ढाका/नई दिल्ली: भारत के संवेदनशील क्षेत्र सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास बांग्लादेश ने लालमनिरहाट एयरबेस पर व्यापक सैन्य गतिविधियाँ तेज कर दी हैं. नॉर्थ ईस्ट आई और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, एयरबेस का विस्तार और अपग्रेडेशन तेजी से चल रहा है, जिससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों में सतर्कता बढ़ गई है.
बांग्लादेश के अधिकारियों ने एयरबेस पर फ्लडलाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया है. एयर फोर्स और आर्मी एविएशन ग्रुप की मौजूदगी के कारण रात में भी यहां निगरानी पूरी तरह से जारी रहती है. एयरबेस का महेंद्रनगर यूनियन के तहत हरिभंगा गांव में निर्माण कार्य चल रहा है और इसे भविष्य में लड़ाकू विमानों, ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरणों के संचालन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है.
एयरबेस का भौगोलिक महत्व और संरचना
लालमनिरहाट एयरबेस बांग्लादेश के रंगपुर डिविजन में स्थित है और भारत के पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर है. इसकी सीमा के आसपास बाउंड्री फेंसिंग की गई है और 24 घंटे निगरानी के लिए फ्लडलाइट्स और गश्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है.
सूत्रों के मुताबिक एयरबेस का क्षेत्रफल लगभग 1,166 एकड़ में फैला है और यहाँ पर 4 किलोमीटर लंबा रनवे बन रहा है. हैंगर का निर्माण अंतिम चरण में है, जिसमें फर्श पर कंक्रीट की परत बिछाई जा रही है. इस हैंगर का इस्तेमाल भविष्य में लड़ाकू विमानों और ड्रोन के पार्किंग और परिचालन के लिए किया जा सकेगा.
सिलिगुड़ी कॉरिडोर: भारत की रणनीतिक संवेदनशीलता
सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जिसे “चिकन नेक” भी कहा जाता है, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला केवल 22–23 किलोमीटर चौड़ा मार्ग है. यह क्षेत्र भारत की रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है.
बांग्लादेश के इस एयरबेस अपग्रेडेशन ने भारत को सतर्क कर दिया है. भारतीय अर्धसैनिक बल, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने 22 नवंबर को सिलिगुड़ी में आपात बैठक की. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने न केवल सीमा पर सतर्कता बढ़ाई है, बल्कि बिहार, असम और पश्चिम बंगाल में तीन नए सैन्य ठिकाने स्थापित किए हैं ताकि पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
चीन के संभावित हस्तक्षेप पर नजर
सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश ने लालमनिरहाट एयरबेस के निर्माण और अपग्रेडेशन में चीन को शामिल करने का प्रयास किया है. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या चीन की कोई सक्रिय भागीदारी रही है या नहीं.
16 अक्टूबर को बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने लालमनिरहाट और ठाकुरगांव एयरबेस का दौरा किया. इसी दौरान भारत की मिलिट्री इंटेलिजेंस टीम के तीन अधिकारी भी बांग्लादेश दौरे पर थे. ठाकुरगांव एयरफील्ड, लालमनिरहाट से लगभग 140 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है, और वहाँ भी हाल के महीनों में सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों में तेजी आई है.
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