इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर रहे थे, उसी दौरान पाकिस्तान के लिए एक बड़ा और अप्रत्याशित झटका सामने आया. बलूचिस्तान के खनिज संपन्न दो जिलों सुराब और कलात पर बलूच विद्रोही संगठनों ने कथित तौर पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया. यह कार्रवाई न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट बन गई है, बल्कि अमेरिका के साथ चल रही खनिज समझौतों की बातचीत को भी गहरा प्रभाव डाल सकती है.
क्या हुआ बलूचिस्तान में?
25 सितंबर की रात बलूचिस्तान के सुराब और कलात जिलों में बलूच डिफेंस एंड सिक्योरिटी फोर्सेज नामक एक स्थानीय संगठन ने कथित रूप से दो महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों पर कब्जा जमा लिया. विद्रोहियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर चेकपोस्ट स्थापित कर दीं, और पाकिस्तानी सेना की दो गाड़ियों को कब्जे में ले लिया. इन वाहनों से हथियार और अन्य सैन्य आपूर्ति सामग्री भी जब्त की गई है.
बलूच नेताओं का दावा है कि यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और रणनीतिक संदेश है कि यह साबित करने के लिए कि बलूच लोग अब अपने संसाधनों और जमीन पर बाहरी नियंत्रण को स्वीकार नहीं करेंगे.
शहबाज-ट्रंप मुलाकात पर पड़ा असर
इस कार्रवाई का समय बहुत ही संवेदनशील था. उसी दिन अमेरिका में शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर की डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात हो रही थी, जिसमें कथित तौर पर बलूचिस्तान के दुर्लभ खनिज संसाधनों के दोहन को लेकर चर्चा हो रही थी. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से जिन क्षेत्रों को लेकर चर्चा चल रही थी, उन पर अब पाकिस्तान का ही नियंत्रण नहीं रह गया है.
इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या पाकिस्तान उन संसाधनों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सौदा कर सकता है, जिन पर उसका नियंत्रण ही नहीं है?
बलूच नेता मीर यार बलूच का बड़ा बयान
इस घटनाक्रम के कुछ ही घंटों बाद, बलूच नेता मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया पर एक बड़ा बयान जारी किया. उन्होंने कहा, "हमने सुराब और कलात में पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया है. राष्ट्रीय राजमार्ग पर चेकपोस्ट लगाए जा चुके हैं. पाकिस्तानी सेना के दो सैन्य वाहन हथियार और रसद के साथ कब्जे में ले लिए गए हैं. यह इस बात का प्रमाण है कि बलूच स्वतंत्रता आंदोलन मजबूत हो रहा है, जबकि पाकिस्तान की सेना अपना प्रभाव खो चुकी है."
Breaking News:
— Mir Yar Baloch (@miryar_baloch) September 26, 2025
During Trump-Shehbaz Munir meeting, Balochistan took control of its two minerals rich regions
25 September 2025
The U.S. President’s agreement with Pakistan’s corrupt generals over Balochistan’s minerals is nothing less than betting on a losing horse and sinking… pic.twitter.com/pf687d4hz9
उन्होंने इस कार्रवाई को बलूच जनांदोलन की निर्णायक सफलता करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान की सेना अब केवल नाम की हुकूमत चला रही है और जमीन पर उसका कोई वास्तविक नियंत्रण नहीं है.
ट्रंप को खुला संदेश: मालिकों से बात करें
मीर यार बलूच ने डोनाल्ड ट्रंप को सीधे तौर पर संबोधित करते हुए एक स्पष्ट और तीखा संदेश भी भेजा. उन्होंने कहा कि, "ट्रंप को एक मित्रवत सलाह यह है कि वे पाकिस्तान की कब्जा करने वाली सेना के बजाय बलूचिस्तान के वास्तविक प्रतिनिधियों से संवाद करें. बलूच लोग ही इस जमीन के असली मालिक हैं, और संसाधनों को लेकर कोई भी बातचीत उनकी भागीदारी के बिना वैध नहीं हो सकती."
उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान ने हमेशा अमेरिकी हितों को धोखा दिया है और आगे भी देगा, जबकि बलूचिस्तान अमेरिका के साथ पारदर्शी और समानता पर आधारित साझेदारी के लिए तैयार है.
अमेरिका और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को चेतावनी
मीर यार बलूच ने आगे चेतावनी दी कि यदि अमेरिका, या कोई अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनी, बलूचों की "स्वतंत्र और सूचित सहमति" के बिना उनके संसाधनों का दोहन करने का प्रयास करती है, तो उसे "नाजायज और अस्वीकार्य" माना जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि बलूच समुदाय अब बाहरी हस्तक्षेप और लूट की नीतियों को सहन नहीं करेगा.
बलूचिस्तान: एक रणनीतिक और आर्थिक मोर्चा
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यह दशकों से अशांति और विद्रोह का गढ़ रहा है. यह इलाका रेयर अर्थ मिनरल्स, तांबा, सोना, और अन्य बहुमूल्य संसाधनों के लिए जाना जाता है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिससे इसकी भू-राजनीतिक महत्ता और भी बढ़ जाती है.
लेकिन अब इस क्षेत्र पर बलूच विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव और सैन्य कार्रवाइयों ने न केवल पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति को अस्थिर किया है, बल्कि अमेरिका, चीन और अन्य वैश्विक शक्तियों के लिए भी नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.