Bangladesh On Bengal Result: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद इसका असर अब भारत की सीमाओं के बाहर भी दिखने लगा है. बांग्लादेश की राजनीति में इस बदलाव को एक नए मौके के रूप में देखा जा रहा है.
खासतौर पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने इस चुनाव परिणाम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से अटका तीस्ता जल बंटवारा समझौता आगे बढ़ सकता है.
ममता सरकार पर आरोप, नई सरकार से उम्मीद
BNP ने साफ तौर पर कहा है कि पहले यह समझौता आगे नहीं बढ़ पाया क्योंकि पश्चिम बंगाल की पिछली सरकार को इस पर आपत्ति थी. उनका मानना है कि राज्य स्तर की राजनीति के कारण यह अहम समझौता बार-बार रुकता रहा. अब जब राज्य में सरकार बदल गई है, तो बांग्लादेश को उम्मीद है कि माहौल भी बदलेगा और बातचीत आगे बढ़ेगी.
बीजेपी नेतृत्व की तारीफ
BNP के नेताओं ने बीजेपी की जीत की सराहना भी की है. उन्होंने कहा कि नए नेतृत्व के आने से भारत और बांग्लादेश के रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं. पार्टी के नेताओं का मानना है कि अगर केंद्र और राज्य सरकार के बीच अच्छा तालमेल बना, तो इस मुद्दे पर जल्द प्रगति हो सकती है.
तीस्ता समझौता क्यों है इतना जरूरी
तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश के बीच एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा रही है. दोनों देशों के बीच कई बार इस पर समझौते की कोशिश हुई, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से बात आगे नहीं बढ़ पाई. 2011 में एक प्रस्ताव तैयार हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को करीब 37.5% और भारत को 42.5% पानी देने की बात कही गई थी. लेकिन यह समझौता लागू नहीं हो सका.
बदलते हालात और नई उम्मीदें
अब जब पश्चिम बंगाल में सत्ता बदल गई है, तो बांग्लादेश को लग रहा है कि यह एक सकारात्मक संकेत है. उनका मानना है कि भारत की केंद्र सरकार और नई राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल से यह मुद्दा हल हो सकता है.
भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 50 से ज्यादा साझा नदियां हैं, लेकिन अब तक सिर्फ गंगा और कुशियारा नदी को लेकर ही समझौते हो पाए हैं. ऐसे में तीस्ता समझौता दोनों देशों के लिए बहुत अहम माना जाता है.
केंद्र सरकार की भूमिका अहम
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बड़े फैसले सिर्फ राज्य सरकार के भरोसे नहीं होते. इसमें केंद्र सरकार की भूमिका भी उतनी ही जरूरी होती है. तीस्ता जैसे मुद्दे पर अंतिम फैसला तभी हो सकता है जब केंद्र और राज्य दोनों मिलकर काम करें और सभी पक्षों की सहमति बने.
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