Bangladesh IMF Installment: आर्थिक संकट से जूझ रहे बांग्लादेश के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच से एक और बुरी खबर आई है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साफ कर दिया है कि जब तक देश में नई निर्वाचित सरकार नहीं बन जाती, वह अपनी छठी लोन किस्त जारी नहीं करेगा. यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार दुनिया के सामने खुद को स्थिर दिखाने की कोशिश कर रही है.
IMF ने संकेत दिया है कि वह किसी भी नई फंडिंग से पहले यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बांग्लादेश की अगली सरकार आर्थिक सुधारों को लेकर स्पष्ट और प्रतिबद्ध हो. करीब 800 मिलियन डॉलर (लगभग ₹6,720 करोड़ रुपये) की यह लोन किस्त दिसंबर में जारी होनी थी, लेकिन IMF ने इसे स्थगित कर दिया है. IMF ने बांग्लादेश को 2023 में 5.5 अरब डॉलर के पैकेज की मंज़ूरी दी थी, जिसमें से अब तक पांच किस्तों में 3.6 अरब डॉलर मिल चुके हैं.
अंतरिम सरकार को झटका
फिलहाल बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार चल रही है. पिछले साल शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद सत्ता का यह अस्थायी स्वरूप बना, और अब देश 2026 में आम चुनाव की तैयारी में है. IMF का साफ रुख है, जब तक एक स्थायी, चुनी हुई सरकार नहीं बन जाती, तब तक वह किसी भी फंड को आगे नहीं बढ़ाएगा.
IMF की पॉलिसी: पहले प्रतिबद्धता, फिर पैसा
IMF का मानना है कि नई सरकार यह स्पष्ट करे कि क्या वह मौजूदा आर्थिक सुधार कार्यक्रम को जारी रखेगी या नहीं. संस्था का रुख यह है कि किसी भी देश में अस्थायी राजनीतिक स्थिति में नीतिगत अनिश्चितता रहती है, और ऐसे में फंड जारी करना जोखिम भरा हो सकता है.
IMF पहले भी ऐसी रणनीति अपना चुका है, जैसे कि 2001 के चुनावों से पहले भी उसने बांग्लादेश को किस्त रोककर अपनी शर्तें मनवाने का प्रयास किया था. 2022 में IMF के दबाव में ही बांग्लादेश को ईंधन और गैस की कीमतें बढ़ानी पड़ी थीं.
ढाका जाएगा IMF प्रतिनिधिमंडल
IMF का एक प्रतिनिधिमंडल 29 अक्टूबर से ढाका में रहेगा और दो सप्ताह तक चलने वाली इस यात्रा में देश की आर्थिक स्थिति की समीक्षा करेगा. इसके बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिस पर अगली किस्त निर्भर होगी.
बांग्लादेश के जवाब
इस मुद्दे पर बांग्लादेश बैंक के गवर्नर डॉ. अहसान एच. मंसूर ने बयान दिया है कि देश की आर्थिक स्थिति स्थिर है और विदेशी मुद्रा भंडार 32.14 अरब डॉलर के स्तर पर है. उन्होंने कहा कि IMF का सहयोग ज़रूरी है, लेकिन अगर फिलहाल लोन नहीं मिलता, तब भी देश अपने दम पर अर्थव्यवस्था को संभाल सकता है. वहीं, बांग्लादेश के पूर्व आर्थिक सलाहकार डॉ. सालेहुद्दीन अहमद ने कहा, "अगर IMF अपनी शर्तें सख्त करता है, तो बांग्लादेश उन्हें स्वीकार करने को मजबूर नहीं है."
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