Yunus Spying On Sheikh Hasina: बांग्लादेश की राजनीति में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है. देश की मौजूदा यूनुस सरकार ने भारत की राजधानी दिल्ली में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की निगरानी के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सेल (Special Monitoring Cell) बना दिया है. इस बात की पुष्टि खुद सरकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने मीडिया से बातचीत में की है.
आलम ने कहा कि शेख हसीना की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है, चाहे वह उनके राजनीतिक संपर्क हों या सोशल मीडिया पर दिए गए संदेश. यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब हसीना ने हाल ही में तीन अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों को इंटरव्यू देकर मौजूदा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे.
शेख हसीना पर निगरानी की पुष्टि
बांग्लादेश के प्रतिष्ठित अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा कि “सरकार ने एक समर्पित टीम बनाई है जो दिल्ली में रह रही पूर्व प्रधानमंत्री की सभी गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर रही है. हम लगातार खुफिया एजेंसियों से रिपोर्ट प्राप्त कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की राजनीतिक अस्थिरता या प्रचार को रोका जा सके.”
आलम ने यह भी बताया कि सरकार आवामी लीग (Awami League) के उन सदस्यों की पहचान कर रही है जो अब भी शेख हसीना के संपर्क में हैं. उन्होंने साफ चेतावनी दी, “ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी जो हसीना से संपर्क बनाए हुए हैं या उनकी गतिविधियों में सहयोग कर रहे हैं.”
प्रेस सचिव की टिप्पणी और राजनीतिक संदेश
प्रेस सचिव ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह भी कहा कि शेख हसीना कई मौकों पर सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को गुप्त संदेश भेजती रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि हसीना ने बांग्लादेश में जुलाई 2024 के विद्रोहियों को “आतंकवादी” कहा था, जिससे देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश हुई.
शफीकुल आलम ने कहा, “सरकार किसी भी तरह की उकसाने वाली गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी. हसीना के खिलाफ चल रहे मामलों पर अदालत का फैसला आने के बाद हम भारत सरकार से संपर्क करेंगे और आगे की कार्रवाई तय करेंगे.”
हसीना की गिरफ़्तारी और दिल्ली में शरण
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अगस्त 2024 में एक सैन्य और राजनीतिक तख्तापलट के दौरान सत्ता से बेदखल कर दिया गया था. इसके बाद उन्होंने अपने परिवार के साथ नई दिल्ली में शरण ली. वे वर्तमान में दिल्ली के लोधी गार्डन इलाके में रह रही हैं, जहां सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम हैं.
भारत सरकार ने उनके रहने की अनुमति मानवीय आधार पर दी थी. बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों से वे भारत में रहकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया को कई इंटरव्यू दे चुकी हैं, जिसमें उन्होंने यूनुस सरकार पर लोकतंत्र खत्म करने और विदेशी ताकतों के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया है.
तीन इंटरव्यू के बाद बढ़ी निगरानी
शेख हसीना ने हाल ही में रॉयटर्स, एएफपी और द इंडिपेंडेंट जैसी वैश्विक एजेंसियों को इंटरव्यू दिए थे. इन इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार को 2024 में अमेरिका और पाकिस्तान की मदद से गिराया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में “कट्टरपंथी तत्वों” को खुली छूट दी जा रही है.
इन्हीं बयानों के बाद बांग्लादेश सरकार सक्रिय हो गई. शफीकुल आलम ने कहा कि “सरकार हसीना की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए है, ताकि उनके किसी बयान से देश में अस्थिरता न फैले.”
शेख हसीना पर चल रहे मुकदमे
शेख हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश भ्रष्टाचार, राजनीतिक हत्याओं और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े हैं. यूनुस सरकार का कहना है कि इन मामलों में ठोस सबूत मौजूद हैं और अदालत में ट्रायल चल रहा है.
हालांकि, हसीना ने हमेशा इन आरोपों को “राजनीतिक साजिश” बताया है. उनका कहना है कि मौजूदा सरकार उन्हें और उनकी पार्टी को बर्बाद करने की कोशिश कर रही है.
बांग्लादेश की राजनीति में हसीना का प्रभाव
शेख हसीना का बांग्लादेश की राजनीति में एक गहरा प्रभाव रहा है. वे देश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की बेटी हैं, जिन्होंने 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई में नेतृत्व किया था. हसीना 2008 से 2024 तक लगातार प्रधानमंत्री रहीं और देश को कई आर्थिक और सामाजिक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ाया.
उनकी पार्टी, आवामी लीग, लंबे समय तक बांग्लादेश की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत रही. लेकिन 2024 के तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस की सरकार सत्ता में आई, जिसने हसीना पर कई आपराधिक मामलों में कार्रवाई शुरू की.
हसीना और यूनुस के बीच सत्ता संघर्ष
मोहम्मद यूनुस, जो कभी बांग्लादेश में “गरीबी उन्मूलन के प्रतीक” माने जाते थे और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हैं, अब प्रधानमंत्री बनने के बाद खुद को “लोकतांत्रिक सुधारक” बताते हैं. उनका कहना है कि शेख हसीना ने अपने कार्यकाल में विरोधियों पर अत्याचार किया, न्यायपालिका को प्रभावित किया और विपक्ष की आवाज़ दबाई. दूसरी ओर, हसीना का दावा है कि यूनुस सरकार विदेशी दबाव में काम कर रही है और देश में “कट्टरपंथियों के हाथों की कठपुतली” बन चुकी है.
जासूसी पर उठ रहे सवाल
हसीना की जासूसी की खबर सामने आने के बाद दक्षिण एशियाई राजनीति में हलचल मच गई है. कई विश्लेषकों का मानना है कि किसी पूर्व प्रधानमंत्री की विदेशी धरती पर निगरानी करवाना कूटनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है. हालांकि, ढाका की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि “हसीना अभी भी देश की न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, इसलिए उन पर नजर रखना राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है.” भारत की ओर से फिलहाल इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
भविष्य की दिशा
शफीकुल आलम ने संकेत दिए कि जैसे ही अदालत से शेख हसीना के खिलाफ फैसला आता है, यूनुस सरकार भारत से औपचारिक रूप से प्रत्यर्पण (extradition) की मांग कर सकती है. हालांकि, भारत इस मुद्दे पर बेहद सावधानी से कदम उठा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक संबंध काफी संवेदनशील हैं.
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