इज़राइल–गाजा संघर्ष में एक बड़ा मोड़ आया है. इज़राइली सेना ने गाजा पट्टी के लगभग आधे हिस्से पर अपना सैन्य नियंत्रण स्थापित कर उसे नई सुरक्षा सीमा घोषित कर दिया है. यह घोषणा इज़राइली सेना प्रमुख ऐयाल जमीर ने सोमवार को गाजा में तैनात सैनिकों से बातचीत के दौरान की. उनके मुताबिक, गाजा में खींची गई तथाकथित “येलो लाइन” अब इज़राइल की नई सुरक्षा सीमा मानी जाएगी, और सेना इस स्थिति से पीछे नहीं हटेगी.
मौजूदा सैन्य पोज़िशन नहीं छोड़ी जाएगी- इज़राइल
सेना प्रमुख जमीर ने कहा कि इज़राइल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उन इलाकों को छोड़ने वाला नहीं है, जो फिलहाल उसके नियंत्रण में हैं. इन इलाकों में गाजा की बड़ी कृषि भूमि और मिस्र से जुड़ा महत्वपूर्ण रफ़ा बॉर्डर क्रॉसिंग शामिल हैं. रफ़ा वह एंट्री पॉइंट है जो वर्षों से गाजा की आवाजाही और मानवीय सहायता के लिए अहम माना जाता रहा है.
इज़राइली सरकार ने जमीर के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सरकार के एक अधिकारी ने यह जरूर कहा कि सेना “सीजफायर समझौते की शर्तों के मुताबिक ही तैनात है” और यह आरोप दोहराया कि हमास खुद संघर्षविराम का उल्लंघन कर रहा है.
अमेरिका की योजना के तहत गाजा दो हिस्सों में बंटेगा
डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित सीजफायर प्लान में गाजा को दो बड़े हिस्सों में बांटने की बात की गई है. इस योजना में:
पूर्वी हिस्सा ग्रीन ज़ोन कहलाएगा, जहाँ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल (ISF) और इज़राइली सेना संयुक्त रूप से तैनात रहेंगे.
पश्चिमी हिस्सा रेड ज़ोन होगा, जहाँ फिलिस्तीनी आबादी पहले से ही विस्थापित होकर बड़ी संख्या में फंसी हुई है. यह क्षेत्र युद्ध में सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त है और फिलहाल इसके पुनर्निर्माण की कोई योजना नहीं है.
दोनों क्षेत्रों को एक “येलो लाइन” से अलग किया जाएगा— यही वह लाइन है जिसे इज़राइली सेना अब सुरक्षा सीमा बता रही है.
20 लाख से अधिक लोग संकुचित क्षेत्र में फंसे
लगातार बमबारी और ज़मीनी अभियानों के चलते गाजा की आबादी का बड़ा हिस्सा सीमित इलाकों में मजबूरन रह रहा है. अनुमान है कि 20 लाख से अधिक लोग गाजा के पश्चिमी हिस्से की एक पतली पट्टी में शरण लिए हुए हैं. स्वास्थ्य सेवाएँ, भोजन, पानी और दवाइयाँ पहले ही बेहद सीमित हो चुकी हैं, और हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं.
ग्रीन ज़ोन में विदेशी सैनिक, रेड ज़ोन खंडहर
अमेरिका चाहता है कि ग्रीन ज़ोन में तैनात होने वाले अंतरराष्ट्रीय सैनिकों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिले. शुरुआती चरण में कुछ सौ सैनिक भेजने की योजना है, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 20,000 तक किया जा सकता है.
इसके विपरीत रेड ज़ोन में कोई पुनर्निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा रहा है. युद्ध का सबसे ज्यादा बोझ इसी इलाके ने झेला है. न घर बचे हैं, न अस्पताल, न सड़कें और लाखों लोग अभी भी इनमें फंसे हुए हैं.
इज़राइल का रुख ट्रम्प के प्लान से टकराता हुआ
ट्रम्प के प्रस्ताव में साफ लिखा है कि इज़राइल गाजा पर कब्जा नहीं करेगा और न ही अपनी सीमाओं का विस्तार करेगा. योजना का अंतिम लक्ष्य था:
लेकिन इज़राइल की वर्तमान स्थिति इससे अलग दिशा में जाती दिख रही है. “येलो लाइन” के पास नई चौकियाँ बनाई गई हैं और इसे ‘नो-गो ज़ोन’ घोषित कर दिया गया है, जहाँ सीमा पार करने की कोशिश करने वालों को गोली मारने की अनुमति है.
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कई जगह यह लाइन आधिकारिक नक्शे से आगे बढ़ा दी गई है, जिससे इज़राइल का नियंत्रण क्षेत्र और विस्तार कर गया है. इससे आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों के हताहत होने के मामले बढ़े हैं.
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