करीब 15 मीटर की दूरी तक बैटरी से कनेक्ट हो सकता है. इसे मुख्य रूप से सोलर पावर सिस्टम, ऑफ-ग्रिड सेटअप और अन्य ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए तैयार किया गया था.
Chinese app BAT-BMS sparks panic by remotely shutting off e-rickshaws & scooters via Bluetooth on their batteries.💀 pic.twitter.com/oeyG2haBqN
— Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) July 1, 2026
ऐप से ई-रिक्शा बंद होने की वजह क्या है?
भारत में इस्तेमाल होने वाले कुछ इलेक्ट्रिक रिक्शा में ऐसी लिथियम बैटरियां लगी होती हैं, जिनमें ब्लूटूथ सपोर्ट पहले से मौजूद रहता है. कई मामलों में इन बैटरियों की ब्लूटूथ सेटिंग्स को सुरक्षित तरीके से कॉन्फिगर नहीं किया जाता और न ही कनेक्टिविटी को बंद किया जाता है. ऐसे में यदि कोई व्यक्ति बैटरी की ब्लूटूथ रेंज के भीतर पहुंच जाए, तो वह उपयुक्त ऐप के जरिए बैटरी से कनेक्ट होने की कोशिश कर सकता है. यदि कनेक्शन स्थापित हो जाता है, तो बैटरी की आउटपुट सप्लाई को अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है. इससे ई-रिक्शा की मोटर को बिजली मिलना रुक जाता है और वाहन बीच सड़क पर ठहर सकता है.
क्या हर इलेक्ट्रिक रिक्शा इस खतरे की जद में है?
इस तरह की घटना हर ई-रिक्शा के साथ संभव नहीं है. यह केवल उन वाहनों पर लागू होती है, जिनमें ब्लूटूथ सक्षम और संबंधित ऐप के साथ संगत बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम लगा हो. जिन बैटरियों में ब्लूटूथ सुविधा मौजूद नहीं है या सुरक्षा सेटिंग्स सही तरीके से लागू की गई हैं, वे इस तरह की एक्सेस से सुरक्षित रहती हैं. इसके अलावा, पारंपरिक लीड-एसिड बैटरी वाले ई-रिक्शा पर इस ऐप का कोई असर नहीं पड़ता. इसलिए वायरल वीडियो देखने के बाद यह मान लेना सही नहीं होगा कि देश के सभी इलेक्ट्रिक रिक्शा को किसी भी मोबाइल ऐप से रोका जा सकता है. यह समस्या केवल कुछ विशेष प्रकार की बैटरियों और उनकी असुरक्षित कॉन्फिगरेशन तक सीमित है.
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