Bangladesh Economy: बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर रही है. कभी एशिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल यह देश अब “कर्ज के जाल” में फंस चुका है. सरकारी एजेंसियों और शीर्ष अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि देश का वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है और विदेशी निवेश लगभग ठप हो चुका है.
बांग्लादेश के वित्त मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2025 तक देश का कुल बकाया कर्ज लगभग 19.99 लाख करोड़ टका पहुंच गया है, जिसमें विदेशी कर्ज 8.41 लाख करोड़ टका है. इस भारी कर्ज के दबाव ने सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं को बदल दिया है. अब सबसे बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान पर जा रहा है, जबकि पहले शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों पर अधिक खर्च होता था.
टैक्स-टू-GDP दर में गिरावट और वित्तीय निर्भरता
नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (NBR) के चेयरमैन एम. अब्दुर रहमान खान ने चेतावनी दी कि टैक्स-टू-GDP दर घटकर लगभग 7 प्रतिशत रह गई है. उन्होंने कहा कि देश धीरे-धीरे “खतरनाक वित्तीय निर्भरता” की ओर बढ़ रहा है. उनका कहना है कि लगातार घटते राजस्व और बढ़ते खर्चों के कारण देश की अर्थव्यवस्था गंभीर जोखिम में है.
बजट कटौती और विकास परियोजनाओं पर प्रभाव
फाइनेंस सेक्रेटरी एम. खैरूज्जमां मजूमदार ने बताया कि इस साल का राष्ट्रीय बजट इतिहास में सबसे छोटा रहा. उन्होंने इसे ऐसे उदाहरण से समझाया कि “एक दुबले आदमी से वजन घटाने को कहा जाए.” लगातार बजट में कटौती के कारण विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे पर गंभीर असर पड़ सकता है.
बैंकिंग प्रणाली पर दबाव और डिफॉल्ट लोन में वृद्धि
बांग्लादेश बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि केवल छह महीनों में डिफॉल्ट लोन में 2.24 लाख करोड़ टका की वृद्धि हुई, जो सितंबर 2025 तक बढ़कर 6.44 लाख करोड़ टका तक पहुंच गई. यह कुल बैंकिंग क्रेडिट का 35.7 प्रतिशत है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह वित्तीय प्रणाली की कमजोरी और निगरानी में कमी का स्पष्ट संकेत है.
विदेशी कर्ज और अंतरराष्ट्रीय दबाव
वर्ल्ड बैंक की इंटरनेशनल डेट रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में बांग्लादेश का बाहरी कर्ज 42 प्रतिशत बढ़ गया है और 2024 के अंत तक यह 104.48 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. विदेशी कर्ज अब देश की निर्यात आय का 192 प्रतिशत बन चुका है और कर्ज चुकाने का भुगतान निर्यात का 16 प्रतिशत तक पहुँच गया है. इस स्तर पर बाहरी कर्ज का दबाव देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन गया है.
निवेशक हतोत्साहित और अर्थव्यवस्था में अस्थिरता
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश की कमी ने देश की विकास दर को प्रभावित किया है. एनर्जी संकट, महंगाई, ऊँची ब्याज दरें, राजनीतिक हिंसा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमजोर स्थिति ने निवेशकों का विश्वास कम कर दिया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, देश में निवेश में इतनी बड़ी गिरावट पहले कभी नहीं देखी गई.
भविष्य की चुनौतियां और सुधार की जरूरत
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि राजस्व बढ़ाने, बैंकिंग सुधार लागू करने और राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने जैसे कदम नहीं उठाए गए, तो बांग्लादेश 2026 तक पूर्ण कर्ज संकट का सामना कर सकता है. विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी आर्थिक कठिनाइयों की शुरुआत मान रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय मदद की संभावना
स्थिति को देखते हुए यह संभावना है कि बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय कर्ज सहायता, जैसे IMF या वर्ल्ड बैंक से सहायता लेनी पड़े. देश के विशेषज्ञ और वित्तीय संस्थान लगातार सुधार और स्थिर नीतियों की मांग कर रहे हैं ताकि निवेशकों का विश्वास बहाल हो और आर्थिक विकास को पुनः गति मिल सके.
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