बांग्लादेश की राजधानी ढाका के मीरपुर इलाके में मंगलवार दोपहर एक भयावह हादसा सामने आया, जिसने न सिर्फ शहर को दहला दिया बल्कि एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. एक सात मंजिला कपड़ा फैक्ट्री की तीसरी मंजिल से उठी आग की लपटें कुछ ही मिनटों में पास के रसायन भंडारण गोदाम तक पहुंच गईं और पूरा इलाका जलती आग की भट्टी में तब्दील हो गया.
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, आग सबसे पहले फैक्ट्री की तीसरी मंजिल पर लगी, जहां कथित तौर पर उत्पादन कार्य चल रहा था. इसके कुछ ही देर बाद आग ने बगल में स्थित एक गैर-कानूनी केमिकल गोदाम को चपेट में ले लिया, जहां ब्लिचिंग पाउडर, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड और प्लास्टिक जैसे अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ रखे थे. इससे स्थिति और विकराल हो गई.
दमकल की 12 गाड़ियों ने संभाला मोर्चा, रात तक जारी रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
आग की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचीं दमकल की 12 इकाइयों ने तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद फैक्ट्री के भीतर लगी आग को काबू में किया, लेकिन केमिकल गोदाम की आग देर रात तक सुलगती रही. राहत और बचाव कार्य में बांग्लादेश आर्मी, पुलिस और बॉर्डर गार्ड के जवान भी लगाए गए थे. फायर सर्विस निदेशक ताजुल इस्लाम चौधरी ने जानकारी दी कि अब तक 16 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश जले हुए हालत में हैं. कई लोग अब भी लापता हैं.
अफरातफरी और मातम का मंजर
घटनास्थल के पास ग़म और खौफ का माहौल देखा गया. लोग अपने लापता परिजनों की तस्वीरें लेकर मलबे के पास भटकते दिखे, कहीं से कोई उम्मीद की किरण पाने की आस में. बचाव दल के सदस्य मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हैं, लेकिन रसायनों के कारण काम में काफी दिक्कतें आ रही हैं.
फैक्ट्री मालिक फरार, लाइसेंस पर भी सवाल
फायर अधिकारी तल्हा बिन जसीम ने बताया कि आग के कारणों की जांच की जा रही है. अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि फैक्ट्री और केमिकल गोदाम के पास संचालन का वैध लाइसेंस था या नहीं. शुरुआती जांच में यह संदेह जताया गया है कि गोदाम अवैध रूप से चलाया जा रहा था. पुलिस ने फैक्ट्री मालिक की तलाश शुरू कर दी है, जो घटना के बाद से फरार है.
सरकारी प्रतिक्रिया और संवेदनाएं
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने इस दुखद घटना पर गहरी संवेदना प्रकट की है. उन्होंने प्रशासन को घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने और हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं अब बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और दोषियों को सख्त सज़ा दी जाएगी.
अभी भी सबक नहीं सीखा?
बांग्लादेश में औद्योगिक सुरक्षा की अनदेखी नई नहीं है. इससे पहले भी 2013 के राणा प्लाजा हादसे में 1100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. कपड़ा उद्योग बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, जो लगभग 40 लाख लोगों को रोजगार देता है और देश की GDP का करीब 10% हिस्सा है. बावजूद इसके, हर साल अग्निकांड जैसी घटनाएं न सिर्फ जानें लेती हैं बल्कि देश की साख और आर्थिक स्थिरता पर भी गहरा असर डालती हैं.
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